नरेंद्र मोदी के नक्शेकदम पर चले अखिलेश यादव

आगामी लोकसभा चुनावों में पार्टी सोशल मीडिया का सहारा लेगी। यह सब किया जायेगा शहरी सीटों के लिये। सपा के वजूद में आने के बाद से ही राज्य के शहरी क्षेत्रों की लोकसभा सीटों पर जीत से वंचित रहती आई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी युवा नेताओं की टीम को सोशल मीडिया में पार्टी और सरकार की नीतियों के प्रचार-प्रसार के जरिए शहरी क्षेत्रों के लोगों को, खासकर युवाओं को जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, कानपुर, लखनऊ , गोरखपुर, वाराणसी, नोएडा, बरेली और झांसी जैसी शहरी लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज करने का सपा का मंसूबा अब तक पूरा नहीं हो पाया है। लिहाजा सपा ने इस बार अपनी रणनीति का मोदीफिकेशन किया है यानी वो सोशल मीडिया के इस्तेमाल के जरिए वह इन शहरी सीटों पर कब्जा करने के प्रयास करेगी।
यूपी के बड़े शहरों के वोटरों पर सपा की नजर
पार्टी की एक वरिष्ठ नेता के अनुसार शहरी क्षेत्रों का युवा सोशल मीडिया की बहसों से प्रभावित होता है। वह सामान्य लोगों में राय बनाने का भी काम करता है। ऐसे में सोशल मीडिया के जरिए पार्टी की नीतियों और अखिलेश सरकार की उपलब्धियों को प्रचारित कर युवाओं को पार्टी से जोड़ा जा सकता है। पार्टी का यह कदम नतीजे बदलने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
सपा नेतृत्व ने अखिलेश के करीबी आधा दर्जन दर्जा प्राप्त राज्यमंत्रियों की टीम को जिम्मा दिया है कि वह सपा सरकार की उपलब्धियों और पार्टी की नीतियों को सोशल मीडिया के जरिए प्रचारित करें। साथ ही इस युक्ति के प्रभावी और व्यापक प्रयोग के लिए वह पार्टी के युवा प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों का भी सहयोग लें।
सपा के युवा प्रकोष्ठ 'समाजवादी छात्रसभा' के प्रदेश अध्यक्ष अतुल प्रधान के अनुसार, "हमें विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में आए नए छात्रों के बीच संपर्क कर सदस्यता अभियान चलाने और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को सपा सरकार की उपलब्धियों से परिचित कराने व उन तक पार्टी की नीतियां पहुंचाने के निर्देश मिले हैं।"
सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि आज का युवा वर्ग मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के व्यक्तिव और उनकी कार्यशैली से प्रभावित है। अपने युवा मुख्यमंत्री की उपलब्धियों के जरिए सपा शहरों में ज्यादा से ज्यादा युवाओं को पार्टी से जोड़ना चाहती है। पार्टी के एक युवा नेता ने कहा कि सपा सरकार की तरफ से छात्रों को दिया गया लैपटॉप भी इस दिशा में काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। जिन युवकों को लैपटॉप मिले हैं, उनमें ज्यादातर सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं।












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