भाजपा की मंशा यूपी बिहार से 60 सीटें मिलें

कार्यकर्ताओं के इस सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी सिर्फ नरेंद्र मोदी के कन्धों पर है। आम जनता में मोदी का आकर्षण बढ़ा है और भाजपा एक ताकत बनी है। भाजपा का बढ़ा नेटवर्क और सहयोगी संगठनों का जोश मोदी को अपने लक्ष्य में प्राप्त करने में सहयोग करेंगा। इसके अलावा भाजपा का अत्याधुनिक मजबूत प्रचारतंत्र है। मोदी के बढ़ते आकर्षण से भाजपा नेतृत्व की उम्मीदे बड़ी है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने एक अखबार से कहा कि भाजपा के वोटों में चौका देने वाली वृद्धि होगी। राममंदिर आन्दोलन के दौर से अधिक सांसद इस बार यूपी से चुने जायेंगे।
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यह सही है कि मोदी की रैलियों में ज्यादा भीड़ जुटती है और लोगों में उनकी लोकप्रियता बढ़ी है। इसके बदौलत उन्हें सन 2009 में भाजपा द्वारा जीती गयी 10 सीटों के आकड़े को बढ़ाना है। भाजपा नेतृत्व की चाहत है कि यूपी और बिहार से 60 सांसद चुनके दिल्ली जायें तो मोदी के लिए राह आसान होगी। पशिचमी उत्तर प्रदेश, ब्रज क्षेत्र और गोरखपुर क्षेत्र में भाजपा की सिथति मजबूत बतायी जा रही है। परन्तु काशी क्षेत्र और अवध क्षेत्र में पार्टी को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। उन दोनो क्षेत्रों से पिछली बार भाजपा के दो ही सांसद चुने जा सकें थे। वाराणसी से मुरली मनोहर जोशी और लखनऊ से लाल जी टन्डन। पिछले दिनों मोदी की बहरार्इच में हुयी रैली में अपेक्षाकृत कम भीड़ थी।
इन सबके बीच जहां सपा और बसपा ने अपने अधीकतर लोग सभा प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है वहीं भाजपा ने शिवरात्री तक अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किये। सपा और बसपा के घोषित प्रत्याशियों ने स्थानिय स्तर पर सम्पर्क तेज कर दिया है। भाजपा इस मामले में पिछडती नजर आ रही है। प्रदेश अध्यक्ष बाजपेयी कहते है कि प्रत्याशी चयन का होमवर्क कर लिया गया है। अब केन्द्रीय संसदीय बोर्ड को फैसला करना है। पहली सूची जल्द घोषित की जायेंगी। भाजपा टिकट बटवारे में बाहरी नेताओं के बजायें समर्पित कार्यताओं को तरजीह देना चाहती है। परन्तु उसे अयोध्या जैसी सीटों पर जिताऊ प्रत्याशी ही नहीं मिल रहे हैं।
इस सबके बावजूद पशिचमी यूपी में पैदा हुये सामप्रदायिक तनाव का लाभ भाजपा को मिल सकता है। कल्याण सिंह भी इस बार भाजपा के खेमेें में है। वह पिछड़े वर्ग से आते है। खुद नरेंद्र मोदी भी पिछड़े वर्ग से आते है। ऐसे में भाजपा को पिछड़े वर्ग में पैठ बनाने में मदद मिलेगी। भाजपा ने बूथ कमेटियों का गठन पूरा नहीं किया है। उसने अब तक 80 प्रतिशत ही बूथ कमेटिया बनायी है। बकौल बाजपेयी इसे जल्द पूरा कर लिया जायेंगा। ऐसे में लगता है कि पार्टी प्रत्याशियों को जिताने की जिम्मेदारी नरेंद्र मोदी पर ज्यादा रहेंगी।
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