MP News: मध्य प्रदेश में कोरोना से कैसे हुई चौथी मौत, मंडला की गर्भवती महिला की जबलपुर में मृत्यु

MP News: मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस (COVID-19) ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। रविवार, 15 जून 2025 की रात को मंडला जिले के नारायणगंज की एक 21 वर्षीय गर्भवती महिला की जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कोरोना से मृत्यु हो गई। यह 2025 में मध्य प्रदेश में कोरोना से चौथी मौत है और महाकौशल क्षेत्र में इस सीजन की पहली मौत।

महिला को डिलीवरी के लिए भर्ती कराया गया था, और सर्जरी के बाद बच्चे को जन्म देने के बावजूद उनकी हालत बिगड़ गई। इस हादसे ने न केवल स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं, बल्कि इंटिग्रेटेड डिजीज सर्विलेंस प्रोग्राम (IDSP) द्वारा हेल्थ बुलेटिन बंद करने के फैसले को भी विवादास्पद बना दिया है।

Fourth death due to corona in MP pregnant woman from Mandla dies in Jabalpur

हादसे का विवरण

मंडला जिले के नारायणगंज से रेफर होकर आई इस महिला को सर्दी और खांसी जैसे लक्षणों के आधार पर जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजय मिश्रा के अनुसार, "महिला का कोरोना टेस्ट किया गया, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद उनकी सिजेरियन सर्जरी की गई, और उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया। सर्जरी के बाद उनकी ऑक्सीजन का स्तर गिर गया, जिसके कारण उन्हें मेडिसिन विभाग के आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया गया। देर रात उनकी मृत्यु हो गई।"

डॉ. मिश्रा ने बताया कि महिला को पिछले तीन वर्षों से सांस की तकलीफ थी, जिसने उनकी स्थिति को और गंभीर बना दिया। नवजात शिशु को फिलहाल मेडिकल कॉलेज के चाइल्ड वार्ड में रखा गया है और उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। बच्चे का कोरोना टेस्ट भी किया गया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है।

मध्य प्रदेश में कोरोना की स्थिति

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रविवार, 15 जून 2025 को मध्य प्रदेश में कोरोना के 4 नए मामले दर्ज किए गए, जिसके साथ 2025 में कुल संक्रमितों की संख्या 200 हो गई है। इनमें से 134 सक्रिय मामले हैं, 62 मरीज ठीक हो चुके हैं, और 4 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। जबलपुर में वर्तमान में केवल एक सक्रिय मामला है, जबकि दो अन्य पॉजिटिव मरीज, जो पड़ोसी शहरों से हैं, आइसोलेशन में हैं।

हालांकि, इंटिग्रेटेड डिजीज सर्विलेंस प्रोग्राम (IDSP) द्वारा जिलेवार आंकड़े जारी न करने के फैसले ने स्थिति को और अस्पष्ट कर दिया है। 2020 में महामारी शुरू होने के बाद यह पहली बार है कि मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ने रोजाना हेल्थ बुलेटिन जारी करना बंद कर दिया है, जबकि अन्य राज्य जैसे केरल और महाराष्ट्र नियमित रूप से अपडेट साझा कर रहे हैं। इस चुप्पी ने जनता और विपक्षी दलों में असंतोष पैदा किया है।

पहले हुई तीन मौतें

  • मध्य प्रदेश में 2025 में इससे पहले तीन अन्य महिलाओं की कोरोना से मृत्यु हो चुकी है, जिनमें सभी की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति अलग थी। ये मामले इस प्रकार हैं:
  • रतलाम (11 जून 2025): 52 वर्षीय महिला, जिन्हें टीबी, ब्रोंकाइटिस, और हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी थी। उनकी मृत्यु इंदौर के मनोरमा राजे टीबी (MRTB) अस्पताल में इलाज के दौरान हुई।
  • खरगोन (6 जून 2025): 44 वर्षीय महिला, जिन्होंने हाल ही में एमटीएच अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। उनकी मृत्यु भी MRTB अस्पताल, इंदौर में हुई।
  • इंदौर (27 अप्रैल 2025): 74 वर्षीय महिला, जिन्हें किडनी की बीमारी थी। उनकी मृत्यु श्री अरबिंदो अस्पताल में इलाज के दौरान हुई।
  • इन सभी मामलों में मृतकों को पहले से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं, जो कोरोना संक्रमण के बाद और जटिल हो गईं।

