झारखंड चुनाव: पूर्व DSP को भाजपा ने ऐसे बनाया महेशपुर से उम्मीदवार, हाई कोर्ट-चुनाव आयोग तक पहुंच गई थी बात

Jharkhand Election 2024: झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में इस बार आदिवासी बहुल संथाल परगना क्षेत्र के पाकुड़ जिले के महेशपुर निर्वाचन क्षेत्र सुर्खियों में आ गया है। महेशपुर विधानसभा सीट से पूर्व पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) नवनीत हेम्ब्रम ने भाजपा उम्मीदवार के रूप में 29 अक्टूबर को अपना नामांकन दाखिल किया है।

ये नामाकंन इसलिए चर्चाओं में है क्योंकि ये चुनाव के दूसरे चरण के लिए नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन था, जब नवनीत हेम्ब्रम ने पर्चा दाखिल किया। पूर्व DSP को भाजपा ने उम्मीदवार बनाने के लिए हाई कोर्ट से लेकर चुनाव आयोग तक पैरवी की थी। हेम्ब्रम का मुकाबला दो बार के जेएमएम विधायक स्टीफन मरांडी से है। 2019 के चुनाव में मरांडी ने भाजपा के मिस्त्री सोरेन को 34,000 वोटों से हराया था।

DSP Navneet Hembrom

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हेम्ब्रम का नाम 19 अक्टूबर को जारी भाजपा की 66 उम्मीदवारों की पहली सूची में था। लेकिन वह नामांकन दाखिल 29 अक्टूबर को कर पाए थे क्योंकि झारखंड पुलिस से उनका इस्तीफा, जो महीनों से लंबित था, झारखंड हाई कोर्ट के साथ-साथ भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के हस्तक्षेप के बाद हेमंत सोरेन सरकार द्वारा 28 अक्टूबर को ही स्वीकार किया गया था।

नवनीत हेम्ब्रम ने 15 जून को डीएसपी पद से दिया था इस्तीफा

नवनीत हेमब्रेम ने 15 जून को डीएसपी पद से इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि चर्चा थी कि उन्हें भाजपा अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित महेशपुर सीट से अपना उम्मीदवार बनाएगी। इस्तीफा स्वीकार न किए जाने से किसी भी सरकारी अधिकारी के चुनाव लड़ने की संभावना कम हो सकती है।

झारखंड पुलिस मैनुअल के इस्तीफों से संबंधित नियम 808 में कहा गया है कि ''पुलिस अधिकारियों द्वारा दिया जाने वाला हर इस्तीफा लिखित रूप में होगा, जिस पर आवेदन करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर होने चाहिए। पुलिस अधिनियम की धारा 8 के तहत उन्हें पदमुक्त होने के लिए दो महीने का नोटिस देना होता है, लेकिन उच्च अधिकारी उन्हें पहले भी पदमुक्त कर सकते हैं।"

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नवनीत हेम्ब्रम ने अगस्त में खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

बीजेपी से टिकट मिलने की उम्मीद में नवनीत हेमब्रेम ने जेएमएम के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से अपना इस्तीफा स्वीकार करवाने के लिए कई बार प्रयास किए। उनके करीबी सूत्रों ने बताया कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद जब सरकार ने उन्हें पदमुक्त नहीं किया तो उन्होंने अगस्त में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

4 सितंबर को हेम्ब्रेम की याचिका का निपटारा करते हुए हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने पुलिस महानिरीक्षक (कार्मिक) को आदेश दिया कि वे उनकी रिट याचिका को एक अभिवेदन के रूप में लें और चार हफ्ते के भीतर "पुलिस मैनुअल के नियम 808" को ध्यान में रखते हुए कानून के अनुसार औपचारिक आदेश पारित करें।

हालांकि, डेढ़ महीने तक सरकार द्वारा हेम्ब्रेम का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया, जिससे उन्हें आदेश के क्रियान्वयन न होने पर 18 अक्टूबर को उच्च न्यायालय में अवमानना ​​याचिका दायर करने के लिए मजबूर होना पड़ा। सुनवाई की अगली तारीख यानी 25 अक्टूबर को अतिरिक्त महाधिवक्ता-II के सहायक वकील ने अदालत को सूचित किया कि यह फाइल मुख्यमंत्री (हेमंत सोरेन) के समक्ष लंबित है और जल्द ही रिलीविंग ऑर्डर जारी किया जाएगा। हालांकि, 28 अक्टूबर की सुबह तक हेम्ब्रेम को यह नहीं मिला।

नवनीत हेम्ब्रम ने चुनाव आयोग से की शिकायत

इसके बाद भाजपा उम्मीदवार नवनीत हेम्ब्रम ने अपनी शिकायत के निवारण के लिए चुनाव आयोग को पत्र भेजा। चुनाव आयोग ने उसी दिन झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखा।

अपने पत्र में चुनाव आयोग ने हेम्ब्रम की शिकायत का हवाला देते हुए कहा, ''इस संबंध में झारखंड के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी जाए और आज यानी 28 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे तक तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजी जाए।'' तब जाकर मामला सुलझा।

झारखंड सरकार के गृह, कारागार और आपदा प्रबंधन विभाग ने एक अधिसूचना जारी की, जिसमें कहा गया कि "झारखंड के पुलिस उपाधीक्षक द्वारा सेवा से इस्तीफा देने के लिए प्रस्तुत किए गए अभ्यावेदन पर उचित विचार करने के बाद हेम्ब्रेम का इस्तीफा स्वीकार किया जाता है। उक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। शाम 4.30 बजे सरकार ने हाई कोर्ट को यह भी सूचित किया कि उसके आदेश का अनुपालन किया गया है।

नवनीत हेम्ब्रम बोले- अब मैं चुनाव प्रचार पर ध्यान दूंगा

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, नवनीत हेम्ब्रम ने कहा, ''मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि मैंने नामांकन दाखिल कर दिया है और अब मैं प्रचार पर ध्यान केंद्रित करना चाहता हूं।''

सरकार के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा, "झामुमो सरकार चुनाव जीतने के लिए बेताब दिख रही है और इसीलिए हेम्ब्रम को दर-दर भटकना पड़ रहा है। यह वही सरकार है जिसने पहले चुनाव आयोग के समक्ष समान अवसर के उल्लंघन की शिकायत की थी।"

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