फटे हुए जूते पहन कमिश्नर ऑफिस पहुंचा था 80 साल का बुजुर्ग, पुलिसकर्मी ने फिर जो कुछ किया...अब हो रही तारीफ
Kanpur Police News: कानपुर पुलिस अक्सर चर्चाओं में रहती है कभी अपने गुड वर्क के लिए तो कभी विवादों के लिए। तो वहीं, अब कानपुर पुलिस का एक मानवीय चेहरा भी देखने को मिला है। दरअसल, यहां एक 80 वर्षीय बुजुर्ग फटे हुए जूते पहनकर पुलिस कमिश्नर के ऑफिस पहुंचा था। बुजुर्ग के पैरों में फटे हुए जूते देखकर सिपाही का दिल पसीज गया।
सिपाही ने तत्काल बुजुर्ग के लिए नए जूते मंगाए और अपने हाथों से बुजुर्ग को जूते पहनाए। इस दौरान बुजुर्ग भी भावुक हो गया। वहीं, इस वाकय का वीडियो और फोटोज सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद सब जगह पुलिसकर्मी की तारीफ हो रही है। इतना ही नहीं, पुलिसकर्मी द्वारा बुजुर्ग को जूते पहनाने की तस्वीरे ने हर किसी के चेहरे पर एक मुस्कान ला दी।

आजतक की खबर के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल हुई ये तस्वीर सोमवार 17 जुलाई की बताई जा रही है। 80 वर्षीय बुजुर्ग राजबहादुर अपने मकान की शिकायत लेकर कानपुर के पुलिस कमिश्नर ऑफिर पहुंचे थे। इस दौरान 80 वर्षीय बुजुर्ग राजबहादुर के पैरों में फटे हुए थे। बुजुर्ग के फटे हुए जूत देखकर कमिश्नर के गार्ड निशांत तोमर का दिल पसीज गया।
बुजुर्ग के फटे हुए जूते देखकर गार्ड ने जो कुछ किया, वो चर्चा का विषय बन गया। बता दें, बुजुर्ग राजबहादुर अपनी शिकायत लेकर जब तक अधिकारियों से मिले। तब तक सिपाही दौड़ कर कचहरी के पास एक जूते की दुकान से नया जूते खरीद कर ले आया। बुजुर्ग जैसे ही अधिकारियों से मिलकर लाठी के साहरे कमरे बाहर निकले, तभी सिपाही निशांत हाथों में नए जूते लेकर बुजुर्ग के सामने खड़े थे।
80 वर्षीय बुजुर्ग राजबहादुर जब तक कुछ समझ पाते, सिपाही दौड़ कर कुर्सी लाया और बुजुर्ग को बैठाकर अपने हाथों से उनके पुराने और फटे जूतों को उतार दिया। इसके बाद सिपाही ने अपने हाथों से नए जूते बुजुर्ग राजबहादुर को पहना दिए। ये सब देखकर बुजुर्ग हैरान और भावुक हो गए। इसके बाद बुजुर्ग ने कहा कि सिपाही भैया को मेरा आशीर्वाद है।
फिलहाल कानपुर पुलिस के सिपाही का ये गुड वर्क चर्चा का विषय बना हुआ है और इसकी वीडियो और फोटो सोशल मीडिया और क्षेत्र में वायरल हो रही हैं। बता दें कि पुलिस कमिश्नर ऑफिस में जिसने भी इस नजारे को देखा वह भी भावुक नजर आया। वहीं, सिपाही निशांत तोमर का कहना है कि बुजुर्ग राजबहादुर चार दिन पहले भी आए थे।
उस वक्त भी इन का फटा जूता मैंने देखा था। मेरे मन में आया था कि मैं कुछ हेल्प करूं, लेकिन यह तुरंत चले गए थे। आज जैसे ही एप्लीकेशन लेकर आए अंदर गए, तो मुझे मौका मिल गया। मैं दौड़ कर जूते की दुकान से जूते ले आया और जूता पहना दिया। बुजुर्ग मेरे पिता की तरह हैं।












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