Ratlam News: EOW का छापा: रतलाम और धार में निगम अकाउंटेंट बेटे पर कार्रवाई, 4 करोड़ की संपत्ति का खुलासा
MP News: मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की टीम ने सोमवार की सुबह करीब 4 बजे धार और रतलाम जिलों में बड़ी छापेमारी की।
इस छापे में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक नंदकिशोर सोलंकी और उनके बेटे विकास सोलंकी के ठिकानों पर रेड की गई। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति के मामले में की गई।

नंदकिशोर सोलंकी के पास 4 करोड़ की संपत्ति
EOW के एसपी रामेश्वर सिंह यादव के अनुसार, 40 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले नंदकिशोर सोलंकी के पास लगभग 4 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति मिली है। उनकी 28 साल की सेवा में जितनी वैध आय होनी चाहिए, वह करीब 50 लाख रुपये होनी चाहिए थी, लेकिन उनके पास इससे कहीं अधिक संपत्ति पाई गई है, जो कि 28 साल की नौकरी के हिसाब से असंगत है।
सोलंकी के पास जो संपत्तियां मिली हैं, उनमें दो मकान, सात प्लॉट, सात गाड़ियां, दो बसें और एक निर्माणाधीन पेट्रोल पंप शामिल हैं। इसके अलावा, इंदौर में भी दो प्लॉट उनके नाम पर पाये गए हैं, जो कि बड़ी मात्रा में संपत्ति का संकेत देते हैं।
विकास सोलंकी और परिवार पर भी छापे
इस कार्रवाई में रतलाम में विकास सोलंकी के घर भी छापेमारी की गई। विकास सोलंकी नगर निगम में अकाउंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं और उनका घर रतलाम के ग्लोबस कॉलोनी में स्थित है। साथ ही, धार जिले के रिंगनोद गांव में उनके पिता नंदकिशोर सोलंकी के घर भी जांच की गई।
विकास सोलंकी की पत्नी प्रीति डेहरिया जिला पंचायत में अकाउंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं, जो मामले की गंभीरता को और बढ़ा देती है। वहीं, नंदकिशोर सोलंकी के पैतृक घर पर उनके मां, बड़े भाई और भाभी भी रहते हैं।
विकास सोलंकी और उनके परिवार का इतिहास: पहले भी रहे हैं विवादों में
रतलाम नगर निगम के अकाउंट ऑफिसर विकास सोलंकी और उनके परिवार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के दौरान यह सामने आया कि वे पहले भी कई विवादों में रहे हैं। सात महीने पहले उज्जैन लोकायुक्त ने विकास सोलंकी समेत 36 आरोपियों के खिलाफ एक बड़े मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में रतलाम के राजीव गांधी सिविक सेंटर के प्लॉट्स को अवैध रूप से बेचे जाने का आरोप था।
राजीव गांधी सिविक सेंटर की भूमि बेचने का मामला
सिविक सेंटर की करोड़ों की जमीन को कम दामों में बेचने का आरोप था, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान हुआ। 7 और 9 मार्च 2024 को रतलाम नगर निगम के सम्मेलन में पार्षदों ने इस मामले की शिकायत की थी, जिसमें कहा गया था कि मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) के संज्ञान में लाए बिना खाली प्लॉट्स की रजिस्ट्री कराई गई थी। इसके बाद लोकायुक्त ने 11 जून 2024 को इस मामले में तत्कालीन नगर निगम आयुक्त एपीएस गहरवाल, उपायुक्त विकास सोलंकी, उप पंजीयक प्रसन्न गुप्ता और 36 अन्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया।
लोकायुक्त की टीम ने रतलाम में आकर मामले से जुड़े दस्तावेज भी कब्जे में लिए। इसके बाद, निगम आयुक्त गहरवाल को निलंबित कर दिया गया और सोलंकी को भी उनके पद से हटा दिया गया था। हालांकि, विभागीय स्तर पर कार्रवाई के बाद उनका निलंबन समाप्त कर दिया गया और उन्हें फिर से अकाउंट ऑफिसर बना दिया गया। लोकायुक्त ने इस मामले में यह माना कि नगर निगम के अधिकारियों ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर जमीनों की रजिस्ट्री कराई थी, जिससे शासन को धोखा और आर्थिक नुकसान हुआ।












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