नए वेरिएंट और स्वास्थ्य विभाग की चुनौतियां

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, भारत में चार नए कोविड-19 वेरिएंट्स-LF.7, XFG, JN.1, और NB.1.8.1-पाए गए हैं। इनमें JN.1 वेरिएंट सबसे प्रमुख है, जो टेस्ट किए गए सैंपल्स में आधे से अधिक मामलों में पाया गया है। यह वेरिएंट रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करने के लिए जाना जाता है, जिसके कारण पहले से स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीजों के लिए यह घातक साबित हो रहा है।

मध्य प्रदेश में इंदौर सबसे ज्यादा प्रभावित शहर है, जहां 92 सक्रिय मामले हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। X पर एक यूजर ने लिखा, "मध्य प्रदेश में कोरोना के 150 से ज्यादा सक्रिय मामले हैं, लेकिन न तो RT-PCR टेस्ट हो रहे हैं और न ही कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग। क्या सरकार ऑटो-पायलट मोड पर है?"

स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी और विपक्ष का हमला

मध्य प्रदेश में हेल्थ बुलेटिन बंद होने के बाद विपक्षी कांग्रेस ने सरकार पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने X पर लिखा, "प्रदेश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार गहरी नींद में है। न RT-PCR टेस्ट हो रहे हैं, न मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त सुविधाएं।"

वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और जरूरत पड़ने पर टेस्टिंग और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग बढ़ाई जाएगी। हालांकि, कई सरकारी अस्पतालों में RT-PCR टेस्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं है, और 42 ऑक्सीजन प्लांट पिछले दो साल से बंद पड़े हैं, जिसने स्वास्थ्य ढांचे की कमजोरियों को उजागर किया है।

जबलपुर में स्थिति

जबलपुर में इस सीजन की यह पहली कोरोना से मृत्यु है। CMHO डॉ. संजय मिश्रा के अनुसार, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है, और महिला के परिवार वालों का भी टेस्ट किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक 79 कोविड टेस्ट किए गए हैं, जिनमें तीन पॉजिटिव मामले सामने आए हैं।

जबलपुर मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा, "महिला को सांस की तकलीफ थी, और सर्जरी के बाद उनकी स्थिति और बिगड़ गई। हमने सभी प्रोटोकॉल का पालन किया, लेकिन उनकी पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं ने स्थिति को जटिल बना दिया।"

सामाजिक प्रतिक्रियाएं

इस हादसे ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। X पर कई यूजर्स ने सरकार से मांग की है कि कोरोना से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। एक यूजर ने लिखा, "जबलपुर में एक गर्भवती महिला की कोरोना से मौत दुखद है। सरकार को हेल्थ बुलेटिन फिर से शुरू करना चाहिए ताकि जनता को सही जानकारी मिले।"

कुछ यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि जब अन्य राज्य रोजाना आंकड़े जारी कर रहे हैं, तो मध्य प्रदेश में हेल्थ बुलेटिन क्यों बंद किया गया। एक अन्य यूजर ने लिखा, "कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन न तो फॉगिंग हो रही है और न ही टेस्टिंग। क्या हम फिर से 2020 जैसी स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं?"

भविष्य के लिए सबक

  • यह हादसा मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे की कमियों को उजागर करता है। निम्नलिखित उपाय भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद कर सकते हैं:
  • हेल्थ बुलेटिन की बहाली: IDSP को रोजाना जिलेवार आंकड़े जारी करने चाहिए ताकि जनता में जागरूकता बढ़े।
  • टेस्टिंग और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग: RT-PCR टेस्ट की सुविधा सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध हो, और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग को तेज किया जाए।
  • ऑक्सीजन प्लांट्स की मरम्मत: बंद पड़े 42 ऑक्सीजन प्लांट्स को तत्काल चालू किया जाए।
  • जागरूकता अभियान: जनता को नए वेरिएंट्स और सावधानियों के बारे में शिक्षित करने के लिए अभियान चलाए जाएं।
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