बकरे की शव यात्रा निकाल हिंदू-रीति से किया अंतिम संस्कार, सिर भी मुंडवाया
बकरे की शव यात्रा निकाल हिंदू-रीति से किया अंतिम संस्कार, सिर भी मुंडवाया
कौशांबी, 04 दिसंबर: पशु प्रेम की जीती जागती मिसाल उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में देखने को मिली है। यहां बकरे की मौत के बाद परिजनों में शोक की लहर छा गई। तो वहीं, बकरे के मालिक ने हिंदू रीति रिवाज से बकायदा उसका अंतिम संस्कार किया। अंतिम संस्कार से पहले बकरे की शव यात्रा निकाली गई और अपना सिर भी मुंडवा लिया। वहीं, अब ये मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है और मीडिया की सुर्खियों में आ गया है।
Recommended Video

बेटे की तरफ करता था प्यार
ये मामला कौशांबी जिले के सिराथू तहसील क्षेत्र के निहालपुर गांव का है। गांव निवासी रामप्रकाश यादव होमगार्ड है और मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय में तैनात हैं। राम प्रकाश यादव ने एक बकरा पाल रखा था। राम प्रकाश ने अपने बकरे का नाम कल्लू रखा था और अपने बेटे जैसा समझता था। इतना ही नहीं, वो कल्लू का पालन-पोषण भी अपने बेटे की तरह करता था।

बकरे को किसी कसाई को नहीं बेचना चाहते थे वो
राम प्रकाश के परिजनों को भी बकरे से प्यार हो गया। वो उसे किसी कसाई को नहीं बेचना चाहते थे। एक दिन राम प्रकाश अपने परिजनों के साथ बैठा और योजना बनाई कि यदि बकरे को कुछ हो जाता है तो वो उसका अंतिम संस्कार हिंदू-रिवाज से करेंगे। इतना ही नहीं, उसकी आत्मा की शांति के लिए वो ब्राह्मण भोज का भी आयोजन करेगे।

कई दिनों से बीमार चल रहा था बकरा
दरअसल, राम प्रकाश का बकरा कल्लू पिछले दो-तीन दिनों से बीमार चल रहा था। उसकी दवा-गोली भी कराई गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। शुक्रवार की सुबह अचानक कल्लू की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई। रामप्रकाश ने ग्रामीणों के साथ मिलकर कल्लू की अंत्योष्टि की तैयारी की और बकायदा शव यात्रा निकाली गई।

शव यात्रा में शामिल हुआ पूरा गांव
खराब मौसम के बीच शव यात्रा में पूरा गांव शामिल हुआ। बता दें, राम प्रकाश ने कल्लू को अपने निजी खेत में ले जाकर हिंदू-रीति रिवाज से अंतिर संस्कार किया। इतना ही नहीं शुद्धिकरण के लिए उसने अपना सिर भी मुंडवा लिया। अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज और धूमधाम से होने के कारण पूरे इलाके में यह चर्चा का विषय बना हुआ हैं और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

16 दिसंबर को होगी तेरहवीं
राम प्रकाश ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि मैंने एक बकरा पाल रखा था, जिसका नाम कल्लू रखा था। वो साढ़े 5 साल का था। तबीयत ज्यादा खराब नहीं हुई थी, लेकिन उसे पता नहीं क्या हो गया तो वो दो दिन के भीतर मर गया। उसकी आत्म की शांति के लिए अब मैं सब कुछ करूंगा। राम प्रकाश ने बताया कि आत्मा की शांति के लिए 16 दिसंबर को तेरहवीं कार्यक्रम आयोजित करने का भी फैसला किया है।












Click it and Unblock the Notifications