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खाओ खिलाओ और हिट हो जाओ: झारखंड की गृहिणियों के सपनों को मिला आसमान, रसोई से शुरू हुई पहचान की उड़ान

किसी ने सच कहा है कि सपने पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती है। झारखंड जैसे जनजातीय प्रदेश में जहां संसाधनों के अभाव में सपने पलने से पहले ही दम तोड़ देते हैं वहां ये आधी आबादी और खासकर गृहणियों के सपनों को उड़ान देना अत्यंत कठिन हो जाता है। वन और खनिज संपदाओं से भरपूर लेकिन आधुनिक सुविधाओं के संकट से जूझते प्रदेश झारखंड के दूरदराज़ के गांवों में रहने वाली महिलाओं के लिए अपनी पहचान बनाना एक चुनौती रहा है। फिलहाल इसी चुनौतीपूर्ण काम को अंजाम दे रही है आईटीसी सनराइज मसाले के सौजन्य से चलने वाली प्रतियोगिता "खाओ, खिलाओ और हिट हो जाओ"।

ITC सनराइज मसाले की 'खाओ खिलाओ और हिट हो जाओ' मुहिम ने इन गृहिणियों को अपने सपनों को साकार करने का सुनहरा मौका दिया है। इस अनूठी पहल ने न केवल उन्हें एक मंच प्रदान किया है, बल्कि उनके अंदर छिपी प्रतिभा को भी बाहर लाने का काम किया है। यह अभियान झारखंड की महिलाओं को अपनी पसंदीदा रेसिपी साझा करने का मौका देता है। इसमें भाग लेने वाली महिलाएं अपनी पारंपरिक रेसिपी को आधुनिक तड़का लगाकर प्रस्तुत करती हैं और हर हफ्ते कुछ चुनिंदा विजेताओं को पुरस्कार दिए जाते हैं। यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि एक मंच है जहां ये महिलाएं अपनी कला और रसोई कौशल को दुनिया के सामने लाती हैं।

Khao Khilao hit ho jao

खान-पान से पहचान तक का सफर

'खाओ खिलाओ और हिट हो जाओ' अभियान के तहत घर की चारदीवारी में सीमित रहने वाली महिलाओं को न केवल अपने कुकिंग टैलेंट का प्रदर्शन करने का मौका मिलता है, बल्कि उन्हें सोशल मीडिया पर एक पहचान भी मिलती है। हर विजेता को ITC सनराइज की ओर से आकर्षक पुरस्कार दिए जाते हैं, जो न केवल उन्हें प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि उनकी प्रतिभा को पहचानने का भी जरिया बनते हैं।

इस अभियान का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये महिलाएं अपने गांव से बाहर निकलकर एक व्यापक पहचान बना रही हैं। उनके द्वारा प्रस्तुत रेसिपी सोशल मीडिया पर शेयर होती हैं और उन्हें बड़े पैमाने पर सराहना मिलती है। यह उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने का जरिया भी बनता है।

झारखंड की संस्कृति और स्वाद का संगम

इस मुहिम ने झारखंड की पारंपरिक रेसिपियों को भी देश के विभिन्न हिस्सों में पहचान दिलाई है। पारंपरिक व्यंजनों को संरक्षित या प्रचारित करने की एक चुनौति यह होती है कि उनके लिये पारंपरिक सामग्री भी सहज उपलब्ध होना चाहिए। पारंपरिक मसालों की उपलब्धता इस समय एक कठिनाई की तरह है। लोगों के पास इतना समय नहीं है कि प्रकृति की गोद से स्वयं मसाले उठा लाएं और उसको कूटें, पीसें, तैय्यार करें, उसका संतुलित मिश्रण बनाएं और सुरक्षित रखें।

दूसरी तरफ पैकेटबंद मसालों पर भरोसा करना भी मुश्किल। पता नहीं किस मात्रा में और कैसी सामग्री का उपयोग हुआ होगा। आईटीसी सनराइज मसाले इसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है। प्राकृतिक मसालों को बिना किसी केमिकल, बिना किसी प्रीजर्वेटिव के उपयुक्त मात्रा में लाजवाब मिश्रन तैय्यार करता है और उसे पहुंचाता है झारखंड की रसोई में ताकि गृहणियों के सपने साकार हो सकें और प्रदेश को हो अपने व्यंजनों पर गर्व।

आईटीसी सनराइज का "खाओ, खिलाओ और हिट हो जाओ" प्रतियोगिता दरअसल एक ऐसी अवधारणा है जिससे झारखंड की पहचान रहे पारंपरिक व्यंजनों को नए कलेवर में सहेजने का आधार मिलता है। यहां की महिलाएं अपनी पुरानी रेसिपियों में नए-नए एक्सपेरिमेंट्स करती हैं, और उनकी प्रस्तुतियां एक से बढ़कर एक होती हैं। इससे न केवल उनकी रसोई कौशल में सुधार होता है, बल्कि उनके परिवार और समाज में भी उनका सम्मान बढ़ता है।

सपनों को लगे पंख
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर 'फुड बाय अदिति' नाम से पेज चलाने वाली अदिति आज एक नामी फुड इंफ्लुएंसर बन चुकी हैं। आप इनके पेज पर देख सकते हैं कि किस प्रकार ये न केवल घुघनी, धुस्का, मिर्च-पकौड़ा जैसे झारखंड के विरासती व्यंजन बल्कि मैगी, उत्पम, पनीर-हांडी और मशरूम मसाला जैसे आधुनिक व्यंजनों में भी सनराइज मसाले की उपयोग से नया स्वाद भरकर आज के डिजिटल युग में अपना अलग मुकाम बना चुकी हैं। आज अदिति के परिवार, समाज और प्रदेश को अदिति के रसोई-कौशल पर वास्तव में गर्व है।

इसी तरह की एक और कहानी है प्रदेश की राजधानी रांची में रहने वाली अनिता गुप्ता और छवि गुप्ता की। इंस्टाग्राम पर योर रेगुललर मॉम के नाम से पोपुलर इस इंफ्लुएंसर डुओ के वाल पर आपको इनकी जीवंतता के कई शेड्स मिलेंगे। त्यौहार, बैठक, घर-परिवार से लेकर रसोई तक। शायद ये गुप्ता सिस्टर्स भी झारखंड या किसी भी अन्य प्रदेश की गृहणियों की तरह अपने घर-संसार में खो कर ही रह जाती लेकिन खालो, खिलाओ कैंपेन ने इनके सपने को नए पंख दे दिए। इनकी कामयाबी का आलम ये है कि दुनिया भर में प्रतिष्ठित फोर्ब्स मैगजिन भी भी इन्हें डिजिटल स्टार्स मानता है।

'खाओ खिलाओ और हिट हो जाओ' अभियान सिर्फ कुकिंग प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बन चुका है। इसमें भाग लेने वाली महिलाओं ने अपनी घरेलू ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ अपने सपनों को भी नई दिशा दी है। इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही मंच और प्रोत्साहन मिले, तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं। ITC सनराइज के इस अनूठे अभियान ने झारखंड की गृहिणियों को ना केवल एक मंच दिया है, बल्कि उन्हें समाज में एक नई पहचान दिलाई है। अब ये महिलाएं किचन के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी अपनी धाक जमा रही हैं।

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