गुरु रविदास जयंती 2021: सीएम योगी आदित्यनाथ ने संत रविदास मंदिर में श्रद्धांजलि अर्पित की

लखनऊ। आज संत कवि रविदास जयंती पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ संत रविदास मंदिर पहुंचे। सीएम योगी ने इस दौरान संत रविदात जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। साथ ही उन्हें इस अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में कोविड-19 के प्रोटोकॉल व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील की है।

up cm yogi adityanath pays tribute at sant ravidas mandir on the birth anniversary

संत रविदास जयंती के अवसर पर बोलते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'अटल जी ने कहा था 'आदमी न छोटा होता है, न बड़ा होता है। आदमी न ऊंचा होता है, न नीचा होता है। आदमी तो सिर्फ आदमी होता है।' संत रविदास जी का जीवन चरित्र प्रेरणा प्रदान करता है कि व्यक्ति अपने कर्मों के माध्यम से कैसे महानता हासिल करता है।' पूरे जीवन संत रविदास ने समाज के तमाम प्रकार के रूढ़िवादों और पाखंडों का सामना करते हुए सनातन हिंदू धर्म को मजबूती देने का काम किया, जो आज हम सबकी सुरक्षा और पहचान है। हम सब 645 वर्ष के बाद भी इस महान संत की पावन जयंती को भव्यता के साथ मना रहे हैं।

सीएम योगी ने इससे पहले अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा, 'महान संत, अद्भुत समाज-सुधारक, अनुपमेय रचनाकार संत शिरोमणि गुरु रविदास जी को उनकी जयंती पर कोटिशः नमन। 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' जैसे निर्मल दर्शन के माध्यम से समाज को आडंबरमुक्त एवं समरस बनाने की प्रेरणा देने वाले गुरु रविदास जी के विचार हम सभी के लिए प्रेरणाप्रद हैं।' इस दौरान सीएम योगी ने महान समाजसेवी, 'सादा जीवन, उच्च विचार' की भावना की प्रतिमूर्ति, 'ग्रामोदय से राष्ट्रोदय' की संकल्पना के प्रणेता, भारत रत्न, राष्ट्रऋषि श्रद्धेय नानाजी देशमुख जी को उनकी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि। 'स्वावलंबी समाज' के निर्माण हेतु आपके विचार हमारे लिए पथ प्रदर्शक हैं।

जानिए कैसे मनाई जाती है रविदास जयंती?

रविदास जयंती के दिन 'अमृतवाणी गुरु रविदास जी' का पाठ किया जाता है और एक विशेष आरती भी की जाती है। इस दिन पवित्र नदी में डुबकी भी लगाई जाती है। गुरु रविदास को समर्पित मंदिरों में भी पूजा की जाती है। सबसे भव्य उत्सव वाराणसी में मनाया जाता है। दरअसल, संत और कवि रविदास का जन्म वाराणसी में हुआ था। दुनिया भर से अनुयायी इस स्थान पर आते हैं और इस अवसर का जश्न मनाते हैं। इस नगर कीर्तन का भी आयोजन किया जाता है।

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