MP News: "सीएम जनसेवा मित्र योजना या युवाओं से विश्वासघात? उमंग सिंघार ने खोली भाजपा की पोल"
MP Politics News: मध्य प्रदेश में सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। इस बार मुद्दा है "मुख्यमंत्री जनसेवा मित्र योजना", जिसे लेकर विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक ट्वीट के जरिए सिंघार ने इस योजना को "सरकार का बड़ा धोखा" करार दिया और युवाओं के साथ हुए कथित अन्याय को उजागर किया। उनका यह बयान न सिर्फ सत्तारूढ़ भाजपा के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।

ट्वीट से शुरू हुई बहस
शनिवार रात 21:55 बजे उमंग सिंघार ने एक्स पर लिखा, "मुख्यमंत्री जनसेवा मित्र योजना भी सरकार का बड़ा धोखा! भाजपा सरकार ने अपनी योजनाओं को हर गांव और हर घर तक पहुंचाने के लिए पूर्व CM शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री जनसेवा मित्र योजना शुरू की थी। सरकार की कोशिश थी कि 'जन सेवा मित्र' सरकारी विभागों में काम करके विकास योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाएं। जिन शिक्षित युवाओं को सेवा में रखा गया, उन्हें 8000 महीना दिए जाने की घोषणा की गई। लेकिन, ऐसा कुछ नहीं हुआ और सरकार ने हाथ खड़े कर दिए! लेकिन, मुझे इन युवकों का दर्द पता है, और मैं इनका हक दिलाने के लिए सबकुछ करूंगा। कांग्रेस युवाओं के साथ है!" इस ट्वीट ने न केवल भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए, बल्कि युवाओं के बीच सरकार के प्रति नाराजगी को भी हवा दी।
योजना की शुरुआत और वादे
मुख्यमंत्री जनसेवा मित्र योजना को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़े जोश के साथ शुरू किया था। इसका मकसद था कि प्रदेश के हर विकासखंड में शिक्षित युवाओं को "जनसेवा मित्र" के रूप में नियुक्त किया जाए, जो सरकारी योजनाओं को गाँव-गाँव तक पहुँचाने में मदद करें। योजना के तहत इन युवाओं को सरकारी विभागों में अस्थायी तौर पर काम करने का मौका दिया गया था, और उन्हें प्रतिमाह 8,000 रुपये देने का वादा किया गया था। छतरपुर के एक कार्यकर्ता शैलेंद्र सिंह ने बताया, "शिवराज जी ने 313 विकासखंडों में 9,300 जनसेवा मित्रों को नियुक्त किया था। यह योजना युवाओं के लिए उम्मीद की किरण थी।" लेकिन उमंग सिंघार के मुताबिक, यह उम्मीद अब धोखे में बदल गई है।
वादों से मुकरने का आरोप
सिंघार का दावा है कि योजना शुरू तो हुई, लेकिन इसे लागू करने में सरकार ने पूरी तरह नाकामी दिखाई। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं को नौकरी दी गई थी, उन्हें न तो नियमित वेतन मिला और न ही उनके भविष्य के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया। दिसंबर 2023 में शिवराज सिंह चौहान के बाद डॉ मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस योजना पर और ग्रहण लग गया।
सूत्रों के मुताबिक, नई सरकार ने इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया, जिसके चलते हजारों युवा बेरोजगार हो गए। उमंग सिंघार ने अपने ट्वीट में इस बात का जिक्र करते हुए कहा, "सरकार ने हाथ खड़े कर दिए।" उनके इस बयान ने सत्तारूढ़ दल पर दबाव बढ़ा दिया है।
युवाओं का गुस्सा सड़कों पर
योजना के बंद होने के बाद जनसेवा मित्रों ने कई बार प्रदर्शन भी किए। भोपाल और अन्य जिलों में इन युवाओं ने हड़ताल कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "हमें 8,000 रुपये महीने का वादा किया गया था, लेकिन कई महीनों तक पैसे नहीं मिले। नई सरकार ने हमारी सेवाएँ खत्म कर दीं, बिना कोई वैकल्पिक रोजगार दिए।" इन युवाओं का कहना है कि नेतृत्व परिवर्तन के बाद उनकी आवाज दबा दी गई। उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा, "मुझे इन युवकों का दर्द पता है। वे अपने हक के लिए लड़ रहे हैं, और कांग्रेस उनके साथ खड़ी है।"
कांग्रेस का वादा: "हक दिलाएंगे"
उमंग सिंघार ने अपने ट्वीट में यह भी वादा किया कि वह इन युवाओं का हक दिलाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे। कांग्रेस के इस रुख ने साफ कर दिया है कि वे इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक ले जाने को तैयार हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सिंघार जल्द ही इस मामले को विधानसभा में उठा सकते हैं और सरकार से जवाब माँग सकते हैं। एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने कहा, "उमंग जी युवाओं की आवाज बनकर उभरे हैं। यह योजना भाजपा की नाकामी का सबूत है, और हम इसे जनता के सामने लाएंगे।"
भाजपा का जवाब: मौन या सफाई?
अब तक भाजपा की ओर से इस ट्वीट पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। हालाँकि, पार्टी के कुछ नेताओं ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि योजना को बंद करने का फैसला आर्थिक संसाधनों की कमी और प्राथमिकताओं में बदलाव के चलते लिया गया। एक भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "जनसेवा मित्र योजना एक अस्थायी व्यवस्था थी। नई सरकार उद्योग, कृषि और बड़े प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रही है।" लेकिन यह सफाई जनसेवा मित्रों और विपक्ष को शांत करने के लिए काफी नहीं लगती।
सोशल मीडिया पर तीखी बहस
उमंग सिंघार के ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ यूजर्स ने उनके समर्थन में लिखा, "भाजपा ने युवाओं के साथ धोखा किया है। उमंग जी सही कह रहे हैं।" वहीं, कुछ ने सरकार का बचाव करते हुए कहा, "हर योजना हमेशा नहीं चल सकती। कांग्रेस सिर्फ सियासत कर रही है।" इस बहस ने मामले को और गरमा दिया है, और लोग अब सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।
क्या है असली सवाल?
इस पूरे विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला, क्या जनसेवा मित्र योजना को बंद करने का फैसला सही था? दूसरा, अगर योजना बंद करनी थी, तो इन युवाओं के लिए वैकल्पिक रोजगार क्यों नहीं ढूंढा गया? और तीसरा, क्या यह मुद्दा आने वाले दिनों में भाजपा के लिए सिरदर्द बनेगा? उमंग सिंघार ने इसे "धोखा" बताकर सियासी पारा चढ़ा दिया है, और अब गेंद सरकार के पाले में है।
आगे की राह
फिलहाल, यह साफ है कि उमंग सिंघार इस मुद्दे को छोड़ने वाले नहीं हैं। कांग्रेस इसे युवाओं के हक की लड़ाई बनाकर जनता के बीच ले जाना चाहती है। दूसरी ओर, भाजपा के सामने चुनौती है कि वह इस आरोप का जवाब कैसे देती है। क्या सरकार इस योजना को फिर से शुरू करेगी, या युवाओं के लिए कोई नया रास्ता निकालेगी? यह देखना बाकी है। लेकिन एक बात तय है-मुख्यमंत्री जनसेवा मित्र योजना अब सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की सियासत का नया दांव बन गई है।












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