चित्रकूट मर्डर केस: 20 लाख की फिरौती लेने के बाद एक 'हां' बन गई दो मासूम भाइयों की मौत की वजह

Satna News, सतना। मध्यप्रदेश के चित्रकूट से किडनैप किए गए जुड़वां भाइयों को बीस लाख रुपए की फिरौती मिलने के बाद भी आखिर क्यों मार दिया गया?। पांच वर्षीय दोनों भाइयों के नदी से शव बरामद होने के बाद से हर किसी के मन में यही सवाल था, जिसका जवाब आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में दिया है।

रीवा जोन के आईजी चंचल शेखर ने प्रेस वार्ता में बताया कि बीस लाख रुपए की फिरौती मिलने के बाद आरोपी दोनों बच्चों को सकुशल छोड़ना चाहते थे, मगर इससे पहले उन्होंने उनसे सवाल कि क्या वे पुलिस के सामने उन सभी को पहचान पाएंगे?।बच्चों ने मासूमियत से हां में जवाब दिया।

इस पर आरोपियों ने उन्हें जिंदा छोड़ने की बजाय मारने का फैसला लिया। दोनों के हाथ जंजीरों से बांधे और फिर पीठ पर पत्थर बांधा। इसके बाद दोनों को यूपी के बांदा जिले में नदी में डाल दिया, जहां से शनिवार रात को पुलिस ने दोनो के शव बरामद कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पहले चित्रकूट में रखा फिर यूपी ले गए

पहले चित्रकूट में रखा फिर यूपी ले गए

मामले में गिरफ्तार आरोपी चित्रकूट निवासी पद्‌म शुक्ला, लकी सिंह तोमर, रोहित द्विवेदी, राजू द्विवेदी, रामकेश यादव, पिंटू उर्फ पिंटा यादव ने पुलिस पूछताछ में बताया कि 12 फरवरी को प्रियांश व श्रेयांश का उनकी स्कूल से अपहरण करने के बाद वे उन्हें चित्रकूट में इंजीनियरिंग स्टूडेंट लकी सिंह के किराए के रूम पर लेकर गए। यहां पर दो दिन तक रखा। कमरा बाहर से बंद रखते थे ताकि किसी को शक नहीं हो। इसके बाद बच्चों को यहां से यूपी के बांदा में अटर्रा में एक अन्य किराए के मकान में रखा।

वीडियो गेम खिलाकर बहलाते थे मन

वीडियो गेम खिलाकर बहलाते थे मन

अपहरण के बाद करीब 11 दिन तक बच्चे किडनैपर्स के पास रहे। एक आरोपी रामकेश यादव तो बच्चों का ट्यूशन टीचर ही था। बच्चों का मन बहलाने के लिए किडनैपर्स उन्हें वीडियो गेम खिलाते थे। बच्चों का शव मिला तब वे उन्हीं कपड़ों में थे, जिन्हें पहनकर वे 12 फरवरी को स्कूल गए थे।

ऐसे आए पकड़े में

ऐसे आए पकड़े में

चित्रकूट से दिनदहाड़े बच्चों का अपहरण करके ले जाने वाले बदमाश बेहद शातिर हैं। फिरौती मांगने के लिए खुद का फोन इस्तेमाल नहीं करते थे। राह चलते लोगों से जरूरी फोन की बोलकर मोबाइल लेते और उसी फोन करते थे। एक बार किसी राहगीर से फोन मांगने के दौरान उसे शक हो गया तो उसने आरोपियों की मोटरसाइकिल की तस्वीर ले ली थी, जो पुलिस के हाथ लगी। पुलिस की पड़ताल में मोटरसाइकिल यूपी के रोहित द्विवेदी की निकली। पुलिस उस तक पहुंची तो कड़ी से कड़ी जुड़ गई और आरोपियों को पकड़ लिया गया।

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