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झारखंड चुनाव: बेटे-बेटी और पत्नियों का सियासी डेब्यू कराने में जुटे दिग्गज नेता, जानिए कौन-कौन बनेगा उम्मीदवार

Jharkhand Assembly Elections 2024: झारखंड विधानसभा चुनाव में वंशवाद की राजनीति का नया चलन सामने आ रहा है। राज्य के कई सांसद, विधायक, मंत्री और नेता अपने बेटे, बेटियों और पत्नियों को चुनाव में उम्मीदवार बनाने की तैयारी में हैं।

आगामी चुनावों में झारखंड के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में कई जाने-पहचाने नाम अपने परिवारों में अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते नजर आएंगे। इसको लेकर पार्टी टिकट के लिए लॉबिंग शुरू हो चुकी है। कुछ सीटों पर तो पिता और बेटे ने एक ही सीट के लिए अपनी दांवेदारी ठोकी है।

Jharkhand Assembly Elections 2024

झारखंड में ऐसे कई दिग्गज नेता हैं, जो अपने परिवार और रिश्तेदारों को टिकट दिलाने की होड़ में लगे हैं। आइए जानें कौन-कौन बनेगा उम्मीदवार?

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चम्पाई सोरेन के बेटे बाबूलाल कहां से लड़ेंगे चुनाव?

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन 30 अगस्त को अपने बेटे बाबूलाल सोरेन के साथ भाजपा में शामिल हो गए। बाबूलाल के कोल्हान संभाग की किसी सीट से चुनाव लड़ने की उम्मीद है।

खबरों के मुताबिक भाजपा नेतृत्व ने चम्पाई सोरेन को इस बात का भरोसा दिलाया है। कहा जा रहा है कि कोल्हान प्रमंडल में सरायकेला की उनकी परंपरागत सीट पर चम्पाई की जगह उनके बेटे बाबूलाल सोरेन को उतारा जाएगा। नहीं तो भी फिर दोनों को आसपास की सीटों पर उम्मीदवार बनाया जाएगा।

मंत्री रामेश्वर उरांव के बेटे की भी हो सकती है चुनाव में एंट्री

कांग्रेस कोटे से मौजूदा कैबिनेट में वरिष्ठ मंत्री रामेश्वर उरांव लोहरदगा से चुनाव लड़ते हैं। 77 साल की उम्र में उनका टिकट कट सकता है। वे अपने बेटे रोहित उरांव को टिकट दिलाने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं।

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत के बेटे भी राजनीति में आने को तैयार

इसी तरह कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत चाहते हैं कि उनके बेटे अभिनव भगत भी इसी सीट से चुनाव लड़ें। अभिनव युवा कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हैं और उन्होंने उम्मीदवारी के लिए अपना बायोडाटा जमा कर दिया है।

सीता सोरेन की बेटी जयश्री को भाजपा दे सकती है टिकट

संथाल परगना प्रमंडल की जामा सीट से तीन बार जेएमएम से विधायक रहीं सीता सोरेन अब बीजेपी में हैं। वे चाहती हैं कि उनकी बेटी जयश्री सोरेन को इस सीट से बीजेपी का टिकट मिले। हालांकि बीजेपी के सामने दुविधा यह है कि पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे सुरेश मुर्मू का भी इस सीट पर मजबूत दावेदारी है।

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ढुल्लू महतो पत्नी और बेटे को टिकट दिलाने की कोशिश में

धनबाद जिले के बाघमारा से भाजपा के पूर्व विधायक और अब सांसद ढुल्लू महतो अपनी पत्नी सावित्री देवी या बेटे प्रशांत कुमार को खाली विधानसभा सीट से टिकट दिलाने की पैरवी कर रहे हैं।

भाजपा विधायक इंद्रजीत महतो भी पत्नी को दिलाना चाहते हैं टिकट

धनबाद जिले के सिंदरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक इंद्रजीत महतो साढ़े तीन साल से गंभीर रूप से बीमार और बिस्तर पर हैं। अब उनकी पत्नी तारा देवी इस सीट से उम्मीदवारी की दावेदारी कर रही हैं।

सांसद जोबा मांझी के बेटे भी उतर सकते हैं चुनावी मैदान में

झामुमो की पूर्व विधायक जोबा मांझी चाईबासा से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंची हैं। उनके बेटे उदय मांझी को कोल्हान प्रमंडल की मनोहरपुर सीट से झामुमो के टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

स्टीफन मरांडी की बेटी भी राजनीति में आने की तैयारी में

झामुमो नेता और महेशपुर सीट से विधायक स्टीफन मरांडी अपनी बेटी उपासना मरांडी को राजनीति में उतारना चाहते हैं और अपनी जगह उन्हें मैदान में उतार सकते हैं।

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रामचंद्र चंद्रवंशी बेटे को सौंपेंगे अपनी विरासत, ​​ददई दुबे का बेटा भी कतार में

पलामू जिले के विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रामचंद्र चंद्रवंशी अपनी राजनीतिक विरासत अपने बेटे ईश्वर सागर चंद्रवंशी को सौंपना चाहते हैं। ईश्वर सागर पहले से ही क्षेत्र में सक्रिय हैं।

विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक रह चुके वरिष्ठ कांग्रेस नेता चंद्रशेखर दुबे उर्फ ​​ददई दुबे ने घोषणा की है कि उनके बेटे अभय दुबे उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी होंगे और विश्रामपुर से चुनाव लड़ेंगे। संभावना है कि कांग्रेस उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए यहां से अभय दुबे को मैदान में उतारेगी।

उमाशंकर अकेला और कमलेश सिंह अपने-अपने बेटे को करेंगे लॉन्च

हजारीबाग जिले के बरही विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक उमाशंकर अकेला अपनी विरासत अपने बेटे रविशंकर अकेला को सौंपने की योजना बना रहे हैं। पिता और पुत्र दोनों ने पार्टी में उम्मीदवारी के लिए आवेदन जमा कर दिया है।

हजारीबाग जिले के बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र में एनसीपी के पूर्व मंत्री कमलेश सिंह अपनी राजनीतिक विरासत अपने बेटे सूर्य सिंह को सौंपना चाहते हैं। पिछले साल एक कार्यक्रम में उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी इस इच्छा का ऐलान भी किया था।

इंदर सिंह नामधारी और निर्मला बेसरा के बेटे में चुनाव में करेंगे एंट्री

दिग्गज राजनेता इंदर सिंह नामधारी डाल्टनगंज निर्वाचन क्षेत्र से पांच बार विधायक रह चुके हैं और बिहार सरकार में मंत्री और झारखंड विधानसभा अध्यक्ष के पद पर रह चुके हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने अपने बेटे दिलीप सिंह नामधारी को मैदान में उतारा था, जिन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार उनके फिर से चुनाव लड़ने की उम्मीद है।

निर्मल बेसरा के बेटे श्रद्धानंद बेसरा पिछली बार सिमडेगा सीट से भाजपा के बैनर तले चुनाव लड़े थे, लेकिन कुछ सौ वोटों से हार गए थे। इस बार भी वे टिकट के प्रबल दावेदार हैं।

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