दिल्ली की आगामी CM आतिशी मार्लेना का MP से पुराना जुड़ाव: 2015 में खंडवा में जल सत्याग्रह की यादें

दिल्ली की आगामी मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना का मध्यप्रदेश से गहरा नाता रहा है। साल 2015 में, आतिशी ने खंडवा जिले के घोघलगांव में जल सत्याग्रह किया था, जो आज भी चर्चा में है।

इस आंदोलन के दौरान दी गई उनकी स्पीच का वीडियो हाल ही में सामने आया है, जिसमें वे तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी सरकार की कड़ी आलोचना करती नजर आ रही हैं।

Delhi upcoming CM Atishi Marlena old association with MP Memories of Water Satyagraha in Khandwa

2015 का जल सत्याग्रह

अप्रैल 2015 में, ओंकारेश्वर बांध के जल भराव से प्रभावित 11 गांवों के लोगों ने घोघलगांव में जल सत्याग्रह का आयोजन किया था। यह आंदोलन ओंकारेश्वर बांध की बढ़ती जल भराव क्षमता को लेकर था, जिसके चलते गांवों को डूबने का खतरा था। सरकार ने बांध की भराव क्षमता 191 मीटर तक बढ़ा दी थी, जबकि स्थानीय लोगों की मांग थी कि इसे कम किया जाए।

32 दिन के सत्याग्रह में सक्रिय रहीं आतिशी: खंडवा के जल सत्याग्रह का प्रमुख हिस्सा

दिल्ली की अगली मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना का मध्यप्रदेश के जल सत्याग्रह से पुराना और महत्वपूर्ण जुड़ाव है। साल 2015 में, खंडवा जिले के घोघलगांव में हुए नर्मदा बचाओ आंदोलन के जल सत्याग्रह में वे एक प्रमुख भूमिका निभा रही थीं। इस सत्याग्रह की कुल अवधि 32 दिन थी, और आतिशी इस पूरी अवधि में सक्रिय रहीं।

सत्याग्रह में आतिशी का योगदान

आम आदमी पार्टी (AAP) के तत्कालीन मध्यप्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने बताया कि आतिशी ने पहले दिन से लेकर सत्याग्रह के आखिरी दिन तक सक्रियता बनाए रखी। सत्याग्रह के अंतिम दिन, उन्होंने एक भावुक भाषण देकर आंदोलन समाप्त कराया। उनके भाषण में उन्होंने कहा कि यह संघर्ष नर्मदा घाटी और पांच गांवों की नहीं, बल्कि पूरे देश की है।

भाषण की प्रमुख बातें

घोघलगांव में आतिशी ने अपने भाषण की शुरुआत "इंकलाब जिंदाबाद" और "भारत माता की जय" के नारों से की। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संघर्ष दुनियाभर में एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। लोगों ने पानी में खड़े होकर संघर्ष किया और पूरा गांव उनके साथ था। आतिशी ने कहा कि आज पूरे देश में किसान इसी संघर्ष में जुटे हैं, और यह स्थिति केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है; दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में भी किसान इसी तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

आतिशी ने यह भी कहा कि यह लड़ाई सिर्फ नर्मदा घाटी और पांच गांवों की नहीं है, बल्कि पूरे देश के किसानों की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की कीमत नहीं समझती और उन्हें बेघर कर देती है। आत्महत्याएं और फसलों के खराब होने पर मिलने वाला मामूली मुआवजा किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं है।

आंदोलन की परिस्थितियां

सत्याग्रह के दौरान, घोघलगांव के लोगों ने पानी में खड़े होकर सरकार के खिलाफ अपने संघर्ष की शक्ति को दर्शाया। जब लोग सत्याग्रह में बैठे थे, उस दिन ही सरकार ने ओंकारेश्वर बांध का पानी 189 मीटर से बढ़ाकर 191 मीटर कर दिया था। इस दौरान पुलिस और जेसीबी मशीनें भी तैनात की गई थीं, लेकिन गांव की महिलाएं डटकर खड़ी हो गईं, जिससे सरकार को डर लगने लगा।

इस 32 दिन के आंदोलन ने न केवल आतिशी की राजनीतिक सक्रियता को उजागर किया बल्कि यह भी दिखाया कि उन्होंने किसान और जल संकट के मुद्दों पर गंभीरता से काम किया है। उनके भाषण और सक्रियता ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय ध्यान दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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