शापित राजा के किले पर हर साल आसमान से गिरती है बिजली, खड़े खंडहर विषैले जीवों का बसेरा
रांची। भारत किले-महलों का देश है। यहां अमेरिका जैसे बड़े-बड़े बीच और यूरोप जैसे फुलियारे मैदान न सही, लेकिन यहां के किले और महल दुनियाभर के लोगों को आकर्षित करते हैं। हर किले का अपना-अलग इतिहास है और कुछ अलग ही कहानियां। Oneindia.com की सीरीज 'किले-महलों की सैर' के जरिए हम आपको अपना देश घुमाते रहे हैं। इस बार बता रहे हैं झारखंड के एक ऐसे किले के बारे में, जहां हर साल बिजली गिरती है। वज्रपात के कारण वहां कोई नहीं रहता और खंडहर ही खड़े रह गए हैं। जिनमें विषैले जीव-जंतुओं का बसेरा है। लोग कहते हैं कि, वह जगह शापित है...

रांची के निकट राजा जगतपाल सिंह का किला
आप देख रहे हैं झारखंड में राजधानी रांची से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर पिठौरिया के किलों के खंडहर। पिठौरिया मुंडा एवं नागवंशी राजाओं का केंद्र रहा है। मगर, मौजूदा परिसर आधुनिक भारत का ही एक नमूना है। बताया जाता है कि, 1831-32 के समय कोल विद्रोह के दौरान यह जगह सत्ता का केंद्र बनी। इस तरह इसका इतिहास 200 वर्ष पुराना है। यहां पिठौरिया के राजा जगतपाल सिंह थे। उनके पास 84 गांवों की जागीर थी। उन्होंने अपनी प्रजा की भलाई के लिए खूब काम किए, लेकिन एक गलती ने उन्हें खलनायक बना दिया।

अंग्रेजों को संरक्षण देने पर हुई राजा की बर्बादी
आरयू के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. बीपी केसरी के मुताबिक, जब अंग्रेज भारत आए थे तो उन्हें छोटा नागपुर की भौगोलिक स्थिति के कारण अपने पैर पसारने में परेशानी हो रही थी। ऐसी स्थिति में अंग्रेज आॅफिसर थॉमस विल्किंसन ने यहां के राजा जगतपाल से हाथ मिलाया। जगतपाल अंग्रेजों की मदद करने लगे। कुछ वर्षों बाद 1857 का विद्रोह हुआ तो ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने अंग्रेजों की हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए आक्रमण करने चाहे। तब भी जगतपाल सिंह ने पिठौरिया घाटी को पत्थरों से बंद करके अंग्रेजों की रक्षा की। ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के परपोते ठाकुर नवीननाथ शाहदेव बताते हैं कि, जगतपाल सिंह ने अपने ही देश के लोगों को अंग्रेजों के हाथों मरने दिया।

हर साल गिरती है बिजली, कोई नहीं रहता यहां
बकौल ठाकुर नवीननाथ शाहदेव, "जगतपाल की गवाही के कारण ही मेरे परदादा ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को फांसी हुई थी। मेरे परदादा ने मरने से पहले जगतपाल को बद्दुआएं दीं कि तुम्हारा वंश नष्ट हो जाएगा। जो किला है वो तबाह हो जाएगा और वहां वज्रपात होगा।"

बरसात के दिनों होता आ रहा सालों से वज्रपात
कहा जाता है कि तब से जगतपाल की बर्बादी शुरू हो गई। उनके किले पर आसमान से बिजली गिरी। बरसात के दिनों में यहां सालों से वज्रपात होता आ रहा है। जिसे क्रांतिकारियों का शाप का नतीजा कहा जाता है।

खंडहर की जगह पर ही थे 100 कक्ष
स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि, किसी जमाने में यहां 100 कक्षों वाला किला होता था। शाप की वजह से अब बस खंडहर खड़े रह गए हैं। हर साल इस किले पर आसमानी बिजली गिरती है और उससे पेड़ उखड़ जाते हैं। आग भी लग जाती है।












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