कैसे चलेगी यूपी सरकार, अब क्या करेंगे अखिलेश यादव?
लखनऊ। यूं तो रविवार को छुट्टी का दिन माना जाता है और हर कोई आराम करने के मूड में रहता है, लेकिन यूपी के मुख्यमंत्री छुट्टी के दिन बड़े नेताओं की छुट्टी करने में जुट गए।

अखिलेश यादव ने ताबड़तोड़ बड़े फैसले लिए अपने चाचा शिवपाल यादव को कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया, फिर उन्होंने तीन और कैबिनेट मंत्री नारद राय, शादाब फातिमा और ओम प्रकाश को जोकि शिवपाल समर्थक माने जाते हैं उनकी भी कैबिनेट से छुट्टी कर दी।
अखिलेश के इन फैसलों के बाद कैबिनेट से बर्खास्त शिवपाल सिंह यादव एक्शन में आए और उन्होंने नेताजी से मुलाकात के बाद रामगोपाल यादव पर संगीन आरोप लगाते हुए उनकी पार्टी से छह साल के लिए छुट्टी कर दी।
सपा परिवार में छिड़े इस संग्राम के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अखिलेश यादव की सरकार को अल्पमत की सरकार करार दिया है। यही नहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने अखिलेश सरकार से सदन में बहुमत साबित करने की मांग की है।
क्या है विधानसभा का गणित
मौजूदा समय में यूपी की 403 विधानसभा सीटों में समाजवादी पार्टी के पास कुल 229 विधायक हैं, जिसमें से 183 विधायक अखिलेश की बुलाई बैठक में शामिल हुए थे जबकि शिवपाल के साथ 46 विधायकों का साथ है।
शिवपाल का समर्थन चुनौती
ऐसे में जिस तरह से शिवपाल सिंह को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया गया है उन्हें देखते हुए माना जा रहा है कि शिवपाल समर्थक अखिलेश को अपना समर्थन ना दें। इस लिहाज से सदन में अखिलेश के लिए बहुमत साबित करना मुश्किल हो जाएगा।
विधानसभा को भंग कर सकते हैं अखिलेश
ऐसे में अखिलेश यादव के पास एक विकल्प तो यह है कि वह विधानसभा को भंग करने के लिए राज्यपाल को पत्र लिखे और फिर से नए सिरे से चुनाव में जाए, लेकिन ऐसे समय में चुनावी मैदान में जाना सपा के लिए मुश्किल सबब साबित हो सकता है।
अमर सिंह को बाहर कर हो सकता है समझौता
मौजूदा समय में दूसरा विकल्प मुलायम सिंह यादव के पास है, वह एक बार फिर से अखिलेश और शिवपाल के बीच बीच बचाव कर सरकार के बचे हुए कार्यकाल को पूरा करने के लिए अपनी भूमिका निभा सकते हैं।
मुमकिन है कि मुलायम सिंह इस पूरे विवाद के बीच अमर सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाकर अखिलेश को मना सकते हैं। बहरहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि इस प्रकरण पर अभी तक चुप्पी साधे हुए अमर सिंह इस प्रकरण पर क्या बोलते हैं।
नरम पड़ सकते हैं शिवपाल
शिवपाल सिंह को एक तरफ अखिलेश ने कैबिनेट से बाहर कर दिया है, तो दूसरी तरफ शिवपाल ने अपने बयान में अखिलेश यादव पर तीखा हमला करने से खुद को दूर रखा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उनके खिलाफ कौन षड़यंत्र कर रहा है। ऐसे में उनके तेवर देखकर यह लग रहा है कि वह समझौते के लिए तैयार हो सकते हैं।
अखिलेश के पास अलग पार्टी का विकल्प
सपा से रामगोपाल यादव की छुट्टी हो चुकी है, शिवपाल को अखिलेश यादव ने कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, सूत्रों की मानें मुलायम सिंह अखिलेश यादव से नाराज हैं। इन सब परिस्थितियों को देखते हुए अखिलेश यादव के पास एक विकल्प यह भी है कि वह सपा से अलग एक पार्टी का गठन कर साफ छवि के साथ जनता के बीच चुनाव में जाए।












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