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Dhanteras 2022: धन के देवता कुबेर चार स्वरुपों में विराजे, लेकिन यहां उनकी पूजा नहीं कर सकते

Dhanteras 2022 धन के देवता कुबेर यहां पर एक साथ चार स्वरुपों में विराजे हैं। अलग-अलग समय की अलग-अलग कुबेर प्रतिमाएं ऐतिहासिक महत्व को बताती हैं। देवी-देवताओं की प्रतिमाएं होने के बावजूद न तो यह मंदिर है, न कोई पुजारी...दरअसल बुंदेलखंड के रानी दमयंती पुरातत्व संग्रालय में कुबेर सहित देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को संरक्षित करके रखा गया है।

कुबेर चार स्वरुपों में विराजे, लेकिन पूजा नहीं कर सकते

Deepawali और धनतेरस पर धन के देवता कुबेर की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। बुंदेलखंड में एक स्थान ऐसा भी है जहां पर कुबेर की चार मुद्राओं में अलग-अलग प्रतिमाएं मौजूद हैं, लेकिन इनकी न पूजा-पाठ होती है, न यहां कोई मंदिर है। दरअसल मप्र के दमोह जिले के रानी दमयंती संग्रहालय में पुरातत्व महत्व की पाषाण प्रतिमाओं को संरक्षित करके रखा गया है। यहां धनतेरस और दीपावली के दिन बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने पहुंचते हैं।

कुबेर चार स्वरुपों में विराजे, लेकिन पूजा नहीं कर सकते

10वीं, 12वीं सदी की कुबेर प्रतिमाएं संरक्षित
कुबेर चार स्वरुपों में विराजे, लेकिन पूजा नहीं कर सकते
MP के दमोह जिला मुख्यालय पर स्थित जिला पुरातत्व संग्रहालय में धनतेरस के दिन काफी संख्या में लोग धन के देवता कुबेर के दर्शन करने पहुंचते हैं। यहां पर 10वीं और 12वीं सदी में निर्मित चार पाषाण प्रतिमाएं मौजूद हैं। इन्हें जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक के दोनी और रिचकुड़ी इलाके से प्राप्त किया गया था। इन्हें प्रशासन ने पुरातत्व संग्रहालय में स्थापित किया गया। संग्रहालय प्रभारी डॉ. सुरेंद्र चौरसिया के अनुसा धनतेरस पर कुबेर के दर्शनों के लिए लोग यहां पर आते हैं। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संग्रहालय सभी के लिए खुला रहता है।

मां लक्ष्मी के खजाने के रक्षक, यक्षराज भी कहलाते हैं
पंडित यशोवर्धन चौबे बताते हैं कि कुबेर मूल रुप से यक्ष हैं। शास्त्रों के अनुसार सृष्टि के संचालन के उन्हें माता लक्ष्मी के खजाने का रक्षक या खजांची की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे धन के रक्षक हैं। इसलिए उनको धन का देवता माना जाता है। वराह पुराण में कुबेर जन्म को लेकर पूरी कथा मौजूद है। वास्तुशास्त्र में भी कुबेर दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। वे उत्तर दिशा के स्वामी हैं। दीपावली पर माता लक्ष्मी, माता सरस्वती के साथ कुबेर की पूजा करने का विधान बताया जाता है।

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