लखनऊ में पान की पीक पर हर महीने खर्च होते हैं 10 लाख रुपये
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट 'लखनऊ मेट्रो' के लिए चारबाग से लेकर ट्रांसपोर्ट नगर तक के आठ किलोमीटर पर लगाए गए मेट्रो के बैरिकेटिंग को साफ करने में 10 लाख रुपये महीने खर्च हो रहे हैं। वजह यह है कि बैरिकेडिंग के किनारे से गुजर रहे यात्री पान व गुटखे की पीकों से बैरिकेड को गंदा कर देते हैं।
लखनऊ को 'तहजीब का शहर' कहा जाता है और यहां की नजाकत-नफासत और तहजीब के चर्चे पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन कुछ गलत आदतों के वजह से शर्मसार भी होना पड़ता है। ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग तक के मेट्रो के बैरीकेडिंग को लोगों ने पान की पीकों से गंदा कर दिया है।
पिछले नौ महीनों से मेट्रो का बैरिकेटिंग लगाकर काम चल रहा है। राजधानी व अन्य जिलों के लोग जो बसों व अपने वाहनों से बगल से निकलते हैं, बैरिकेटिंग पर पान थूककर उसे गंदा कर देते हैं।
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मेट्रो का जब काम शुरू हुआ था, तब बैरिकेटिंग कम थी, लेकिन जैसे-जैसे काम ने रफ्तार पकड़ा, बैरिकेटिंग के पैनलों की संख्या हजारों में पहुंच गई। कार्यदायी संस्था के गार्ड बैरिकेटिंग पर थूक रहे लोगों का मना भी करते हैं, लेकिन पान के शौकीन अपनी आदतों से बाज नहीं आते।
गंदगी देखकर मुंह घुमा लेते लोग
लखनऊ मेट्रो अगर इन बैरिकेटिंग के पैनलों से पान की पीकों की सफाई न करे तो इस पर सिर्फ पान की पीकें ही नजर आएंगी और बगल से गुजर रहे यात्री भी गंदगी देखकर मुंह घुमाने लगेंगे।
कार्यदायी संस्था लार्सन एंड टुब्रो ने पान की पीकों को साफ करने के लिए छह टीमों का गठन किया है, जिसके कर्मी दो पालियों में प्रतिदिन बैरिकेटिंग की सफाई करते हैं। इस सफाई पर लगभग 10 लाख रुपये प्रति माह खर्च आ रहा है।
मेट्रो के सिविल वर्क निदेशक दलजीत सिंह का कहना है, "अगर लोग मेट्रो की बैरिकेडिंग को गंदा नहीं करते तो 10 लाख रुपये महीने की बचत हो सकती थी।"
मेट्रो परियोजना के अधिकारियों ने लोगांे से अपील भी की है कि वे बैरिकेडिंग को गंदा न करें।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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