MP News: इटावा कथावाचक कांड: कथावाचकों के साथ मारपीट ने मचाया बवाल, धीरेंद्र शास्त्री और उमा भारती ने की निंदा
MP news: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के दांदरपुर गांव में गैर-ब्राह्मण कथावाचकों के साथ हुई मारपीट और अपमान की घटना ने पूरे प्रदेश में हंगामा खड़ा कर दिया है। 21 जून को शुरू हुई इस घटना ने न केवल सामाजिक तनाव को जन्म दिया, बल्कि इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है।
इस मामले में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सख्त प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने इस अमानवीय घटना की निंदा करते हुए जातिवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है।

क्या है पूरा मामला?
इटावा के दांदरपुर गांव में 21 जून को भागवत कथा का आयोजन किया गया था, जिसमें यादव समाज के कथावाचक मुकुट मणि यादव और उनके सहयोगी संत सिंह यादव कथा कर रहे थे। 22 जून की रात को कुछ लोगों ने कथावाचकों की जाति पूछी और जब पता चला कि वे ब्राह्मण नहीं, बल्कि यादव हैं, तो उनके साथ मारपीट की गई। उनकी चोटी काट दी गई, सिर मुंडवाया गया और एक महिला के पैरों पर नाक रगड़वाने जैसी अपमानजनक हरकत की गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और तूल पकड़ गया।
पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों-आशीष तिवारी, उत्तम अवस्थी, प्रथम दुबे उर्फ मनु दुबे, और सयश कुमार दुबे-को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, इस घटना के बाद यादव समाज और अहीर रेजिमेंट ने बकेवर थाने का घेराव कर प्रदर्शन किया, जिसमें पथराव और हिंसा की घटनाएं भी हुईं। पुलिस ने इस बवाल में शामिल 19 लोगों को गिरफ्तार किया और 13 बाइकें व एक कार सीज की।
धीरेंद्र शास्त्री का बयान: "भगवान की कथा किसी जाति की बपौती नहीं"
25 दिन की विदेश यात्रा से लौटे बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, "इटावा में जो हुआ, वह निंदनीय है। अगर कथावाचक ने कोई गलती की थी, तो कानून और न्यायपालिका का सहारा लेना चाहिए था। खुद न्यायाधीश बनने से विद्रोह की स्थिति बनती है। भगवान की कथा किसी जाति विशेष की बपौती नहीं है।"
उन्होंने सनातन धर्म का हवाला देते हुए कहा, "महर्षि वेद व्यास, वाल्मीकि जी, मीरा, सूरदास, रविदास, और कबीरदास जैसे महापुरुषों ने भगवान की चर्चा की, लेकिन किसी ने उनकी जाति नहीं पूछी। उनकी वाणी ही उनकी पहचान थी।" उन्होंने रामचरितमानस का उदाहरण देते हुए कहा, "कौवा कर्कश बोलता है, लेकिन काग भुशुंडी महाराज की महिमा भी है। इसलिए जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान, मोल करो तलवार का, पड़ी रहने दो म्यान।"
धीरेंद्र शास्त्री ने कुछ नेताओं पर जातिवाद को भड़काने का आरोप लगाया और कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए जातिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने अपनी आगामी दिल्ली से वृंदावन तक की पदयात्रा (7 से 16 नवंबर) का जिक्र करते हुए कहा कि यह यात्रा जातिवाद और ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाने का प्रयास होगी।
उमा भारती: "राम कथा, कृष्ण कथा को लेकर कोई विवाद नहीं"
मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "मुझे इस पर कुछ कहना ही नहीं है। मैं मीडिया को भी समझा रही हूं कि इस पर चर्चा न करें, क्योंकि हमारे देश में राम कथा, कृष्ण कथा, या भागवत को लेकर कोई विवाद नहीं है। सबसे बड़े कथावाचक मुरारी बापू ब्राह्मण नहीं हैं, फिर भी ब्राह्मणों ने कभी आपत्ति नहीं की।"
उमा भारती ने इस घटना को अनावश्यक रूप से तूल देने की कोशिश को गलत ठहराया और कहा कि ऐसी घटनाएं समाज में वैमनस्य पैदा करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में कथा और भक्ति की परंपरा सभी जातियों के लिए खुली है।
विवाद में नया मोड़: कथावाचकों पर छेड़खानी के आरोप
