Twisha Sharma: ट्विशा का पति हिरासत में, सरेंडर करने पहुंचा था कोर्ट, CBI जांच से पोस्टमॉर्टम तक हर अपडेट
Twisha Sharma Husband Samarth Singh: एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा केस अब सिर्फ एक संदिग्ध मौत का मामला नहीं रह गया है। इस केस ने कानूनी,राजनीतिक और पुलिसिया सिस्टम पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 22 मई को मामले में बड़ा मोड़ तब आया, जब ट्विशा के पति समर्थ सिंह अचानक जबलपुर जिला कोर्ट पहुंच गया। वह सरेंडर करने आया था, लेकिन कोर्ट परिसर में ऐसा हंगामा हुआ कि कई थानों की पुलिस बुलानी पड़ी।
इधर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ट्विशा की डेडबॉडी का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश दे दिया है। यह पोस्टमॉर्टम भोपाल AIIMS में दिल्ली AIIMS के डायरेक्टर की निगरानी में होगा और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। वहीं राज्य सरकार ने मामले की CBI जांच के लिए केंद्र को पत्र भेजकर मंजूरी भी दे दी है।

🔷मास्क पहनकर कोर्ट में बैठा था समर्थ
21 मई शाम जबलपुर जिला कोर्ट में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आरोपी समर्थ सिंह वहां पहुंचा। बताया जा रहा है कि वह जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में मास्क लगाकर बैठा था। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि समर्थ को कोर्ट नंबर-32 में बैठने की अनुमति कैसे दी गई, यह खुद एक बड़ा सवाल है। उनका कहना है कि समर्थ पर इनाम घोषित है और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद वह खुलेआम घूमता रहा और स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी।
मीडिया ने जब समर्थ से सवाल पूछने की कोशिश की, तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। हालात बिगड़ते देख करीब 6 थानों की पुलिस कोर्ट परिसर पहुंच गई। फिलहाल समर्थ को वकीलों के एक केबिन में रखा गया।
🔷दोबारा पोस्टमॉर्टम का आदेश क्यों अहम है? (Why Re-Postmortem Order Matters)
ट्विशा शर्मा केस में सबसे बड़ा सवाल उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर उठ रहा है। परिवार लगातार पहले पोस्टमॉर्टम पर सवाल खड़ा कर रहा था और दोबारा जांच की मांग कर रहा था।
अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करते हुए दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश दिया है।
कोर्ट के मुताबिक:
- पोस्टमॉर्टम भोपाल AIIMS में होगा
- दिल्ली AIIMS के डायरेक्टर के नेतृत्व में मेडिकल टीम जांच करेगी
- पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी
- तब तक शव सुरक्षित रखा जाएगा
कानूनी जानकार मानते हैं कि हाई-प्रोफाइल मामलों में दोबारा पोस्टमॉर्टम का आदेश तभी दिया जाता है, जब अदालत को शुरुआती जांच में किसी तरह की आशंका नजर आती है या परिवार की आपत्तियां गंभीर मानी जाती हैं।
🔷CBI जांच की एंट्री से केस में नया मोड़ (CBI Probe Adds New Twist)
इस मामले में अब CBI जांच का रास्ता भी खुल गया है। मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि 20 मई को ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा रिटायर्ड सैनिकों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिले थे। उसी दौरान मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया था।
CBI जांच की मांग लगातार सोशल मीडिया और परिवार की ओर से उठाई जा रही थी। ऐसे में सरकार का यह कदम राजनीतिक और कानूनी दोनों नजरिए से अहम माना जा रहा है।
🔷रिटायर्ड जज सास की जमानत पर भी सवाल
मामले में ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत भी विवाद में आ गई है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर उनकी जमानत रद्द करने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि सशर्त अग्रिम जमानत के चलते जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग नहीं मिल पा रहा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि इससे सबूतों पर असर पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 25 मई को होगी।
🔷समर्थ के वकील ने क्या कहा?
समर्थ सिंह के वकील जयदीप कौरव ने कहा कि कोर्ट में इस मामले से जुड़ी चार अलग-अलग याचिकाएं लगी थीं।
इनमें:
- समर्थ की अग्रिम जमानत याचिका
- दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग
- गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द करने की याचिका शामिल थीं
उन्होंने बताया कि समर्थ की अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली गई है। वहीं ट्विशा के परिवार की तरफ से आरोप लगाया गया कि समर्थ जुलाई 2023 से अगस्त 2025 तक मध्य प्रदेश सरकार में लीगल एडवाइजर रह चुका है और फरारी के दौरान केस को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था।
🔷'VIP ट्रीटमेंट' और पुलिस पर सवाल
ट्विशा के पिता के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि समर्थ सिंह को "VIP ट्रीटमेंट" दिया जा रहा था। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर इनाम घोषित हो और लुकआउट नोटिस जारी हो, वह अगर आराम से कोर्ट में बैठा मिले तो यह जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि समर्थ को जबलपुर में सरेंडर करने का कानूनी अधिकार नहीं था। उनके मुताबिक आरोपी को इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर या ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होना चाहिए था।
🔷डेडबॉडी रखने को लेकर भी विवाद
मामले में शव को सुरक्षित रखने को लेकर भी विवाद सामने आया।नवनिधि शर्मा ने कहा कि पुलिस जानबूझकर ऐसा माहौल बना रही है, जिससे परिवार जल्द से जल्द शव ले जाए।
उन्होंने दावा किया कि शव को सुरक्षित रखने के लिए माइनस 4 डिग्री तापमान पर्याप्त होता है और अमेरिका में भी इससे ज्यादा तापमान की जरूरत सामान्य तौर पर नहीं पड़ती। परिवार ने साफ कहा है कि वे "आखिरी सांस तक" दोबारा पोस्टमॉर्टम और निष्पक्ष जांच की लड़ाई लड़ेंगे।
🔷अब आगे क्या होगा?
अब इस केस की दिशा काफी हद तक तीन चीजों पर निर्भर करेगी:
- AIIMS की नई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट
- CBI जांच की औपचारिक शुरुआत
- हाईकोर्ट में जमानत रद्द करने की सुनवाई
फिलहाल यह मामला सिर्फ एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और हाई-प्रोफाइल मामलों में जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी बड़ा सवाल बन चुका है।














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