बनारसी बाग की तर्ज पर कानपुर के चिड़ियाघर में ट्रेन

गौरतलब है कि जब कुछ माह पहले प्राणि उद्यान में ट्वाय ट्रेन चलाने का फैसला कर उसकी पटरी झील के ऊपर से ले जाने का नक्शा बनाया गया था, उस समय उद्यान के निदेशक के. थॉमस ने सुरक्षा कारणों के मद्देनजर नक्शे को नामंजूर कर दिया था।
उन्होंने कहा था कि झील में बड़ी संख्या में मगरमच्छ हैं जो ट्रेन यात्रियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके बाद निर्माण निगम ने दूसरा नक्शा बनाया, जिसे पूरा करने के लिए करीब 245 पेड़ों की कटाई करनी पड़ती। लेकिन वन प्रेमियों के धरना-प्रदर्शन के बाद पेड़ों के कटान पर भी रोक लगा दिया गया। उसके बाद ट्वाय ट्रेन की जगह ट्राम ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया।
ट्राम ट्रेन सड़कों पर चलनी थी और इसके लिए पेड़ों की कटाई भी नहीं की जानी थी। यह प्रस्ताव शासन में बैठे अधिकारियों की समझ में नहीं आया। चार माह से यह परियोजना लटकी हुई थी। निर्माण निगम के अधिकारियों ने जब अंतत: जू-ट्रेन चलाने का मसौदा तैयार किया, तो उसे मंजूरी भी मिल गई।
इस बार बनाए गए नक्शे के मुताबिक, पटरी बिछाने के दौरान एक भी पेड़ नहीं काटना पड़ेगा। पटरी भी चार के बजाय 2.5 किलोमीटर में ही बिछाई जाएगी। इसके लिए तीन प्लेटफार्म भी बनेंगे, जो गैंडे, रात्रिचर जीव और जेब्रा के बाड़े के पास स्थित होंगे। ट्रेन चलाने की यह परियोजना दो चरणों में पूरी होगी। परियोजना प्रबंधक राम मोहन अग्निहोत्री ने बताया कि पहले चरण में पुलिया, रिटेनिंग दीवार और जमीन को समतल करने का काम किया जा रहा है। इसके बाद ट्रैक बिछाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि ट्रेन के इंजन और डिब्बों के लिए दिल्ली की प्रकाश एम्यूजमेंट एंड फन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को ठेका दिया गया है। ट्रेन का इंजन बैटरी से चलेगा और इसमें तीन डिब्बे लगाए जाएंगे। अगर सब कुछ सही रहा तो ट्वाय ट्रेन अगले वर्ष बरसात में चलनी शुरू हो जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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