जानिए लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं के खाते में कैसे आएगी रक्षाबंधन की राशि, सरकार ने उठाया बड़ा कर्ज
मध्य प्रदेश की बहुप्रचारित "लाड़ली बहना योजना" एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है रक्षाबंधन पर्व, जिस पर सरकार ने बहनों को एक विशेष उपहार देने का ऐलान किया है।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की सरकार 9 अगस्त 2025 को रक्षाबंधन के दिन लाड़ली बहनों के खातों में अतिरिक्त ₹250 तक की राशि भेजने जा रही है। लेकिन इस तोहफे के पीछे की आर्थिक कवायद भी उतनी ही चर्चा में है - सरकार इस विशेष भुगतान को पूरा करने के लिए एक महीने में दूसरी बार ₹4300 करोड़ का कर्ज लेने जा रही है।

क्या है रक्षाबंधन पर मिलने वाली यह राशि?
मूल "लाड़ली बहना योजना" के तहत प्रदेश की 1.31 करोड़ से अधिक महिलाओं को हर महीने ₹1250 की सहायता दी जाती है। अब, रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बहनों को अतिरिक्त ₹250 देने की घोषणा की है। इस राशि को "त्योहार विशेष सहयोग" के तौर पर जोड़ा जाएगा, ताकि महिलाएं रक्षाबंधन पर अपने भाइयों के लिए उपहार, मिठाई या त्योहार की तैयारियों में थोड़ा और सहूलियत से खर्च कर सकें।
सरकार का दावा है कि यह सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं के प्रति सामाजिक सम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
₹4300 करोड़ का कर्ज क्यों?
इस अतिरिक्त राशि को 1.31 करोड़ बहनों के खातों में सीधे भेजने के लिए सरकार को लगभग ₹327 करोड़ की जरूरत है। लेकिन चूंकि योजना का मासिक भुगतान भी अगस्त माह के लिए तय है, सरकार को कुल मिलाकर ₹1600 करोड़ से अधिक की राशि तुरंत चाहिए। इस जरूरत को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने एक बार फिर बांड के माध्यम से ₹4300 करोड़ का लोन लेने का फैसला किया है।
यह इस महीने का दूसरा कर्ज होगा - इससे पहले सरकार जुलाई के अंतिम सप्ताह में ₹3000 करोड़ का ऋण ले चुकी है।
राजकोषीय दबाव या सामाजिक निवेश?
एक ओर, सरकार की यह पहल महिला सशक्तिकरण के एजेंडे को मजबूती देती है, जिससे विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों की महिलाओं को सीधा लाभ होता है। दूसरी ओर, लगातार कर्ज लेने की नीति को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि "सरकार वोट बैंक साधने के लिए वित्तीय अनुशासन की बलि दे रही है।"
बहनों में उत्साह, लेकिन कुछ सवाल भी
भोपाल की रहने वाली लाड़ली बहना रेखा बाई का कहना है, "हम जैसे गरीब घरों के लिए ₹1250 बहुत मायने रखता है। अब रक्षाबंधन पर ₹250 और मिलेंगे, तो बच्चों को मिठाई या नई चूड़ियां खरीद सकेंगी।"
हालांकि कुछ महिलाओं का कहना है कि इस योजना की रकम में देरी, खातों में क्लियरेंस में परेशानी, और पोर्टल अपडेट न होने जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं। सरकार का दावा है कि अगस्त माह में 31 जुलाई तक सभी खातों का सत्यापन पूरा कर लिया गया है।
कर्ज की बारीकियां:
कुल राशि: 4300 करोड़ रुपये, जिसमें 2000 करोड़ रुपये का एक कर्ज और 2300 करोड़ रुपये का दूसरा कर्ज शामिल है।
- अवधि: पहला कर्ज 17 साल और दूसरा 23 साल की अवधि के लिए होगा।
- भुगतान: कर्ज का भुगतान साल में दो बार कूपन रेट के जरिए ब्याज के रूप में किया जाएगा।
- नीलामी की तारीख: 29 जुलाई 2025 को RBI द्वारा नीलामी आयोजित की जाएगी, और कर्ज की राशि 30 जुलाई को जारी होगी।
यह कर्ज चालू वित्त वर्ष (2025-26) में सरकार द्वारा लिया गया सातवां और आठवां कर्ज होगा। इससे पहले सरकार ने:
- 8 जुलाई 2025: 4800 करोड़ रुपये का कर्ज लिया।
- 4 जून 2025: 2000 करोड़ (16 साल के लिए) और 2500 करोड़ (18 साल के लिए) का कर्ज लिया।
- 7 मई 2025: 2500 करोड़ (12 साल के लिए) और 2500 करोड़ (14 साल के लिए) का कर्ज लिया।
इन कर्जों के साथ, वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक लिए गए कर्ज का आंकड़ा 18600 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। जुलाई माह में ही 9100 करोड़ रुपये (4800 करोड़ + 4300 करोड़) का कर्ज लिया जा रहा है, जिससे राज्य का कुल कर्ज बोझ 4,40,340.27 करोड़ रुपये को पार कर जाएगा।
रेवेन्यू सरप्लस का दावा, फिर भी कर्ज क्यों?
मध्य प्रदेश सरकार ने दावा किया है कि वह रेवेन्यू सरप्लस में है। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार की आय 2,34,026.05 करोड़ रुपये और खर्च 2,21,538.27 करोड़ रुपये था, जिससे 12,487.78 करोड़ रुपये का रेवेन्यू सरप्लस दर्ज किया गया। इसी तरह, वित्त वर्ष 2024-25 में रिवाइज्ड अनुमान के अनुसार आय 2,62,009.01 करोड़ रुपये और खर्च 2,60,983.10 करोड़ रुपये होने का दावा है, जिससे 1,025.91 करोड़ रुपये का सरप्लस दिखाया गया है।
इसके बावजूद, सरकार को भारी कर्ज लेने की जरूरत पड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि लाडली बहना योजना जैसे बड़े पैमाने की कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भारी वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है। लाडली बहना योजना के तहत हर महीने लगभग 1500 करोड़ रुपये (1.25 करोड़ महिलाएं × 1250 रुपये) खर्च किए जाते हैं, और अतिरिक्त बोनस जैसे रक्षाबंधन की 250 रुपये की राशि इस बोझ को और बढ़ा देती है।












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