देश के कवि पद्मश्री केपी सक्सेना नहीं रहे

केपी सक्सेना के रिश्तेदार व राष्ट्रीय स्तर के कवि सर्वेश अस्थाना ने अधिक जानकारी देते हुए बताया कि केपी सक्सेना 31 अगस्त को लखनऊ के निजी अस्पताल में भर्ती हुए थे। बीच में उनकी हालत में सुधार हुआ, पर गुरुवार की सुबह उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
हास्य कविताएं व कहानियां लिखना केपी साहब का शौक, यूं कहिये कि जुनून था। उन्होंने रेलवे में भी नौकरी की। केपी सक्सेना को वर्ष 2000 में पद्मश्री के सम्मान से नवाजा गया था।केपी सक्सेना विख्यात लेखक होने के अलावा सफल व्यंगकार व स्तंभकार भी थे।
डाली थी टीवी सीरियल की नींव
कम लोग ही जानते होंगे कि भारत में टेलीविजन सीरियलों के जन्मदाता केपी सक्सेना ही थे। जब देश में इतने सारे चैनल नहीं थे और लोग सिर्फ दूरदर्शन तक ही सीमित थे, तब 1981 में केपी सक्सेना ने लखनऊ दूरदर्शन के लिए ‘बीबी नातियों वाली' सीरियल लिखा था। यह इतना मशहूर हुआ कि इसे राष्ट्रीय चैनल पर भी दिखाया गया। एक तरह से यह भारत में टीवी सीरियल्स की नींव थी।
केपी सक्सेना न केवल हास्य व्यंग्य लिखते थे, बल्कि तमाम कवि सम्मेलनों में अपनी रचनाओं से लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। उन्होंने बॉलीवुड की फिल्म लगान, स्वदेस, हलचल और जोधा अकबर के डायलॉग भी लिखे थे। उन्हें सर्वश्रेष्ठ डायलॉग राइटर के लिये फिल्म फेयर के लिये नॉमिनेट भी किया गया था।
वीडियो में देखें केपी सक्सेना के व्यंग्य कहने का अंदाज-
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