इस बार रमजान में नहीं ले सकेंगे टुंडे कबाब का जायका, 115 साल में पहली बार बंद रहेंगी दुकान
लखनऊ। आज से पवित्र रमजान का पाक महीना शुरू हो गया है। पवित्र महीने में इस बार आप टुंडे कबाब के जायकों मजा नहीं ले सकेंगे। दरअसल, कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए देशभर में लगाए गए लॉकडाउन ने इस बार रमजान के महीने में जायका भी बिगाड़ दिया है। लेकिन इन सबमें टुंडे कबाबी सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। ऐसे में रमजान के पवित्र महीने के दौरान इस रेस्टोरेंट का बंद रहना अप्रत्याशित है।

115 साल में पहली बार हुई टुंडे कबाब की दुकान बंद
आपको बता दें कि कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए देश भर में पिछले एक महीने से लॉकडाउन लगा हुआ है, जो 3 मई तक चलेगा। लॉकडाउन के चलते मुस्लिम समुदाय के लोगों से घरों में रहकर इबादत करने की अपील की जा रही है। वहीं, रमजान के मौके पर कुछ दुकानों को छोड़कर सबकुछ बंद है। लखनऊ शहर के कई लोकप्रिय रेस्तरां भी बंद हैं। राजधानी लखनऊ में स्थित प्रसिद्ध टुंडे कबाब की दुकान भी इस बार बंद रहेंगी। 115 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब टुंडे कबाब की दुकान बंद है।

1905 में हुई थी स्थापना
टुंडे कबाबी के मालिक मोहम्मद उस्मान का कहना है, 'मेरे लिए काफी दुखद है कि इस बार मैं रोजेदारों की सेवा नहीं कर पाउंगा, जो सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास करते हैं। साथ ही रमजान के दौरान हमारे व्यंजनों के शौकीन भी हैं।' उन्होंने कहा कि हमारे रेस्टोरेंट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि रमजान के महीने में यह बंद रहेगा। उनके मुताबिक, दादा ने साल 1905 में पुराने लखनऊ में इस टुंडे कबाबी रेस्टोरेंट की स्थापना की थी।

टुंडे कवाब की है 8 शाखाएं हैं, रमजान में बढ़ जाती है मांग
उस्मान ने कहा कि लॉकडाउन की वजह मांस की खरीद करने में असमर्थ है, क्योंकि शहर में इसकी आपूर्ति को अभी तक बहाल नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि अन्य दिनों में हम लगभग 60 किलो मीट से तैयार कबाब बेचते हैं, जो रमजान के दौरान बढ़कर 100 किलो हो जाता था। उन्होंने बताया कि टुंडे कबाबी की शहर में दो शाखाएं हैं। मुख्य ब्रांच एक चौक पर स्थित है। वहीं, दूसरी मुख्य ब्रांच अमीनाबाद में है, जिसे मोहम्मद उस्मान स्वयं देखते हैं। उस्मान ने बताया कि अन्य परिवार के सदस्य भी सहारागंज मॉल, हवाई अड्डे, गोमती नगर और अन्य क्षेत्रों में टुंडे कवाब की शाखाएं खोले हुए हैं। कुल मिलाकर लखनऊ में लगभग 8 शाखाएं हैं।

कारीगरों और मजदूरों की हो गई है कमी
हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक, उस्मान ने बताया कि मांस के अलावा रेस्टोरेंट के लिए सबसे बड़ी समस्या कारीगरों और मजदूरों की कमी भी है। ज्यादातर कारीगर और मजदूर लॉकडाउन की वजह से अपने-अपने घर चले गए हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन 3 मई को समाप्त हो रहा है, जबकि रमजान मई के अंत तक चलेगा। इसलिए हमने रेस्टोंरेंट को बस बंद रखने का फैसला किया है। वहीं, लखनऊ के संभागीय आयुक्त मुकेश मेश्राम ने कहा कि हमने कोई बंद करने की पहल नहीं की। मांस की दुकानें बंद हैं क्योंकि उनमें से किसी ने भी एफएसडीए (खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन) से अनिवार्य लाइसेंस नहीं खरीदे हैं।
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