ankit gupta jodhpur : जोधपुर की झील में 6 दिन बाद मिला कैप्टन का शव, इकलौते बेटे थे, 46 दिन पहले थी शादी
जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर की कायलाना झील (तखतसागर) में फंसे भारतीय सेना की दस पैरा यूनिट के कमांडो कैप्टन अंकित गुप्ता का शव छठे दिन मंगलवार को मिला है। सात जनवरी से भारतीय सेना की थल सेना, वायुसेना और नौसेना के विशेष गोताखोरों की टीम कैप्टन की तलाश में जुटी थी। कड़ी मशक्कत और लम्बे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद टीमें कैप्टन को ढूंढ पाई हैं।

कौन थे कैप्टन अंकित गुप्ता
बता दें कि कैप्टन अंकित गुप्ता मूलरूप से गुरुग्राम के रहने वाले थे। तीन साल पहले भारतीय सेना में भर्ती में हुए थे। अपने माता-पिता के इकलौते बेटे अंकित गुप्ता की 23 नवंबर को ही शादी हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही अंकित गुप्ता ड्यूटी पर लौट आए थे।

पत्थरों के बीच फंसा था कैप्टन का शव
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार छठे दिन दोपहर बाद उनका शव तखतसागर की गहराई में एक स्थान पर फंसा हुआ मिला। शव पत्थरों के बीच अटक गया था। इस कारण ऊपर नहीं आ पा रहा था। सेना ने फिलहाल इस बारे में कुछ भी जानकारी शेयर करने से इंकार कर दिया है। कैप्टन अंकित के शव को यहां से सीधे सेना अस्पताल ले जाया जा रहा है। उनके परिजनों को सूचना दे दी गई है। उन्हें भी सेना अस्पताल ले जाया जा रहा है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनका दाह संस्कार जोधपुर में किया जाएगा या गुरुग्राम में। परिजनों की इच्छा के अनुसार सेना फैसला करेगी।

कैसे शहीद हुए अंकित गुप्ता
बता दें कि भारतीय सेना की दस पैरा स्पेशल फोर्स सात जनवरी की दोपहर को जोधपुर की कायलाना झील में पूर्वाभ्यास कर रही थी, जिसमें कमांडो अंकित गुप्ता को अपने साथियों के साथ सेना के हेलिकॉप्टर से पानी में कूदकर डूबते हुए लोगों को बचाने का अभ्यास करना था। हेलिकॉप्टर से कूदने के बाद अंकित गुप्ता के साथी तो पानी से बाहर निकल आए थे और वे पानी में फंसे रहे गए। पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई और 12 जनवरी को उनका शव निकाला जा सका है।

अंकित गुप्ता की तलाश में क्यों लगा इतना वक्त
बता दें कि जोधपुर शहर से करीब दस किलोमीटर दूर स्थित कायलाना झील जो तखतसागर के नाम से भी जानी जाती है। इसकी 61 फीट है। हादसे वाले दिन इनमें 46 फीट पानी भरा हुआ था। झील में अंकित गुप्ता की तलाा में दिक्कत यह थी कि झील का पानी धुंधला था। इसमें काई जमी हुई थी। सर्दी की वजह से गोताखोर ज्यादा देर तक पानी में रहकर तलाश नहीं कर पा रहे थे। इसके अलावा झील का पैंदा समतल ना होकर पहाड़ी है।












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