Jharkhand Chunav: झारखंड की राजनीति के उभरते 'टाइगर', जयराम महतो किसकी लुटिया डुबोएंगे?

Jharkhand Chunav 2024: झारखंड चुनाव में इसबार एक नए 'टाइगर' की खूब चर्चा हो रही है। ये हैं झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के जयराम महतो। अपने समर्थकों के बीच वह 'टाइगर जयराम महतो' के नाम से लोकप्रिय हैं। हम इन्हें झारखंड की राजनीति का नया 'टाइगर' इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री और जेएमएम से बीजेपी में आए चंपाई सोरेन पहले से ही 'कोल्हान टाइगर' के तौर पर मशहूर हैं।

कौन हैं 'टाइगर' जयराम महतो?
झारखंड की कोयला नगरी धनबाद जिले के रहने वाले जयराम महतो की इतनी चर्चा जनवरी 2022 से पहले शायद ही कभी हुई थी। तब 30 वर्षीय युवा नेता ने राज्य सरकार की ओर से भोजपुरी और मगही को क्षेत्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने के खिलाफ इन्होंने प्रदेश में झारखंड भाषा अभियान शुरू किया था।

jharkhand election

झारखंड भाषा आंदोलन और प्रदेश के लोगों के अधिकारों का मुद्दा उठाकर वे शुरू में धनबाद और आसपास के इलाकों में लोकप्रिय होने शुरू हो गए। उनकी लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तब से दो साल बाद यानी इस साल हुए लोकसभा चुनावों में उन्हें पड़ोस की गिरिडीह लोकसभा सीट पर 3,00,000 लाख से ज्यादा वोट मिल गए।

गिरिडीह लोकसभा सीट पर मिले 3,47,322 वोट
2024 के लोकसभा चुनावों में जयराम महतो ने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) नाम की एक नई पार्टी बनाई थी। उन्होंने प्रदेश की 14 लोकसभा सीटों में से 8 पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। जिस गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र में जयराम कुमार महतो को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर 3,47,322 वोट मिले, उसमें वह तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें इस लोकसभा क्षेत्र के दो सीटों पर बढ़त मिली।

झारखंड में 69 सीटों पर लड़ रही है JLKM
आज उनकी लोकप्रियता की स्थिति ऐसी है कि बारिश में भी उन्हें सुनने के लिए समर्थक डटे नजर आते हैं। तमार विधानसभा क्षेत्र के जोजोडीह गांव के एक किसान हिकिम महतो ने ईटी से बातचीत में उनके बारे में बताया, 'वह हमारे लिए बोलते हैं और इसलिए लोग उन्हें बारिश में भी सुनने को तैयार रहते हैं।'

खुद जयराम कहते हैं, '(लोकसभा चुनावों में) सभी 8 सीटों पर हमें करीब 9 लाख वोट मिले। यह तो सिर्फ शुरुआत थी, हमारी मौजूदगी विधानसभा चुनावों में दिखाई पड़ेगी।' इस विधानसभा चुनाव में महतो खुद डुमरी और बेरमो सीटों से लड़ रहे हैं और उनकी पार्टी राज्य की 81 सीटों में से 69 पर मैदान में है।

कुर्मी जाति के उभरते नेता बन रहे हैं जयराम महतो
जयराम महतो कुर्मी जाति से हैं। राज्य में इसकी आबादी करीब 15% बताई जाती है, जो आदिवासियों के बाद सबसे ज्यादा है। पड़ोस के बिहार में इससे कहीं कम आबादी के बावजूद इसी जाति से ताल्लुक रखने वाले नीतीश कुमार लगभग दो दशकों से प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर काबिज हैं।

इस बार के झारखंड विधानसभा चुनावों में खासकर के कुर्मी जाति के एक वर्ग के बीच उन्हें समर्थन मिलता दिख रहा है। मसलन, खरसांवां के हंथी टांड में चाय की दुकान चलाने वाले गुलाब महतो कहते हैं, 'हमने सबको देख लिया। इस बार हमारा लड़का चुनाव लड़ रहा है। हम चाहते हैं कि उसे एक मौका दें।'

हम एक नया विकल्प देना चाहते हैं- जयराम महतो
हालांकि, खुद जयराम का दावा है कि सिर्फ कुर्मियों के बीच ही नहीं, उन्हें सभी समुदायों का समर्थन मिल रहा है। उनके मुताबिक, 'रांची में हमारे लोकसभा उम्मीदवार को 1,32,000 वोट मिले। बिना सभी समुदायों के समर्थन से यह कैसे संभव है?' हालांकि, गठबंधन को लेकर वह यही दावा करते हैं कि वे एनडीए और इंडिया ब्लॉक दोनों से दूर रहना चाहते हैं।

उनका कहना है, 'राज्य के लोगों को हम एक नया विकल्प देना चाहते हैं। नतीजे आने दीजिए और ये चीजें बाद में देखी जा सकती हैं। हमारी विचारधारा झारखंड के लोगों का विकास है।'

बीजेपी गठबंधन के लिए जयराम महतो साबित हो सकते हैं चुनौती
जहां तक जातीय गोलबंदी के हिसाब से वोट बैंक में सेंध लगने के खतरे की आशंका है तो इस मायने में एनडीए के लिए झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा चिंता की लकीर लग रही है। क्योंकि, बीजेपी की सहयोगी ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) के नेता सुदेश महतो के लिए भी यह सीधी चुनौती है और उसने वोट का विभाजन रोकने के लिए जेडीयू को जो 2 सीटें दी हैं,उसकी सफलता पर भी प्रश्नचिन्ह लग सकता है।

हालांकि, प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा का कहना है, 'कुछ क्षेत्रों में जयराम महतो का हो सकता है प्रभाव हो और राजनीति में चमकने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, उनकी राजनीति जाति समूहों में लोगों को बांटने की है। वह सफल नहीं होंगे, क्योंकि बीजेपी लोगों की एकता की बात करती है।'

जयराम को इसी चुनाव में हेमंत सोरेन दे चुके हैं झटका
वैसे जेकेएलएम ने अपनी उम्मीदवारों की लिस्ट संतुलित रखने की कोशिश की है। इसी कड़ी में उसने गांडेय से अकील अख्तर उर्फ रिजवान क्रांतिकारी को उतारा था। वे पार्टी के मुस्लिम चेहरा और जयराम के करीबी दोस्त भी थे। लेकिन, पिछले गुरुवार को वे अचानक सीएम हेमंत सोरेन की मौजूदगी में जेएमएम में शामिल हो गए। अच्छी-खासी मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन पार्टी उम्मीदवार हैं।

इसे भी पढ़ें- 'झारखंड की बहन-बेटियों के साथ घुसपैठियों ने अन्याय किया, हेमंत सरकार शह देती है', घाटशिला में बरसे अमित शाह

वैसे जयराम सियासत में भले ही नए हैं, लेकिन चुनावी राजनीति के सारे दांव सोच-समझकर चलने की कोशिश करते दिख रहे हैं। उनका दावा है, 'सभी लोग हमें निशाना बना रहे हैं। उनके पास सत्ता और पैसा है। हमें जनता का समर्थन है। हम डरने वाले नहीं हैं और न ही कोई हमें रोक सकता है।'

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+