Bhopal News: लाउडस्पीकर और डीजे पर प्रतिबंध पर बड़ी जानकारी, भोपाल कलेक्टर ने जारी किए आदेश
MP Bhopal News: शहर में शांति बनाए रखने और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। यह आदेश गुरुवार से लागू हो गया है और इसमें रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक जिले भर में किसी भी प्रकार के साउंड सिस्टम के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है।
इसके अलावा, डीजे यूनिट्स पर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं, जिसके तहत अब केवल एक साउंड सिस्टम की अनुमति होगी।

कलेक्टर सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। इसके अनुसार, जिले के सभी धार्मिक स्थल, औद्योगिक क्षेत्रों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और आवासीय क्षेत्रों में लाउडस्पीकर और डीजे जैसे ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग अनियंत्रित और नियमों के खिलाफ करने पर रोक लगाई गई है।
आदेश के मुख्य बिंदु
ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग: रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक किसी भी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग, चाहे वह लाउडस्पीकर हो या डीजे, पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। यह निर्णय सार्वजनिक आपात स्थिति को छोड़कर लागू होगा।
डिजे और साउंड सिस्टम: डीजे संचालकों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि अब डीजे यूनिट पर केवल एक साउंड सिस्टम ही लगाया जा सकेगा। इस साउंड सिस्टम की ध्वनि को निर्धारित मापदंडों के अनुसार नियंत्रित रखा जाएगा, ताकि इससे होने वाला शोर मानकों के भीतर हो।
लाइसेंस अनिवार्यता
सभी डीजे संचालकों, होटल, रेस्टोरेंट और बार को अपने डीजे यूनिट के संचालन के लिए नियमानुसार लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह कदम शहर में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने और सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि सभी स्थानों पर संगीत और शोर का स्तर सुरक्षित और नियंत्रित रहे।
न्यायिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से प्रभाव
कलेक्टर सिंह के आदेश को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जारी किया गया है, जो सार्वजनिक सुरक्षा और शांति को बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने का अधिकार देता है। इस आदेश के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बिना नियमन के ध्वनि यंत्रों का इस्तेमाल न हो, जो नागरिकों के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं।
लोगों और व्यापारियों की प्रतिक्रिया
इस आदेश पर शहर के लोगों और व्यापारियों के मिश्रित विचार हैं। जहां एक ओर कुछ लोग इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि इससे शांति और शुद्ध वायु की स्थिति बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर कुछ डीजे संचालक और व्यवसायी इसे अपने व्यवसाय पर असर डालने वाला मान रहे हैं।
भोपाल में बढ़ते शोर और ध्वनि प्रदूषण के मामलों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश जरूरी माना जा रहा है, लेकिन यह भी सच है कि इस कदम से कुछ क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। खासकर उन स्थानों पर जहां शादी समारोह, पार्टियां और अन्य कार्यक्रमों में डीजे और लाउडस्पीकर का इस्तेमाल आम है।
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के द्वारा जारी किए गए आदेश के बाद, अब ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग करने के लिए और भी सख्त शर्तें जोड़ी गई हैं। गुरुवार से लागू किए गए इन आदेशों के तहत, अब सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक किसी भी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्र जैसे लाउडस्पीकर या डीजे का उपयोग केवल एडीएम (उप ज़िलाधिकारी) और पुलिस उपायुक्त की अनुमति से किया जा सकेगा।
नई अनुमति की प्रक्रिया और शर्तें:
एडीएम और पुलिस उपायुक्त की अनुमति: ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग करने के लिए आयोजकों को पहले एडीएम और पुलिस उपायुक्त से अनुमति लेनी होगी। इस अनुमति को केवल 2 घंटे तक की अवधि के लिए ही जारी किया जाएगा।
कार्यक्रम स्थल पर ही अनुमति: अनुमति केवल उसी स्थान पर दी जाएगी जहां कार्यक्रम हो रहा है। इसका मतलब है कि आयोजक या व्यवसायी जो ध्वनि यंत्र का उपयोग करना चाहते हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि यंत्र का उपयोग कहां और क्यों किया जाएगा।
भारत सरकार के नियमों का पालन: अनुमति में यह शर्त भी जोड़ी जाएगी कि ध्वनि विस्तारक यंत्र के उपयोग के दौरान भारत सरकार द्वारा निर्धारित सभी नियमों का पालन किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ध्वनि प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित रखा जाए और किसी प्रकार का अव्यवस्था न हो।
विरुद्ध कार्यवाही
यदि कोई भी व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 की धारा 15 और 16 के तहत दंडित किया जाएगा। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ शास्ति (जुर्माना) और जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। यह सख्त कदम प्रशासन के द्वारा लिया जा रहा है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।
कानूनी कार्रवाई के प्रभाव
कलेक्टर और प्रशासन की यह सख्त कार्यवाही यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि शहर में शोर-शराबा और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। यह कदम खासकर शादी-समारोहों, धार्मिक आयोजनों और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में लाउडस्पीकर और डीजे के अत्यधिक उपयोग को लेकर उठाया गया है, जो आमतौर पर रात के समय के दौरान नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं।
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