रहस्यमयी भीमकुंड के नीले पानी का रहस्य सुलझाने में जर्मनी के गोताखोर भी फेल, वापस लौटे
बुंदेलखंड के भीमकुंड में नीले पानी का रहस्य और इसकी अथाह गहराई को नापने के लिए जर्मनी के गोताखोर भी फेल हो गए। गोताखोरों ने काफी प्रयास किए, पानी में काफी गहराई तक गए, लेकिन कुंड का तल नहीं मिल सका।


मप्र के छतरपुर जिले में अद्भुत और रहस्मयी प्राकृतिक स्थान व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भीमकुण्ड में जर्मनी एक विशेषज्ञों की टीम आई थी। जिला प्रशासन के साथ यहां पहुंचकर टीम ने आधुनिक उपकरणों के साथ गोताखोंरों को कुंड के पानी में उतारा था। कई-कई घंटों तक गोताखोर पानी में बार-बार उतरे और पानी की गहराई, कुंड की तलहटी को नापने का प्रयास किया, लेकिन हर बार की तरह यह टीम भी पानी में जितने नीचे उतरी गहराई और बढ़ती चली गई। थक हारकर गोताखोरों ने भी तलहटी तक पहुंचने में हाथ खड़े कर दिए। जर्मनी की टीम पहले आई सभी टीमों की तरह खाली हाथ ही वापस लौटी है।
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नीले पानी और समुद्री जीव जंतु की मौजूदगी बनी है रहस्य
भीमकुंड में केवल इसकी गहराई ही रहस्य नहीं है, बल्कि इसका नीला और आसमानी पानी भी बड़ा रहस्य बना हुआ है। पानी के अंदर जब गोताखोर पानी के अंदर उतरते हैं तो एक लेवल के बाद पानी के अंदर का माहौल भी बदल जाता है। कारण यहां समुद्री जीव-जंतुओं की मौजूदगी मिली है। कुंड में जितनी गहराई में गोताखोर पहुंचते हैं, इसका आकार बढ़ता जाता है और पानी के नीचे पानी का प्रेशर काफी बढ़ जाता है, यहां ऐसा प्रतीत होता है जैसे एक तरफ से नदी बहकर आ रही हो और दूसरी तरफ नदी का पानी तेजी से बाहर की तरफ जा रहा हो। एक स्तर के बाद गोताखोरों की सांसे उखड़ने लगती हैं और उन्हें वापस लौटना पड़ता है।












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