Bundi Accident : परिवार में बची सिर्फ यह मासूम बेटी, 3-3 फीट की दूरी पर एक साथ जलीं 22 चिताएं

बूंदी। 30 घंटे बाद भी कलेजे को चीर देने वाली चीखें सुनाई दे रही हैं। आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ये वो अभागी बच्ची जीया है, जिसने राजस्थान के बूंदी हादसे में मां-पिता, भाई और बहिन सबको खो दिया है। बुधवार को बूंदी के गांव लाखेरी में जो बस मेज नदी में गिरी थी। इसका पूरा परिवार उस बस में सवार था। बूंदी सड़क हादसे में कुल 24 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 3 बच्चियां और 11 महिलाएं भी शामिल थीं। हादसे में मारे गए ज्यादातर लोग एक ही परिवार के थे। 24 लोगों की मौत के बाद प्रशासन और सरकार ने जो तेजी दिखाई वो अगर हादसे से पहले दिखाई होती तो शायद ये हादसा होता ही नहीं और उन 24 लोगों की जान बच जाती। बूंदी दर्दनाक हादसे के लिए कई लोग जिम्मेदार हैं।

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    25 फीट नीचे गिरी बस

    25 फीट नीचे गिरी बस

    बता दें कि राजस्थान के बूंदी जिले में जिस नदी से तकरीबन 25 फीट ऊपर बनी पुलिया पर हादसा हुआ वहां किसी प्रकार की रैलिंग नहीं है। इतना ही नहीं पुलिया की चौड़ाई इतनी संकरी थी कि दो वाहन मुश्किल के एक साथ पुलिया पार सकते हैं।

     हादसे के लिए प्रशासन की देरी भी कम जिम्मेदार नहीं है

    हादसे के लिए प्रशासन की देरी भी कम जिम्मेदार नहीं है

    राजस्थान के बूंदी में मेज नदी की पुलिया पर बुधवार को करीब साढ़े 9 बजे हुए हादसे के 40 मिनट बाद प्रशासन मौके पर पहुंच पाया। 25 फीट की ऊंचाई से गहरी नदी में गिरे लोगों का 40 मिनट बाद भी जिंदा मिल जाना लगभग असंभव था। आस-पास के स्थानीय लोगों से जितना हो पाया उतना उन्होंने किया। संसाधनों के अभाव में ग्रामीणों को ज्यादा सफलता नहीं मिली।

    पुलिया का निर्माण बाबूलाल वर्मा के कार्यकाल में हुआ

    पुलिया का निर्माण बाबूलाल वर्मा के कार्यकाल में हुआ

    हादसे के दौरान जब पूर्व परिवहन मंत्री बाबूलाल वर्मा मौके पर पहुंचे तो लोगों ने उनका इसी बात को लेकर सबसे ज्यादा विरोध किया। लोगों ने आरोप लगाया पुलिया की चौड़ाई जानबूझकर कम रखी गई, जिसकी वजह से 26 फरवरी 2020 को बूंदी में कभी नहीं भूल सकने वाला हादसा हुआ। दरअसल, इस पुलिया का निर्माण बाबूलाल वर्मा के कार्यकाल में ही हुआ था।

     फिटनेस सर्टिफिकेट 2013 में खत्म हो गया था

    फिटनेस सर्टिफिकेट 2013 में खत्म हो गया था

    बस के लिए जो फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया गया था। वो 2013 में खत्म हो गया था। बावजूद इसके बस धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रही थी। इतनी लापरवाहियों का नतीजा ये निकला कि 24 लोग मौत की नींद में सो गए। बुधवार को कोटा के श्मशान घाट का वो मंजर सबको रूला गया। जब 3-3 फीट के अंतराल पर 22 चिताएं एक साथ जलाई गई थीं।

     क्षमता से ज्यादा भर रखी थी सवारी

    क्षमता से ज्यादा भर रखी थी सवारी

    इस हादसे की एक और वजह भी थी। वो थी। जिस बस से ये हादसा हुआ। वो एक मिनी बस थी, जिसमें ज्यादा से ज्यादा 17 सवारियां बैठ सकती हैं। हादसे के वक्त बस में करीब 30 सवारियां थीं। पड़ताल के दौरान पता चला कि पिछले 7 साल से बस की फिटनेट ही नहीं जांची गई।

    ड्राइवर बस को चेक करने नीचे भी उतरा था

    ड्राइवर बस को चेक करने नीचे भी उतरा था

    प्रशासन के आने तक 24 लोगों की मौत हो चुकी थी। इस दर्दनाक हादसे में घायल बचे कुछ लोगों ने बताया कि हादसे से थोड़ी देर पहले ही ड्राइवर ने बस रोकी थी। ड्राइवर को अंदेशा हो गया था कि बस में कोई गड़बड़ हुई है। लिहाजा ड्राइवर बस को चेक करने नीचे भी उतरा था, लेकिन वो थोड़ी लापरवाही कर गया। शायद सोचा होगा। जब चलता है। चलने देते हैं। आगे देखेंगे, लेकिन उसे क्या मालूम था। आगे को मौत उनका इंतजार कर रही थी।

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