SC फैसले के बाद MP में हाईवोल्टेज सियासत, OBC आरक्षण को लेकर कांग्रेस ने रचा था षड्यंत्र !
भोपाल 18 मई: मप्र में OBC आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद हाईवोल्टेज सियासत शुरू हो गई । फैसले के बाद अपनी पीठ थपथपाने में जुटी भाजपा पर कांग्रेस ने जहाँ आरोपों की झड़ी लगा दी है, तो वही इस आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस को षड्यंत्रकारी करार दिया जा रहा है । अपनी ढपली अपना राग की तर्ज पर चुनाव तारीखों के ऐलान के पहले दोनों ही दल अपने सिक्के उछाल रहे है । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जिन्होंने पाप किया वह पराजित हुए है, उधर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पलटवार किया कि शिवराज सरकार ओबीसी विरोधी है, जो झुकने पर मजबूर हुई ।

एमपी में भले ही अभी स्थानीय नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव ऐलान का डंका बजने में अभी कुछ दिन बाकी है, लेकिन बुधवार को OBC रिजर्वेशन को लेकर सुप्रीम अदालत का जैसे ही फैसले आया मानों अघोषित रूप से चुनाव का ऐलान हो गया हो । फैसले के बाद मप्र में जिस तरह बीजेपी-कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के हाईकमान नेताओं ने एक दूसरे पर आरोपों की बौछार की है, उससे तो यही लगता है । एक ओर जहाँ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी सेना, तो दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की फ़ौज । एमपी में पिछले 19 सालों में मुख्यमंत्रियों का इतिहास बताने के लिए काफी है कि उमा भारती, बाबूलाल गौर और वर्तमान में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तीनों OBC कोटे से ही रहे । लिहाजा ओबीसी के बड़े वोटिंग बेल्ट वाले इस स्टेट के उस तबके को दोनों ही दल यह प्रूफ करने में भरसक कोशिश कर रहे है कि उनके हिमायती वही है।
जिन्होंने पाप किया वह पराजित हुए- शिवराज सिंह चौहान
सुप्रीम कोर्ट के बड़े निर्णय के बाद यह साफ़ हो गया है कि प्रदेश में जल्द से जल्द स्थानीय निकाय चुनाव होंगे । फैसले के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है । कांग्रेस ने ओबीसी आरक्षण के साथ चुनाव न करवाने का पाप किया था । जिन्होंने पाप किया वह पराजित हुए ।
OBC वर्ग का हक़ छीनने वाली थी शिवराज सरकार - कमलनाथ
पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भी अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए भाजपा सरकार पर करारा हमला बोला । उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग का हक़ छीनने वाली शिवराज सरकार थी, लेकिन अदालत से इस वर्ग को न्याय मिला है । 27 फीसदी आरक्षण का हक़ हर हाल में दिलाने की बात भी कही।

एमपी में यहाँ है सबसे ज्यादा OBC मतदाता
आजादी के बाद जब से मध्यप्रदेश का गठन हुआ तब से अब तक का इस प्रदेश की सियासत में OBC वर्ग का बड़ा रोल रहा है। यह तबका सूबे के राजनैतिक परिद्रश्य में गेम चेंजर के रूप में भी अपनी भूमिका अदा करता देखा गया है। अब तक के मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल की भी लंबी फेहरिस्त है जिसमें प्रदेश की सत्ता की बागडोर ओबीसी वर्ग के नेता के कंधों को ही सौपी गई । ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड, विंध्य और मध्य एमपी इलाके में सबसे ज्यादा 51 फीसदी ओबीसी मतदाताओं के आंकड़े है। राज्य की कुल 230 विधानसभा सीटों में से एक सैकड़ा से ज्यादा सीटों के उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला यही वर्ग करता रहा है । राजनैतिक उथल-पुथल के बीच साल 2003 में इस वर्ग की काफी सीटें बीजेपी की झोली में गई, लेकिन पांच साल बाद 2018 के चुनावों में सियासी हवा का रुख बदला और ओबीसी का काफी वोट बैंक कांग्रेस की ओर खिसक गया ।












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