जोधपुर का अनोखा परिवार, गाय-बछड़ों के साथ घर के अंदर रहते हैं, मानते हैं परिवार का सदस्य

जोधपुर, 03 जनवरी: हिंदू धर्म में गाय को माता और देवी का दर्जा प्राप्त है। धर्म-कर्म, पूजा-पाठ हो या देश की राजनीति, हर काम में गाय को बड़ी महत्वता दी जाती है। आज हम आपको राजस्थान के एक ऐसे परिवार से मिलाने जा रहे हैं, जिनके लिए उनकी तीन गायें कोई पशु नहीं बल्कि घर की सदस्य हैं। यहां गायों को किसी गौशाला में नहीं बल्कि घर के बेडरूम में रखा जाता है, उनके सोने के लिए बकायदा डल्लब के गद्दों वाला डबल बेड का इंतजाम भी किया गया है। आज से पहले आपने कभी गायों को मिलने वाली इस लग्जरी के बारे में ना तो सुना होगा, ना ही देखा होगा।

जोधपुर का अनोखा गोपालक परिवार

जोधपुर का अनोखा गोपालक परिवार

अब तक आपने घर में पलने वाले पालतू डॉग या फिर बिल्ली को घर में उछलकूद करते देखा होगा। यहां तक की ये पालतू जानवर घर की रसोई से लेकर बेड रूम तक में अपनी धमक बनाए रखते हैं। बेड पर सोने से लेकर हर वो ठाठ उनको मिलता है, जो घर के और सदस्यों के पास होते हैं, लेकिन राजस्थान की 'सन सिटी' जोधपुर में एक ऐसा गोपालक परिवार है, जो घर में पलने वाली गायों को परिवार का सदस्य मानता है। यहां गाय किसी बाड़े में नहीं बल्कि घर के अंदर खुली घूमती है। बेड पर आराम फरमाती हैं और एक दम अन्य घर के लोगों की तरह चादर ओढकर बिस्तर पर सोती हैं।

परिवार का गौवंशों से गहरा रिश्ता

परिवार का गौवंशों से गहरा रिश्ता

जी हां, आपको सुनने में थोड़ा अजीब लगा होगा, लेकिन यह हकीकत है। जोधपुर के गोपालक कहे या फिर गोप्रेमी इस परिवार ने अपने घर में पल रही गायों को सब छूट दें रखी हैं, जो परिवार के अन्य सदस्यों को है। जोधपुर के पाल रोड पर एम्स अस्पताल के पास रहने वाली संजू कंवर का परिवार पूरे इलाके में अपनी इस अनोखे काम को लेकर चर्चाओं में है। यहां गायों का बेडरूम में खेलने से लेकर बिस्तर पर आराम करने की पूरी आजादी है। उनके बकायदा पूरी व्यवस्था की गई है। यह फैमिली इंस्टाग्राम पर 'काउजबीलाइक (cowsblike)' नाम से एक पेज चलाती है, जिसमें गाय 'गोपी', बछड़ी 'गंगा' और बछड़ा 'पृथु' नाम की अपने गौवंशों की तस्वीरें और वीडियोज को अपलोड करते हैं।

पहली बार घर के अंदर आया था बछड़ा

पहली बार घर के अंदर आया था बछड़ा

वनइंडिया हिंदी से बात करते हुए परिवार से सदस्य अनंत सिंह ने बताया कि उनकी मां संजू कंवर को गौमाता के प्रति शुरू से बेहद प्रेम है। परिवार को गौपालन करते हुए काफी साल हो हुए, लेकिन कुछ 4 साल पहले घर में जब पहली बार गाय ने बछड़े को जन्म दिया तो उनका घर के अंदर लेकर आए थे, जिसके बाद वो घर में घूमने लगा। उनको देखने के बाद परिवार ने फैसला किया कि अब हमारी गाय हमारे साथ घर के अंदर ही रहेगी।

परिवार ने दी गायों को ट्रेनिंग

परिवार ने दी गायों को ट्रेनिंग

हालांकि अनंत सिंह ने बताया कि शुरुआत में थोड़ी परेशानी हुई, क्योंकि बेड पर ही वो मल-मूत्र त्यार कर देते, लेकिन फिर धीरे-धीरे उनका ट्रेनिंग दी गई तो उनका बेड से खड़ा करके एक जगह बांधा गया और जब वो गोबर कर देती तो उनका फिर खुला छोड़ दिया जाता। ऐसे में उनकी एक जगह फिक्स कर दी गई, जिसके बाद वो भी समझ गए कि अब उनका यहां अपना गोबर और मूत्र त्यागना है, जिसके बाद अब वो ऐसा ही करते हैं। अनंत सिंह ने आगे बताया कि घर ज्यादा बड़ा नहीं है, लेकिन फिर भी हमारे घर के सदस्य ( गोपी, गंगा और पृथु) हमारे साथ ही रहते हैं।

गाय 'गोपी', बछड़ी 'गंगा' और बछड़ा 'पृथु

गाय 'गोपी', बछड़ी 'गंगा' और बछड़ा 'पृथु

वनइंडिया को परिवार के सदस्य ने बताया कि वो घर में गाय सिर्फ अपने लिए पालते है, किसी तरह का डयरी का काम नहीं करते। अनंत सिंह के पिता प्रेम सिंह कच्छवाह सरकारी कर्मचारी है, जबकि माता संजू कंवर गृहणी हैं और गायों की पूरी देखरेख वो ही करती हैं। यहां तक की परिवार अपनी गायों के लिए अपना घर बेचकर उनके लिए बड़ी जगह लेने का प्लान बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी घर छोटा है तो बछड़ी और बछड़ा आराम से रह रहे हैं, लेकिन बड़े होने पर उनका परेशानी होगी। उन्होंने यह भी बताया कि लोग गाय को दूध देने के लिए पालते हैं, लेकिन बछड़ा होने के बाद उसको आवारा छोड़ देते है, लेकिन हम बछड़े पृथु का भी पूरा ध्यान रखते हैं।

नगर निगम की टीम ने पकड़ा था गायों को

नगर निगम की टीम ने पकड़ा था गायों को

वहीं पुरानी घटना का जिक्र करते हुए अनंत सिंह ने बताया कि एक बार उनकी गायों का नगर निगम की टीम ने पकड़ लिया था, जिसके बाद काफी परेशानी को झेलते हुए उन्होंने गायों का टीम से मुक्त कराया। इस परेशानी को झेलने के बाद उन्होंने फैसला किया था कि वो अपनी सभी गायों का घर के अंदर ही पालेगी। संजू कंवर ने अपना पूरा रूटिन बनाया हुआ है कि कब गायों का चारा देना हैं और कब उन्हें स्नान कराना है। ऐसे में अब यह परिवार पूरे इलाके में काऊ होम के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

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