Kota कैसे बना Coaching Hub? IIT के 10 छात्रों से लेकर 25 आत्महत्याओं तक की Full Story
kota coaching industry story in Hindi: कोटा में इस साल आठ माह में ही 25 छात्रों ने आत्महत्या कर ली। कोटा कोचिंग इंडस्ट्री पांच हजार करोड़ की हो चुकी है। 2023-24 में कोचिंग छात्रों की संख्या 2 लाख तक पहुंच गई।
Kota How Became Coaching Hub: डॉक्टर-इंजीनियर बनने का ख्वाब संजोने वालों के लिए राजस्थान का कोटा आखिरी पड़ाव है। आईआईटी, जेईई और नीट की तैयारी करने को हर साल लाखों स्टूडेंट कोटा की राह पकड़ते हैं।
यूं भी कह सकते हैं कि कोटा शहर सपनों के बोझ तले दबा हुआ है। कोटा में आए दिन कोई ना कोई छात्र जिंदगी की जंग हार रहा है। साल 2023 के आठ माह में ही अब तक 25 छात्र सुसाइड कर चुके हैं।

छात्रों की आत्महत्याओं के बीच जानिए आखिरी कोचिंग कोचिंग हब कैसे बना? कोटा कोचिंग इंडस्ट्री का कारोबार कितने हजार करोड़ का है ? कोटा में कोचिंग संस्थान, छात्र, फीस, छात्रावासों की संख्या कितनी है? कोटा स्टूडेंट की सुसाइड रोकने के लिए कोटा में क्या उपाय किए गए हैं?
कोटा फैक्ट्री व कोटा जंक्शन से भी पहचान
छात्रों को डाक्टरों व इंजीनियर बनाने वाले कोटा को कई नामों से जाता है। मसलन कोटा फैक्ट्री, कोचिंग हब राजस्थान, कोटा जंक्शन, कोचिंग सिटी, राजस्थान की शिक्षा नगरी। कोटा कोचिंग इंडस्ट्री का कारोबार करीब 5 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का चुका है।
कोटा में कोचिंग फीस व संस्थान
कोटा में कोचिंग संस्थानाओं में प्रति छात्र प्रति वर्ष तैयारी की फीस 40 हजार रुपए से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक पहुंच गई है। कोटा के छह नामी संस्थानों में हर समय पांच हजार से ज्यादा छात्र पढ़ रह होते हैं। वहीं, कोटा में छात्रवासों की संख्या करीब 3 हजार है, जिनमें 25 हजार कमरे हैं।
कोटा में हर साल बढ़ रहे छात्र
कोटा में मेडिकल व इंजीनियरिंग करने वालों छात्रों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। साल 2023 में छात्रों का आंकड़ा 2 लाख 5 हजार तक पहुंच गया है। 2022-23 में 1 लाख 77 हजार 439 और 2021-22 में 1 लाख 15 हजार छात्र कोचिंग करने कोटा पहुंचे।
कोटा में कोचिंग छात्रों की खुदकुशी
कोटा से जहां नीट, आईआईटी व जेईई के टॉपर निकलते हैं। वहीं, यहां पर ऐसे छात्रों की भी कमी नहीं जो जिंदगी की जंग हार जाते हैं। कोटा पुलिस के आंकड़ों के अनुसार साल 2015 में 17, 2016 में 16, 2017 में सात, 2018 में20 और 2019 में आठ छात्रों में आत्महत्या की है। इस साल अगस्त तक ही आत्महत्या का आंकड़ा 25 तक पहुंच गया।
कोटा ऐसे बना कोचिंग हब
कोटा के कोचिंग हब बनने की शुरुआत साल 1991 में हुई। तब यहां पर कोचिंग संस्थानों की संख्या गिनती की थी। 1991 में कोटा से 10 छात्रों का आईआईटी में चयन हो गया था। तब कोटा की उस कोचिंग संस्थान की देशभर में खूब चर्चा हुई थी। अगले साल 1992 में कोटा से आईआईटी के 50 छात्र सलेक्ट हुए। इसके बाद तो कोटा शहर की गली-गली में कोचिंग संस्थान खुल गए।
पांच हजार करोड़ की हुई कोटा इंडस्ट्री
वर्तमान में कोटा शहर में कोचिंग सस्थानों की संख्या 150 के आस-पास है। कोचिंग की वजह से कोटा में हॉस्टल, पीजी, रेस्टोरेंट, कैफे व मेस भी खूब खुले। कोटा की पूरी कोचिंग इण्डस्ट्री का कारोबार करीब पांच हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। नीट की तैयारी के लिए भारत की सर्वश्रेष्ठ कोचिंग संस्थान भी कोटा में ही है।
आत्महत्या रोकने के उपाय, दो माह तक टेस्ट नहीं
कोटा में कोचिंग छात्रों की खुदकुशी के केस रोकने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। कुछ दिन पहले सीएम अशोक गहलोत ने कोटा कोचिंग संस्थानों की मीटिंग ली। इसके बाद कोटा प्रशासन ने छात्रावासों के पंखों में एंटी सुसाइड डिवाइस लगाने के निर्देश दिए। वहीं, अब महाराष्ट्र के छात्र आविष्कार की खुदकुशी के बाद कोटा जिला कलेक्टर ओपी बुनकर ने नए आदेश जारी किए हैं, जिनके तहत आगामी दो माह तक किसी प्रकार का कोई टेस्ट नहीं लिया जाएगा। सात दिन छात्रों को पूरी तरह से फ्री रहने दिया जाए। न कोई क्लास और ना ही कोई टेस्ट।
मदद बस एक कॉल दूर
पहचान पूर्णतः गोपनीय , पेशेवर परामर्श सेवा
iCALL मेंटल हेल्पलाइन नंबर: 9152987821
सोम - शनि: सुबह 10 बजे - शाम 8 बजे












Click it and Unblock the Notifications