यह आकाशवाणी केंद्र छतरपुर है...गूंजती रहेगी आवाज, सरकार का आश्वासन, अब बंद नहीं होगा केंद्र
सागर, 21 जून। यह आकाशवाणी केंद्र छतरपुर है... बुंदेलखंड की विरासत छतरपुर आकाशवाणी की यह मधुर आवाज लगातार गूंजती रहेगी, रेडियो पर आकाशवाणी से प्रसारित स्वर लहरियां आगे भी गूंजती रहेंगी। आगामी चार साल बाद यह केंद्र अपनी स्थापना की गोल्डन जुबली पूरे उत्साह के साथ मनाएगा। केंद्र सरकार ने छतरपुर आकाशवाणी केंद्र को बंद करने का निर्णय बदल दिया है।

बुंदेलखंड के जिलों सहित प्रदेश के 13 जिलों के श्रोताओं के जेहन और मन मस्तिष्क में आकाशवाणी केंद्र छतरपुर की आवाज दशकों से समाहित है। बुंदेलखंड की विरासत माना जाने वाला छतरपुर का आकाशवाणी केंद्र विधिवत संचालित होगा। लोक कलाकारों सहित यहां काम करने वाले अस्थाई लोग अब बेरोजगार नहीं होंगे। पूर्व में केंद्र सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय ने इसे बंद करने का निर्णय लिया था, जिसे दमोह सांसद व केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री प्रहलाद पटेल के प्रयासों और पत्राचार के बाद बदल दिया गया है। बता दें कि जैसे ही केंद्र सरकार द्वारा इसे बंद करने का फैसला सामने आया था, इलाके में निराशा व्याप्त हो गई थी, इसको लेकर लोक कलाकारों और आम जनता ने काफी विरोध किया था।
मंत्री ने केंद्र के महत्व और भावनाओं से अवगत कराया
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने बुंदेलखंड के लोगों की भावनाओं को देखते हुए केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री डॉ. एल मुरगन को पत्र लिखकर आकाशवाणी केंद्र को पहले की तरह संचालित करने की मांग रखी थी। मंत्री पटेल ने इलाके के लोगों की भावनाओं और आकाशवाणी केंद्र के ऐतिहासिक महत्व को बताया था, जिसके बाद केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री ने इसे बंद करने का निर्णय बदलते हुए इसे यथावत पूर्वत जारी रखने का आश्वासन मंत्री पटेल को दिया है। जल्द ही इस संबंध में आदेश आ जाएगा।
46 साल पुराना केंद्र है, चार साल बाद गोल्डन जुबली
छतरपुर आकाशवाणी केंद्र स्थापना के 46 साल पूरे करने जा रहा है। आगामी चार साल बाद 50 साल का हो जाएगा और गोल्डन जुबली मनाएगा। जानकारी अनुसार इसकी स्थापना 7 अगस्त 1976 को हुई थी। तत्कालीन सांसद विद्यावती चतुर्वेदी के प्रयासों से इसकी स्थापना हुई थी। केंद्र का उद्देश्य बुंदेली संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाना है। संस्थान ने इसको सफलता पूर्वक निभाया और बुंदेलखंड की विधाओं, नृत्य, गायकी को मंच प्रदान करते हुए पूरे देश में पहचान और सम्मान दिलाया।












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