Hoshangabad News: मुंह की लाली के लिए मशहूर बंगला पान पड़ा पीला, कड़ाके की ठंड से सूखकर नीचे गिर रहे पत्ते
Hoshangabad News: होशंगाबाद जिले के सोहागपुर की पहचान बंगला पान की खेती पर शीत लहर का असर दिखाई देने लगा हैं। शीत लहर के कारण पान अपनी बेल से सूखकर नीचे गिरने लगे हैं। पान की फसल में वैसे तो हर साल थोड़ा बहुत नुकसान होता है, लेकिन इस साल ज्यादा हो रहा है। वहीं किसान सर्वे कर मुआवजा दिलाने की मांग कर रहे हैं।
पान की खेती करने वाले तेजराम चौरसिया ने अपने बरेजे मे ख़राब होती पान की फसल को वन इंडिया हिंदी को दिखाते हुए बताया कि अब ये बीज की फसल खड़ी हैं अगर यह ख़राब हो गई तो हम कहीं के नहीं रहेंगे, पूरा साल ख़राब हो जाएगा।

शासन की और से हमारी पान की फसल का सर्वे करने कोई नहीं आता हैं। न ही किसी योजना का लाभ मिलता हैं। जबकि किसानो को शासन की और से अनेकों योजनाओं के माध्यम से लाभ मिलता हैं।
पहले की अपेक्षा अब कम ही बचे बरेजे
सोहागपुर मे एक समय था ज़ब रेल्वे पुल के आसपास पान के बरेजे ही बरेजे हुआ करते थे। लेकिन अब हालत ऐसे हो गए हैं, कि गिनती के ही पान बरेजे बचे हैं। पान की खेती करने वाले मिथलेश चौरसिया, महेश चौरसिया, सुखराम, सुनील, राजू, कैलाश, मनोज, टिक्कू, गुड्डा, विनीत चौरसिया ने बताया की उनके बरेजो मे भी शीत लहर का असर काफ़ी हैं।
चौरसिया समाज के इन पान व्यवसाइयो ने बताया कि पान बरेजे मे आने वाले आकस्मिक रोगों और मटेरियल के ना मिलने के कारण पान की खेती मे निरंतर कमी आती जा रहीं हैं। पान की खेती मे आने वाली कमी की और शासन का भी कोई ध्यान नहीं हैं।
सोहागपुर मे होता हैं सिर्फ बंगला पान
वैसे तो पान की कई किस्मे हैं मगर बंगला पान की खेती सोहागपुर, निवारी, बारहवाड़ा में ही हो रहीं है। जबकि एक समय था जब पिपरिया, खेरआ, ग़डरवाड़ा सहित अन्य शहरों में भी पान की खेती हुआ करती थीं। बंगला पान की जो किस्म सोहागपुर में होती हैं वह अलग ही हैं जिसे खाने वाले बहुत पसंद करते हैं।












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