'क्या एलिजाबेथ हिंदुओं के सबसे बड़े धर्मगुरु से बढ़कर हैं?', राष्ट्रीय शोक पर शंकराचार्य ने उठाए सवाल
जबलपुर, 14 सितंबर: ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ के निधन पर घोषित हुए एक दिन के राष्ट्रीय शोक पर सवाल उठने लगे हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आपत्ति जताते हुए सरकार से पूछा है कि क्या एलिजाबेथ, भारत के हिंदुओं के सबसे बड़े धर्मगुरु से बढ़कर है? स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहते हुए स्वामी स्वरूपानंद सरस्वतीजी के निधन पर शोक घोषित नहीं किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी मप्र में राजकीय शोक घोषित न होने पर आपत्ति जताई थी।

शोक पर शंकराचार्य के सवाल
ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ के निधन पर भारत में एक दिन राष्ट्रीय शोक की घोषणा पर विवाद गहराने लगा हैं। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के समाधि कार्यक्रम के बाद नवनियुक्त शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ी आपत्ति जताई हैं। उन्होंने कहा है कि जिन देशों ने हमें सालों साल गुलाम बनाकर रखा, उस देश को इतना सम्मान देना ये कैसी परंपरा है? आपको बता दें कि एलिजाबेथ के निधन के बाद शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज का निधन हुआ था।

राष्ट्रीय ध्वज झुकाना उचित नहीं
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोले कि हमारे देश के विद्वान संत सन्यासी जिन्होंने सनातन धर्म की रक्षा समर्पित रहे, उनके दिवंगत होने पर उन्हें सम्मान क्यों नहीं मिलता। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जिस महारानी के इशारे पर भारत आए अंग्रेजों ने 7 लाख भारतीयों की हत्या की, उनके निधन पर राष्ट्रध्वज को झुकाना देशवासियों को ठीक नहीं लग रहा।

स्वरूपानंद के निधन पर राष्ट्रीय शोक क्यों नहीं ?
दरअसल शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन पर उनका भक्त मंडल राष्ट्रीय शोक की घोषणा चाहता था। स्वरूपानंदजी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी रहे और आजादी की लड़ाई के वक्त उनका योगदान था। उसके बाद देश में हिन्दू धर्म के उत्थान प्रचार प्रसार के लिए समर्पित होते हुए सबसे बड़े गुरु बने। जिन्हें उनके अनुयायी भगवान तुल्य पूजते थे। अविमुक्तेश्वरानंद बोले कि ऐसे व्यक्त्तिव के प्रति सरकार का भाव और सोच समझ से परे हैं।
कमलनाथ ने भी जताई थी आपत्ति
मप्र सरकार ने स्वामी स्वरूपानंद की अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ करने का निर्णय तो लिया लेकिन राजकीय शोक की घोषणा नहीं की। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आपत्ति जताई थी। समाधि कार्यक्रम के वक्त सीएम शिवराज, कमलनाथ समेत मंत्री और कई नेता पहुंचे थे। उसके बाद कमलनाथ ने ट्वीट किया था, जिसमें मुख्यमंत्री से आग्रह किया था कि राजकीय शोक की घोषणा की जाए। लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। न तो राजकीय शोक और न ही राष्ट्रीय शोक की घोषणा हुई।
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क्या हम फिर गुलाम हो जाएंगे ?
शंकराचार्य बोले कि भारत को 90 साल की लीज पर आजादी के दस्तावेजों की चर्चा हो रही है। सुना है कि इसके प्रमाण गूगल पर मौजूद हैं। तो क्या आजादी के 75 साल पूरे होने के बाद अब सिर्फ 15 साल की आजादी ही बची हैं? इस सवाल पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और न्यायपालिका से जबाब मांगा हैं। उनका कहना है कि यह हमारे देश की अस्मिता का सवाल है।
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