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MP News: गिट्टी-कोपरा की किल्लत का संकट, स्टोन क्रशर संचालकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

MP News: मध्य प्रदेश में निर्माण कार्यों के लिए जरूरी गिट्टी और कोपरा की सप्लाई मंगलवार से ठप हो सकती है। प्रदेशभर के स्टोन क्रशर संचालक 10 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। यह कदम उन्होंने सरकार की नीतियों, बढ़ती रॉयल्टी, स्टाम्प ड्यूटी, सीमांकन प्रक्रिया और पर्यावरणीय स्वीकृति की जटिलताओं के विरोध में उठाया है।

स्टोन क्रशर संचालकों का दावा है कि वे वर्षों से अपनी मांगों को लेकर सरकार से संवाद की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकलने पर अब उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है। हड़ताल की शुरुआत से पहले भोपाल के एक निजी होटल में सोमवार को प्रदेशभर के संचालकों की एक अहम बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से हड़ताल का निर्णय लिया गया।

Crisis of shortage of ballast and copra indefinite strike of Bhopal-Indore stone crusher operators

क्या हैं प्रमुख मांगें?

  • मध्यप्रदेश स्टोन क्रशर ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्रपाल सिंह चावला के अनुसार, कारोबारी घाटे में जा रहे हैं और नियमों की जटिलता ने उन्हें परेशान कर रखा है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
  • रॉयल्टी में अत्यधिक वृद्धि: डीजल की बढ़ती कीमतों और सरकार द्वारा रॉयल्टी दरों में बार-बार बढ़ोतरी से मुरम व गिट्टी की लागत बहुत ज्यादा हो गई है।
  • स्टाम्प ड्यूटी की ऊंची दरें: खनन पट्टों और संपत्ति की रजिस्ट्री पर भारी स्टाम्प ड्यूटी वसूली जा रही है, जो व्यापार पर भार डाल रही है।
  • सीमांकन में देरी: खनन क्षेत्रों का सीमांकन महीनों लंबा खिंचता है, जिससे लाइसेंस और संचालन प्रभावित होते हैं।
  • पर्यावरण स्वीकृति की जटिलता: MPSEIAA (मध्यप्रदेश राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण) द्वारा पर्यावरण स्वीकृति में देरी से कई प्रोजेक्ट रुके हुए हैं।
  • अवैध खनन पर कार्रवाई न होना: वैध कारोबारियों का कहना है कि सरकार अवैध खनन रोकने में असफल रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

एसोसिएशन के महासचिव आलोक गोस्वामी ने चेतावनी दी, "अगर जल्द कोई ठोस हल नहीं निकाला गया तो यह हड़ताल लंबी चलेगी और राज्य की निर्माण गतिविधियों को पूरी तरह पंगु बना देगी।"

इंदौर और भोपाल में पहले ही ठप हैं खदानें

प्रदेश के कई जिलों - जैसे इंदौर, भोपाल, धार, देवास, झाबुआ, अलीराजपुर, खंडवा, बुरहानपुर, आगर-मालवा और शाजापुर - में खदानों का संचालन पहले ही बंद किया जा चुका है। इंदौर में तो हड़ताल को एक सप्ताह हो चुका है, जिसके चलते शहर में कई निर्माण प्रोजेक्ट ठप हो चुके हैं।

भोपाल में स्थिति और गंभीर मानी जा रही है। यहां चल रहे मेट्रो रेल प्रोजेक्ट और स्मार्ट सिटी मिशन की परियोजनाएं पहले ही समयसीमा से पीछे चल रही थीं - अब गिट्टी और कोपरा की किल्लत से ये प्रोजेक्ट और प्रभावित हो सकते हैं।

निर्माण उद्योग पर संकट के बादल

राज्य में स्टोन क्रशर उद्योग को निर्माण गतिविधियों की रीढ़ माना जाता है। इसके ठप होने से न केवल सड़कों और इमारतों का निर्माण रुकेगा, बल्कि मजदूरी और सप्लाई चेन से जुड़े लाखों लोगों की रोजी-रोटी भी प्रभावित होगी। ठेकेदार अजय मेहता ने बताया, "अब तक गिट्टी की कीमत 25-30% बढ़ चुकी है। अगर यह हड़ताल लंबी चली, तो सरकारी प्रोजेक्ट्स की लागत में भारी इजाफा होगा।"

सरकार की प्रतिक्रिया और राजनीतिक दबाव

अब तक सरकार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, कारोबारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शीघ्र हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं। याद दिला दें कि 2012 में इंदौर डिवीजन की एक बड़ी हड़ताल तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हस्तक्षेप से सुलझी थी।

इधर, कांग्रेस ने सरकार को घेरने में देर नहीं लगाई। पार्टी नेता जीतू पटवारी ने कहा, "राज्य सरकार की असंवेदनशील नीतियों ने उद्योग को संकट में डाला है। हड़ताल से निर्माण गतिविधियां रुकेंगी और आम जनता को सीधे परेशानी होगी।"

क्या हो सकते हैं अगले कदम?

  • क्या सरकार बातचीत के लिए तैयार होगी?
  • क्या MPSEIAA पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया को सरल बनाएगा?
  • अगर हड़ताल लंबी खिंचती है, तो निर्माण उद्योग को कितना नुकसान होगा?
  • राज्य सरकार को इस हड़ताल से प्रतिदिन कितना राजस्व नुकसान हो रहा है?
  • यह सब सवाल अब सरकार के सामने चुनौती बनकर खड़े हैं।

रिपोर्ट: [LN मालवीय ]

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