बच्चों की भूख के आगे बेबस हुई मां, गहने बेचकर खरीदा राशन और दवा, तमिलनाडु से लौटा था परिवार
कन्नौज। कोरोना महामारी में लॉकडाउन का अगर किसी पर सबसे बुरा असर पर पड़ा है तो वह प्रवासी मजदूर। इन मजदूरों से उनका काम छिन गया, रहने को छत नहीं और खाने को खाना नहीं है। देशभर के अलग-अलग राज्यों से यूपी, बिहार लौटे ऐसे तमाम श्रमिकों की कहानी है जो दिल को झकझोर देने वाली है। उत्तर प्रदेश के कन्नौज में भूख और बीमारी से तड़प रहे बच्चों की खातिर एक मां ने अपने गहने बेच दिए। लॉकडाउन में तमिलनाडु से लौटे प्रवासी परिवार को गांव में न मुफ्त राशन मिला और न ही कोई काम। अब परिवार अपना किसी प्रकार से गुजर बसर कर रहा है और सरकार से मदद की गुहार लगा रहा है।
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लॉकडाउन में बंद हुआ काम, मालिक ने भगाया
कन्नौज जिले के फत्तेहपुर जसोदा निवासी श्रीराम शादी के कुछ समय बाद पत्नी गुड्डी देवी को लेकर तमिलनाडु के किड्डलोर चला गया था। वहां वह करीब 30 साल से कुल्फी बेचने का काम कर रहा था। इससे पति, पत्नी और नौ बच्चों का गुजारा चल रहा था। लॉकडाउन में काम बंद होने से कमरा मालिक ने जबरन जगह खाली कराकर वहां से भगा दिया। 21 मई को श्रीराम पत्नी और बच्चों को लेकर ट्रेन से गांव लौट आया।
बच्चों की भूख के आगे बेबस हुई मां
भूमिहीन श्रीराम का यहां राशनकार्ड भी नहीं है। उसने बताया कि यहां आने के बाद राशन और रोजगार दोनों में दिक्क्त आई। काम न होने से परिवार के सामने भोजन तक का संकट खड़ा हो गया। बच्चे भूख और बीमारी से तड़पने लगे और कहीं से कोई मदद नहीं मिली तो पत्नी गुड्डी देवी ने अपने जेवर (पैरों में पहने जाने वाली तोड़िया) बेचने को दी। इन पैसों से राशन लाकर बच्चों को खाना खिलाया और दवा में खर्च कर दिया। अब जो काम मिल जाता है इससे ही जैसे तैसे खर्च चल रहा है।












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