हाथरस केस: यूपी सरकार ने दी डीएम को न हटाने की दलील, 16 दिसंबर को अगली सुनवाई
लखनऊ। हाथरस में दलित युवती के साथ कथित गैंगरेप और हत्या के मामले में यूपी सरकार ने हाथरस के डीएम के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने पर अपनी दलील दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच इस प्रकरण की जांच कर रही सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन कर रही है। कोर्ट ने इस केस में 25 नवंबर को सुनवाई की, जिसका आदेश बुधवार को लोड किया गया। अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।

14 सितंबर हो हुई थी वारदात
हाथरस के चंदपा थाना क्षेत्र के एक गांव में 14 सितंबर को 19 वर्षीय दलित युवती के साथ कथित रूप से गैंगरेप किया गया। इसके बाद उसके साथ मारपीट की गई। पीड़िता को इलाज के लिए पहले जिला अस्पताल, फिर अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान 29 सितंबर को पीड़िता ने दम तोड़ दिया था। परिजनों ने गांव के ही चार युवकों पर आरोप लगाया था। चारों आरोपी अलीगढ़ जेल में बंद हैं।
सीबीआई कर रही मामले की जांच
यूपी सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की। इसके बाद जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने आरोपितों का ब्रेन मैपिंग टेस्ट भी करा लिया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है। सीबीआई जांच की स्टेटस रिपोर्ट पर सुनवाई कर रही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के समक्ष यूपी सरकार ने 25 नवंबर को अपना पक्ष रखा। सरकार ने हाथरस के डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने पर चार दलील दी है। राज्य सरकार ने मामले में स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस राजन रॉय की बेंच के समक्ष अपनी दलील रखी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा था कि हाथरस के डीएम के खिलाफ अभी तक कोई भी कार्रवाई न होने का क्या कारण है। डीएम को अभी तक वहां पर बनाए रखने का क्या औचित्य है।
यूपी सरकार ने कहा- डीएम लक्षकार को पद से न हटाया जाए
यूपी सरकार की ओर से कहा कि डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार को पद से नहीं हटाया जाएगा। कोर्ट में राज्य सरकार के वकील ने पीड़िता के रात में कराए गए अंतिम संस्कार को सबूतों के साथ सही ठहराया। कहा गया कि हाथरस के डीएम ने कुछ भी गलत नहीं किया। राज्य सरकार पहला कारण राजनीति बताया। डीएम के ट्रांसफर को राजनीतिक मुद्दा बना दिया गया है। इस मामले की जांच संबंधी सबूतों में डीएम की छेड़छाड़ का सवाल उठता ही नहीं है। राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट से कहा कि अब पीड़ित परिवार की सिक्योरिटी सीआरपीएफ के जिम्मे है और इसमें प्रदेश सरकार का कोई हस्तझेप नहीं हैं। मामले की जांच सीबीआई कर रही है, जिसमें सरकार का कोई लेना देना नहीं है।












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