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Jharkhand: बांग्लादेशी घुसपैठ पर ST पैनल की चौंकाने वाली रिपोर्ट, चुनाव में बढ़ाएगी हेमंत सोरेन की मुश्किलें?

Jharkhand Bangladeshi infiltration: झारखंड में विधानसभा चुनावों से पहले 'अवैध घुसपैठियों' का मुद्दा सुर्खियों में है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्तारूढ़ हेमंत सोरेन सरकार पर इस "बांग्लादेशी घुसपैठ" को लेकर हावी है। इसी क्रम में एक और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपी एक रिपोर्ट में अब दावा किया है कि झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में ''बांग्लादेशी घुसपैठ'' हो रही है और इस कारण से क्षेत्र की जनसांख्यिकी में काफी बदलाव आया है। आयोग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।

Jharkhand Bangladeshi infiltration

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यह रिपोर्ट राज्य में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र की बदलती जनसांख्यिकी को लेकर चल रही राजनीति के बीच आई है। सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रमुख और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सीट बरहेट संथाल परगना क्षेत्र के तहत ही आती है। ऐसे में इस रिपोर्ट का आना हेमंत सोरेन के शासन पर कई सवाल खड़े कर रहे हैं।

'ऐसा लगता है दो दशकों से घुसपैठिए आ रहे हैं...'

द हिंदू के मुताबिक एनसीएसटी की सदस्य और रिपोर्ट लिखने वाली टीम का नेतृत्व करने वाली आशा लकड़ा ने बताया कि उनकी जांच ने इस बात की पुष्टि की है कि घुसपैठ हो रही है। उन्होंने अपनी 28 पन्नों वाली रिपोर्ट में इसके कथित साक्ष्य दर्ज किए हैं, जो काफी हद तक पड़ोसियों, पंचायत सदस्यों और ग्रामीणों के साथ बातचीत से एकत्र की गई वास्तविक सामग्री पर आधारित है।

आशा लकड़ा खुद झारखंड के गुमला (कोटाम) की रहने वाली हैं। आशा लकड़ा पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सह-प्रभारी भी हैं।

आशा लकड़ा ने कहा,

"हम असल में यह नहीं कह सकते कि ये घुसपैठिए कब से आए हैं? लेकिन अगर आप बरहेट संथाली उत्तर और दक्षिण जैसे क्षेत्रों को देखें तो ये सभी आदिवासी गांव हैं। आज, यहां आदिवासियों की संख्या कम हो गई है। यह साबित करता है कि घुसपैठ हुई है, और ऐसा लगता है कि पिछले दो दशकों में ऐसा हुआ है। हमने गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट में यह कहा है।''

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आशा लकड़ा ने जोर देकर कहा कि आयोग ने इस मुद्दे की जांच करने और गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपने का काम अपने ऊपर ले लिया है। रिपोर्ट 15 सितंबर को सौंपी गई थी और इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।

मंत्रालय ने 11 सितंबर को झारखंड हाई के समक्ष प्रस्तुत किया था कि इस क्षेत्र में घुसपैठ हुई है और 1951 के बाद से इस क्षेत्र की आदिवासी आबादी में काफी कमी आई है। लेकिन मंत्रालय ने दोनों को आपस में नहीं जोड़ा। इसमें कहा गया था, ''बाहरी प्रवास, आदिवासियों में कम शिशु-जन्म दर, ईसाई धर्म में धर्मांतरण और अन्य कारणों से आदिवासी आबादी में कमी की मात्रा का भी आकलन किया जाना चाहिए।''

Jharkhand Bangladeshi infiltration

साहिबगंज, पाकुड़, गोड्डा और जामताड़ा के लोगों ने बताए हालात

आशा लकड़ा ने आरोप लगाया है कि संथाल परगना में जनसांख्यिकीय परिवर्तन "बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ" के कारण हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कई केंद्रीय मंत्रियों जैसे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस आरोप को और भी पुख्ता किया है।

आशा लकड़ा ने कहा कि एनसीएसटी की रिपोर्ट आयोग की एक टीम द्वारा साहिबगंज, पाकुड़, गोड्डा और जामताड़ा जिलों में किए गए क्षेत्रीय दौरों के आधार पर तैयार की गई थी। उन्होंने कहा कि टीम ने पिछले दो महीनों में अपने दौरे के दौरान इन जिलों में लगभग 100-150 लोगों से बात की, जिन्होंने 'गवाही दी है कि बांग्लादेशी उनके गांवों में घुसपैठ कर रहे हैं और आदिवासी महिलाओं को गुमराह करके और उन्हें शादी के जाल में फंसाकर आदिवासी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं।'

हालांकि आशा लकड़ा ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने गवाही दी है, उन्होंने अपने साथ हुई इस घटना की रिपोर्ट नहीं की है। उन्होंने कहा,

"वे पड़ोसी, पंचायत सदस्य और ग्रामीण हैं, जो अपने सामने बड़े पैमाने पर जनसांख्यिकीय परिवर्तन देख रहे हैं और पड़ोसी घरों में जो कुछ भी देख रहे हैं, उसकी रिपोर्ट हमें दे रहे हैं। जो लोग गुमराह हो रहे हैं और फंस रहे हैं, वे खुद हमसे बात करने से भी डरते हैं।"

आशा लकड़ा ने कहा कि एनसीएसटी टीम को ऐसे उदाहरण भी मिले हैं, जहां आदिवासी भूमि, जिस पर स्थानीय लोग पूजा करते थे, को मुसलमानों के लिए कब्रिस्तान में बदलने की मंजूरी दी गई थी, उन्होंने साहिबगंज के तेतरिया गांव में छह एकड़ के भूखंड का एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, "हमने जिन भी जिलों का दौरा किया, वहां हमें इसके उदाहरण मिले।"

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हिमंत बिस्वा सरमा बोले- हाई कोर्ट ने भी कहा, घुसपैठियों ने झारखंड को हाईजैक किया है

असम के मुख्यमंत्री और झारखंड चुनाव के भाजपा सह-प्रभारी हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि 'अब तो हाई कोर्ट ने भी कह दिया है कि घुसपैठियों ने झारखंड को हाईजैक कर लिया है। झारखंड से घुसपैठियों को निकालने के लिए NRC जरूरी है। जो अपनी नागरिकता का प्रमाण नहीं दे पाएंगे, उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत उनके देश वापस भेजा जाएगा। अचानक से वोटर लिस्ट में शामिल हुए लोगों की भी कुंडली NRC के माध्यम से निकाली जाएगी।''

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