Flashback 2022: अभेद किले बुंदेलखंड से कांग्रेस का सफाया, पार्षद प्रत्याशी तक नहीं मिल सके
मध्यभारत में कभी बुंदेलखंड कांग्रेस का अभेद गढ़ और किला कहलाता था, भाजपा को एक सीट निकालना भारी पड़ता था, लेकिन बीते दो दशक में इस अभेद गढ़ पर भाजपा का कब्जा हो गया है।

Flashback 2022: बुंदेलखंड और कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास में साल 2022 का नगरीय निकाय चुनाव हमेशा याद किया जाएगा। कारण कांग्रेस के सबसे बड़े गढ़ में उसकी जो दुर्गति हुई है, वह बीते 7 दशकों में कभी नहीं देखी गई। नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस के गढ़ के सारे मिथक टूट गए। सागर जिले में कुछ नगरीय निकाय तो ऐसे रहे जहां कांग्रेस का नाम लेने वाला तक नहीं बचा। भाजपा ने यहां ऐतिहासिक जीत का परचम लहराया है।

सागर सहित बुंदेलखंड में नहीं बचा सशक्त नेतृत्व
बुंदेलखंड में कांग्रेस के पास कभी एक से बढ़कर एक धाकड़ और जनाधार वाले नेता हुआ करते थे। भाजपा को यहां पार्षद, नपा अध्यक्ष, विधायक पद का जीतने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगाना पड़ता था, लेकिन अब हालात एकदम उलट-पटल गए हैं। अब कांग्रेस को यहां पार्षद पद तक के लिए प्रत्याशी नहीं मिल पाते। कई वार्ड व सीटों पर तो मजबूरी में लोगों की मान मनव्वल कर चुनाव लड़ाना पड़ता है या भाजपा के असंतुष्ठों को टिकट देना पड़ता है।
सागर में भाजपा-कांग्रेस की क्या रही थी स्थित
सागर नगर निगम कुल पार्षद सीट 48
- बीजेपी 41, कांग्रेस 7
- खुरई नगर पालिका कुल सीट 32
भाजपा 32, कांग्रेस 0.0
- मालथौन, बरोदिया, बांदरी कुल सीट 45
भाजपा- 45, कांग्रेस 0.0
- गढ़ाकोटा दमोह नगर पालिका शत-प्रतिशत भाजपा












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