कोविशील्ड लगवा चुके लखनऊ के शख्स ने अदार पूनावाला के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत, जानिए क्यों?
लखनऊ, मई 31: लखनऊ में रहने वाले एक शख्स ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। शख्स ने आरोप लगाया है कि कोविशील्ड की डोज लेने के बाद एंटीबॉडी भी नहीं बनी और प्लेटलेट्स घटकर तीन लाख से डेढ़ लाख तक पहुंच गई। शख्स ने लखनऊ के आशियाना थाने में शिकायत दी है। इस मामले में इंस्पेक्टर पुरुषोत्तम गुप्ता ने कहा कि मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क किया गया है। शासन स्तर पर इसकी जांच होगी। उधर, शिकायतकर्ता ने धमकी दी है कि अगर उसकी शिकायत में उल्लिखित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएगा।

वैक्सीन लगाने के बाद स्वास्थ्य खराब होने का आरोप
लखनऊ के रहने वाले प्रताप चंद्र गुप्ता टूर एंड ट्रैवल का बिजनेस करते हैं। प्रताप का आरोप है कि कोविशील्ड वैक्सीन लगवाने के बाद उनका स्वास्थ्य खराब हो गया। प्लेटलेट्स घट गई। प्रताप ने कहा, ''21 मई को मैंने आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस को देखा था। इसमें आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव ने साफ कहा था कि कोविशील्ड की पहली डोज लेने के बाद से ही शरीर में अच्छी एंटीबॉडी तैयार हो जाती है, जबकि कोवैक्सिन की दोनों डोज के बाद एंटीबॉडी बनती है। ये देखने के बाद 25 मई को मैंने सरकारी लैब में एंटीबॉडी जीटी टेस्ट कराया।''

'मुझे बताया जाए वैक्सीन लगी थी या उस में पानी भरकर लगा दिया था'
प्रताप ने कहा, ''मैं अकेला नहीं हूं, जिसमे एंटीबॉडी नहीं बनी है। मेरे जैसे कई लोग और भी हैं। इसलिए अगर मेरी शिकायत को अनसुना किया जाता है तो मैं 6 जून को कोर्ट खुलने पर कोर्ट जाऊंगा। मुझे बताया जाए वैक्सीन लगी थी या उस में पानी भरकर लगा दिया था।''

पुलिस ने स्वास्थ्य अधिकारियों से किया संपर्क
बता दें, प्रताप चंद्र ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला, आईसीएमआर के डायरेक्टर बलराम भार्गव, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डीजी डॉ. टेड्रोस एधोनम गेब्रेसस, स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की डायरेक्टर अपर्णा उपाध्याय के खिलाफ लखनऊ के आशियाना थाने में एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत दी है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है। हालांकि, इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने आगे की कार्रवाई करने से पहले शीर्ष अधिकारियों को सूचित कर दिया है। इंस्पेक्टर पुरुषोत्तम गुप्ता ने कहा कि मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क किया गया है। शासन स्तर पर इसकी जांच होगी।












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