चारा घोटाले का पांचवां केस क्या है ? जिसमें लालू यादव को हुई है 5 साल की सजा, सबकुछ जानिए

रांची, 21 फरवरी: लालू यादव को चारा घोटाले के पांचवें केस में भी 5 साल की सजा हो गई है। रांची की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने उनपर 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके बाद लालू की ओर से जमानत अर्जी दाखिल किए जाने की संभावना है और ज्यादा उम्र, कई बीमारियां और पहले मामले में आधी सजा काट चुके होने के तर्कों के साथ उन्हें बेल दिए जाने की गुहार लगाई जाएगी। आइए जानते हैं कि सोमवार को जिस पांचवें मामले में उन्हें सजा मिली है, वह क्या है और इससे पहले उन्हें किन मामलों में सजा मिल चुकी है और आगे किन मामलों की सुनवाई चल रही है।

चारा घोटाले का पांचवां केस क्या है ?

चारा घोटाले का पांचवां केस क्या है ?

1990 के दशक में तत्कालीन बिहार में शुरुआती करीब 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले के खुलासे से देश की राजनीति में भूचाल आ गया था। क्योंकि, उस समय लालू यादव बिहार (झारखंड के गठन से पहले) के मुख्यमंत्री थे और केंद्रीय राजनीति में भी उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल की बहुत बड़ी भूमिका थी। यह केस राज्य सरकार के विभिन्न सरकारी कोषागारों (ट्रेजरी) में हुए घोटाले से जुड़ा है और पहले चार मामलों में लालू सजायाफ्ता मुजरिम हैं और पांचवां केस झारखंड की मौजूदा राजधानी रांची की डोरंडा ट्रेजरी से जुड़ा हुआ है। इस मामले में लालू यादव को सरकारी खजाने से 139.35 करोड़ की अवैध निकासी में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दोषी पाए जाने के बाद 5 साल की सजा सुनाई गई है और 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

राजद सुप्रीमो को किन धाराओं में दोषी पाया गया है ?

राजद सुप्रीमो को किन धाराओं में दोषी पाया गया है ?

रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव को आईपीसी की धारा 120बी, 420, 409, 467, 468, 471, 477ए के अलावे भ्रष्टाचार निरोधक कानून, 1988 की 13 (1), 13 (2)सी की धाराओं के तहत दोषी पाया है। रांची की स्पेशल सीबीआई अदालत ने पिछले 15 फरवरी को ही उन्हें इन धाराओं के तहत गुनहगार पाया था, जिस मामले में सोमवार को उन्हें सजा सुनाई गई है। दोषी करार दिए जाने के बाद उनकी ओर से सेहत का हवाला दिए जाने के बाद उन्हें रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान या रिम्स में भर्ती किया गया था।

चारा घोटाले का खुलासा कब और कैसे हुआ ?

चारा घोटाले का खुलासा कब और कैसे हुआ ?

बिहार के चारा घोटाले का सबसे पहला खुलासा 27 जनवरी, 1996 को चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम) जिले (अब झारखंड में) में पशुपाल विभाग के ऑफिस में छापेमारी के दौरान हुआ था। इस घोटाले का खुलासा तेजतर्रार आईएएस (रिटायर्ड) अफसर अमित खरे (अब पीएम मोदी के सलाहकार) ने किया था, जो उस वक्त पश्चिम सिंहभूम के डिप्टी कमिश्नर थे। आगे चलकर यह बिहार का सबसे बड़ा स्कैम साबित हुआ। इस घोटाले में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव की भूमिका सामने आई थी। शुरू में राज्य सरकार यह केस सीबीआई को देने के लिए तैयार नहीं थी, लेकिन बाद में पटना हाई कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच शुरू हुई थी। तब से लेकर सीबीआई और लालू यादव के बीच कानूनी जंग आज भी जारी है। इसी घोटाले की वजह से ही उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी और उन्होंने तब अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का सीएम बना दिया था।

लालू के पास आगे क्या है कानूनी रास्ता ?

लालू के पास आगे क्या है कानूनी रास्ता ?

रांची स्पेशल सीबीआई कोर्ट से सजा मिलने के बाद लालू यादव के वकील झारखंड हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं, जैसा कि वो हर मामलों में कानूनी विकल्प का भरपूर लाभ लेते रहे हैं। उनकी उम्र 73 साल है और इसके साथ ही उनकी बीमारियों का हवाला देकर उनकी सजा कम करने की अदालत से गुहार लगाई जा सकती है। लालू के वकील ने सीबीआई कोर्ट में भी उनकी उम्र का हवाला सजा की मियाद तय होने के दौरान दिया।

कितने केस में लालू साबित हो चुके हैं दोषी ?

कितने केस में लालू साबित हो चुके हैं दोषी ?

डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी केस से पहले लालू यादव इस घोटाले के चार मामलों में पहले ही दोषी साबित हो चुके हैं। 15 फरवरी तक पांचवें केस में दोषी करार दिए जाने से पहले वह जमानत पर जेल से बाहर थे, क्योंकि उन्होंने पहले केस में आधी सजा पूरी कर ली हुई है। झारखंड की दुमका ट्रेजरी घोटाले में अदालत ने उन्हें सात साल की सजा सुनाई थी और साढ़े तीन साल की सजा काटने के बाद तकनीकी आधार पर उन्होंने जमानत ले ली थी। इसके अलावा उन्हें झारखंड के चाईबासा और देवघर ट्रेजरी से अवैध निकासी मामले में भी सजा मिली हुई है।

किन मामलों में लालू के खिलाफ जारी है सुनवाई ?

किन मामलों में लालू के खिलाफ जारी है सुनवाई ?

रांची केस (डोरंडा) लालू यादव के चारा घोटाले के कारनामे का आखिरी केस नहीं है। बिहार की राजधानी पटना की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में अभी उनके खिलाफ अवैध निकासी के और मामलों की भी सुनवाई चल रही है। ये मामले भी बिहार के भागलपुर और बांका कोषागार से पशु चारा के नाम पर लाखों रुपये की अवैध निकासी से जुड़े हुए हैं।

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