Jharkhand IAS Officer ED की गिरफ्त में, सरकार ने निलंबित किया, करोड़ों के जमीन 'घोटाले' का मामला
Jharkhand IAS Officer कथित जमीन घोटाला मामले में कड़ी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार आईएएस छवि रंजन को पहले ED ने अरेस्ट किया। अब सरकार ने इन्हें सस्पेंड कर दिया है।

सरकार ने कथित भूमि घोटाले के मामले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी छवि रंजन को निलंबित कर दिया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को छवि रंजन को गिरफ्तार किया था।
शनिवार को सरकार ने रंजन को सस्पेंड कर दिया। ईडी द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उन्हें अरेस्ट किया है। आईएएस छवि रंजन, वर्तमान में समाज कल्याण विभाग, झारखंड के निदेशक के रूप में पदस्थापित थे।
सरकार के आदेश में कहा गया, पीएमएलए कानून 2002, की एंटी मनी लॉन्ड्रिंग की धारा-19 के तहत गिरफ्तार किए जाने के आलोक में छवि रंजन को अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के नियम -3 (3) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
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आईएएस छवि रंजन समाज कल्याण, झारखंड (अतिरिक्त प्रभार - निदेशक, सामाजिक सुरक्षा, झारखंड, रांची और राज्य विकलांगता आयुक्त, झारखंड, रांची) के कार्यालय में काम कर रहे थे।
निलंबन से पहले आज, कथित भूमि घोटाले के मामले में गिरफ्तार छवि रंजन को 6 दिन की प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया गया। रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने आईएएस अधिकारी को एक दिन की न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद ईडी की हिरासत में भेज दिया।
ईडी ने गुरुवार को आईएएस अधिकारी छवि रंजन को रांची में अवैध रूप से जमीन हड़पने और बेचने से जुड़े एक जमीन घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया है। छवि रंजन पहले कथित भूमि घोटाले के मामलों में पूछताछ के लिए कई बार ईडी के सामने पेश हो चुके हैं।
इस सिलसिले में ईडी ने उनके रांची स्थित आवास समेत पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में कई जगहों पर छापेमारी भी की थी। सूत्रों के मुताबिक, आईएएस अधिकारी ने रांची के डिप्टी कमिश्नर के रूप में सेवा करते हुए कथित तौर पर कोलकाता रजिस्ट्री कार्यालय का इस्तेमाल सेना की भूमि मामले में जालसाजी के लिए किया था।
ईडी के जमीन घोटाले मामले में अब तक सात आरोपी व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्हें अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। घोटाले कथित तौर पर उस समय हुए जब छवि रंजन रांची के उपायुक्त के रूप में पदस्थापित थे।
ईडी के मुताबिक, इस मामले में एक सांठगांठ चल रही है जिसने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज बनाकर कई प्लॉट बेचे थे। ईडी के सूत्रों ने कहा कि यहां तक कि असली मालिक भी इस बात से अनजान हैं कि उनके प्लॉट बेचे जा चुके हैं।












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