इस मामले ने तब नया मोड़ ले लिया, जब गांव की एक महिला रेनू तिवारी ने कथावाचक मुकुट मणि यादव और उनके सहयोगी संत सिंह यादव पर छेड़खानी का आरोप लगाया। रेनू तिवारी ने बताया कि कथा के पहले दिन भोजन परोसते समय मुकुट मणि ने उनके साथ बदतमीजी की कोशिश की। इसकी शिकायत उनके पति जयप्रकाश तिवारी को की गई, जिसके बाद गांव वालों ने कथावाचकों के साथ मारपीट की।
ब्राह्मण समाज महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण दुबे ने भी कथावाचकों पर फर्जी आधार कार्ड बनाकर ब्राह्मण बनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कथावाचकों ने अपनी जाति छुपाई और धार्मिक भावनाओं को भड़काने का काम किया। इस मामले में पुलिस ने कथावाचकों के खिलाफ भी छेड़खानी, धोखाधड़ी, और धार्मिक भावनाएं आहत करने की धाराओं में FIR दर्ज की है।
राजनीतिक तूल और सामाजिक तनाव
इस घटना ने यादव और ब्राह्मण समुदायों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कथावाचकों का लखनऊ में सम्मान किया और इस घटना को जातिवादी मानसिकता का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, "जब कथा सभी सुन सकते हैं, तो कह क्यों नहीं सकते?"
वहीं, बीजेपी सांसद साक्षी महाराज और कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह ने सपा पर इस मामले को जातिवादी रंग देने का आरोप लगाया। साक्षी महाराज ने कहा कि कथावाचकों के पास दो-दो आधार कार्ड थे, जिसमें एक में उनका नाम ब्राह्मण और दूसरे में यादव दर्ज था।
शंकराचार्य और संत समिति की प्रतिक्रिया
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस घटना की निंदा की, लेकिन साथ ही कहा कि परंपरा में कथा कहने का अधिकार ब्राह्मणों को है। दूसरी ओर, अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि मारपीट गलत है, लेकिन कथावाचकों द्वारा अपनी जाति छुपाने का मामला भी जांच का विषय है। उन्होंने वाल्मीकि और कबीर जैसे गैर-ब्राह्मण कथावाचकों का उदाहरण देते हुए कहा कि कथा कहने का अधिकार सभी को है।
पुलिस और प्रशासन का एक्शन
इटावा पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया और कथावाचकों के खिलाफ भी FIR दर्ज की। मामले के राजनीतिक और सामाजिक तनाव को देखते हुए जांच को इटावा पुलिस से हटाकर झांसी पुलिस को सौंप दिया गया है। एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कथावाचक मुकुट मणि के पास एक आधार कार्ड में "अग्निहोत्री" नाम दर्ज था, जिससे उनकी जाति को लेकर भ्रम पैदा हुआ।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लिया और इटावा के एसएसपी से 10 दिन के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
इस घटना ने उत्तर प्रदेश में जातिगत तनाव को हवा दी है। यादव समाज के संगठनों ने इसे ब्राह्मणों द्वारा उत्पीड़न का मामला बताया, जबकि ब्राह्मण समाज ने कथावाचकों पर छेड़खानी और धोखाधड़ी के आरोप लगाए। विश्व यादव परिषद और अहीर रेजिमेंट ने इटावा में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए, जिसमें पुलिस पर पथराव और हाईवे जाम करने की घटनाएं हुईं।
इस बीच, धीरेंद्र शास्त्री और उमा भारती जैसे प्रमुख हस्तियों के बयानों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। दोनों ने जातिवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है, लेकिन इस घटना ने समाज में गहरे जड़ें जमाए जातिगत भेदभाव को फिर से उजागर कर दिया है।
आगे क्या?
यह मामला अब जांच के दायरे में है, और झांसी पुलिस दोनों पक्षों के आरोपों की गहन जांच कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना ने न केवल सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि जातिवाद आज भी समाज में गहरे तक पैठ बनाए हुए है। धीरेंद्र शास्त्री की प्रस्तावित पदयात्रा और उमा भारती के बयान इस दिशा में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश के रूप में देखे जा रहे हैं।
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