बदमाशों ने घात लगाकर की पुलिस टीम पर फायरिंग, गाड़ियां रोकने के लिए रास्ते में खड़ी कर रखी थी JCB मशीन
कानपुर। 'शिवली का डॉन' नाम से मशहूर हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकडने गई पुलिस टीम पर बदमाशों ने घेरकर गोलियां बरसा दीं। इसमें सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए, जबकि सात पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस टीम की अगुवाई सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा कर रहे थे। वहीं, ऐसी खबरें भी सामने आ रही है कि हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पुलिस दबिश की भनक पहले से ही थी। इसलिए उसने प्लानिंग के साथ गांव में घुसने वाले रास्ते में जेसीबी खड़ी कर रास्ता रोक दिया। इतना ही नहीं, आसपास के घरों में बदमाश घात लगाकर छिपे हुए थे। जैसे ही पुलिस टीम विकास के घर के सामने पहुंची, उसकी छत से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। इस गोलीबारी के बाद विकास दुबे और उसके गुर्गे अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।
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विकास दुबे को पहले से थी पुलिस दबिश की भनक
एनकाउंटर से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आ रही है। पता चला है कि विकास दुबे को शायद पुलिस की दबिश की पहले से जानकारी थी। खुद डीजीपी का कहना है कि गांव में पुलिस की गाड़ियों को रोकने के लिए रास्ते पर जेसीबी मशीनें रख दी गई थीं। इससे साफ है कि पुलिस दबिश की जानकारी पहले से हो गई थी। यही वजह रही पुलिस के पहुंचते ही फायरिंग शुरू हो गई। इस फायरिंग में देवेंद्र कुमार मिश्रा, सीओ महेश यादव, एसओ शिवराजपुर अनूप कुमार, चौकी इंचार्ज मंधना नेबूलाल, सुल्तान सिंह, राहुल, जितेन्द्र और बबलू हैं।

क्या कहा DGP ने
डीजीपी एचसी अवस्थी ने बताया कि हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के खिलाफ एक हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी सिलसिले में उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम उसके गांव पहुंची थी। यहां जेसीबी मशीनें रास्ते में लगा दी गईं, जिससे पुलिस को अपने वाहन रोकने पड़े थे। जैसे ही फोर्स उतरी अपराधियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने जवाबी फायरिंग की लेकिन अपराधी ऊंचाई पर थे, इसलिए 8 पुलिसवाले शहीद हो गए। इस हमले में 7 पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बॉर्डर सील, अलर्ट पर पुलिस
कानपुर के चौबेपुर में हुई मुठभेड़ के बाद कन्नौज पुलिस हाई अलर्ट पर है। जिले से सभी बॉर्डर को सील कर सघन तलाशी की जा रही है। जिलेभर की पुलिस अलग-अलग स्थानों पर चेकिंग में जुटी है और बदमाशों की तलाश की जा रही है। जीटी रोड से निकलने वाले हर रास्ते से गुजरने वाली गाड़ियों की सघन चेकिंग की जा रही है। वहीं, कानपुर के एडीजी जेएन सिंह ने बताया है कि विकास दुबे और उसके साथियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान जारी है। घायल पुलिसकर्मियों का इलाज जारी है। कन्नौज और कानपुर देहात की पुलिस को भी बुला लिया गया है।

खुफिया विभाग को आखिर क्यों नहीं लगी भनक
सवाल यह है कि जब बदमाशों ने पुलिस पर हमला करने की तैयारी में थे तो इस बात की भनक स्थानीय खुफिया एजेंसी (LIU) को क्यों नहीं लगी। क्योंकि गांव के रास्ते को जेसीबी लगाकर रोकने की प्लानिंग से ही अंदाजा हो जाता है कि वह घात लगाकर हमला करने की तैयारी कर चुके थे।

विकास ने बना रखा है किलेनुमा घर, मिले एके-47 के खोखे
विकास दुबे ने घर को किलेनुमा बना रखा है। घर के बाहर बने बड़े से हाते को बाउंड्रीवाल से घेर रखा है। जिसके गेट पर सीसीटीवी लगे हैं। गेट के ठीक सामने जेसीबी को खड़ा किया गया था। घर के भीतर से ही गेट पर आने जाने वालों पर इससे आसानी से नजर रखी जा सकती थी। घर के भीतर कई लग्जरी गाड़ियां खड़ी थीं, जिनके शीशे टूट गए। कहा जा रहा है कि, रात में जब पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई तो ये शीशे टूटे हैं। मौके पर एके-47 के खोखे भी बरामद हुए हैं। गांव में सन्नाटा पसरा है। लोग अपने घरों को छोड़कर फरार हो गए हैं।












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