आखिर क्यों बसपा छोड़ भाजपा में शामिल हो गये बृजेश पाठक
लखनऊ। बसपा के पूर्व नेता बृजेश पाठक ने भाजपा का दामन थाम लिया है, उनके साथियों को भी यह यकीन नहीं हो रहा था कि महज कुछ घंटों पहले मायावती के एक कार्यक्रम में शामिल बृजेश अब भाजपा में शामिल हो गये हैं। जिस वक्त बृजेश पाठक ने भाजपा का दामन थामा उससे ठीक एक दिन पहले वह आगरा में मायावती की बड़ी रैली में मंच संचालन का काम देख रहे थे।
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ऐसे में सिर्फ कुछ घंटों के अंतर से भाजपा में शामिल होकर बृजेश पाठक ने सबको चौका दिया। माना जा रहा है आगरा में मायावती की रैली के दौरान मंच पर दलित नेताओं की बहुतायत के चलते उनकी अनदेखी की गयी। उन्हें इस बात का डर था कि जिस तरह से मायावती की ओर दलित और मुसलमानों के बीच बढ़ती पैठ अन्य जाति के लोगों को उनसे दूर कर देगी। माना जा रहा है कि बसपा 150 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने की योजना बना रही है।
बृजेश पाठक को मायावती की सोशल इंजीनियरिंग की का अहम हिस्सा माना जाता है, जिनकी बदौलत पार्टी को 2007 में दलितों और ब्राह्मणों का वोट हासिल हुआ था। पाठक ने कहा कि मायावती लोगों से किये अपने वादे को पूरा करने में विफल रहीं जिसके चलते उन्होंने लोगों का समर्थन खो दिया।
कई नेता थाम सकते हैं भाजपा का दामन
बृजेश पाठक और स्वामी प्रसाद मौर्या के बाद माना जा रहा है कि कई दिग्गज बसपा नेता भाजपा का दामन थाम सकते हैं। यूपी चुनाव में अब सिर्फ छह महीने का वक्त शेष है, ऐसे में जिस तरह से बसपा के नेता भाजपा में आ रहे है उससे पार्टी काफी उत्साहित है। केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि मायावती का जहाज डूब रहा है। सवर्णों के वोटों के इतर भाजपा गैर यादव व ओबीसी, एसएसी, एसटी वोटों पर भी अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में पार्टी इस वर्ग के लोगों को अपनी ओर करने की कोशिश कर रही है।












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