मौलान खालिद रशीद की अपील- रमजान में कोविड नियमों का करें पालन, मस्जिदों में न इकट्ठा हों 100 से ज्यादा लोग
लखनऊ। कोरोना के प्रकोप ने एक बार फिर लोगों में दहशत पैदा कर दी है। शासन-प्रशासन की ओर से लगातार लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है। मास्क का उपयोग, सोशल डिस्टेंसिंग न सिर्फ आपको सुरक्षित रख सकता है, बल्कि आपके परिवार को भी संक्रमण से बचा सकता है। संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच मुस्लिम धर्म का पाक महीना रमजान शुरू होने जा रहा है। इसको लेकर इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने बयान जारी किया है। फरंगी महली ने रमजान के दौरान कोविड नियमों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कोरोना के बढ़ते मामलों और नाइट कर्फ्यू को देखते हुए ही कार्यक्रम किए जाएं। सभी मस्जिदों में कोरोना नियमों का पालन किए जाए। साथ ही किसी भी मस्जिद में 100 से ज्यादा लोग इकट्ठा ना हों।
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कब दिखेगा रमजान का चांद?
फरंगी महली ने बयान जारी कर कहा कि इस साल रमजान का चांद 12 अप्रैल को दिखेगा। अगर चांद दिख जाता है तो पहला रोजा 13 अप्रैल को होगा, नहीं तो 14 अप्रैल को होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, इसलिए सभी से अनुरोध है कि रमजान में कोविड प्रोटोकॉल का ध्यान रखें। नाइट कर्फ्यू का ध्यान रखते हुए सही वक्त में ईशा की नमाज पढ़ाई जाए। इशा की नमाज के बाद तरावीह पढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी मस्जिद में डेढ़ पारे से ज्यादा न पढ़ा जाए। इसके अलावा किसी भी मस्जिद में एक वक्त में 100 से ज्यादा लोग इकट्ठा न हो। अफ्तार में भी एक वक्त में 100 ज्यादा लोग इकट्ठा न हों।
मस्जिदों में मास्क, सेनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें
फरंगी महली ने कहा कि मस्जिदों में मास्क, सेनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। सेहरी में लाउड स्पीकर का इस्तेमाल न करें। सेहरी और इफ्तार में लोग कोरोना के खात्मे की दुआ करें। उन्होंने कहा कि कई शहरों में नाइट कर्फ्यू होने की वजह से रमजान में तरावीह की नमाज डेढ़ पारे से ज़्यादा न पढ़ी जाए, ताकि 9 बजे तक सभी अपने घर वापस चले जाएं। एक वक्त में किसी भी मस्जिद में 100 से अधिक लोग न हो और इसी तरह इफ्तार में भी 100 से अधिक लोग जमा न हों।












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