Jharkhand Elections: 'परिवारवाद' की बहार, 8 नए सदस्य मैदान में, किस पार्टी ने दिया सबसे ज्यादा टिकट

Jharkhand Chunav 2024: झारखंड विधानसभा चुनाव में इसबार परिवारवाद की कई नई 'पौध' दिखाई पड़ रही है। कम से कम 8 ऐसे चेहरे चुनावी मैदान में अपनी सियासी किस्मत चमकाने की उम्मीदों में उतरे हैं, जो किसी न किसी राजनीतिक घरानों से ताल्लुक रखते हैं। सियासी परिवार के सदस्य सत्ताधारी इंडिया ब्लॉक और विपक्षी एनडीए दोनों में ही से चुनाव लड़ रहे हैं।

झारखंड विधानसभा की 81 सीटों के लिए 13 नवंबर और 20 नवंबर को दो चरणों में चुनाव होने हैं और नतीजे 23 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा के साथ ही आने हैं। राज्य में एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच ही मुख्य मुकाबला है।

jharkhand elections

1) बाबूलाल सोरेन
इसबार बीजेपी ने घाटशिला से पूर्व सीएम चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन को उतारा है। चंपाई खुद भी सरायकेला से पार्टी उम्मीदवार हैं। 40 वर्षीय बाबूलाल को टिकट देने के बारे में भाजपा नेता कहते हैं कि यह चंपाई के बीजेपी में शामिल होते वक्त उनसे किए गए वादे के मुताबिक है।

वैसे बाबूलाल अपने पिता की वजह से ज्यादा जाने जाते हैं और साथ ही फुटबॉल मैचों के आयोजनों के लिए भी मशहूर हैं। घाटशिला में उनका मुकाबला जेएमएम के रामदास से हो रहा है, जिन्होंने 2019 में बीजेपी के प्रत्याशी को करीब 7 हजार वोटों से हराया था।

2) मीरा मुंडा
बीजेपी ने झारखंड के पूर्व सीएम और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा को पोटका सीट से टिकट दिया है। मीरा कोल्हान यूनिवर्सिटी से पीएचडी हैं और चुनावी हलफनामे के मुताबिक कई तरह के कारोबार से भी जुड़ी हुई हैं। वैसे भाजपा की राजनीति में वह 1999 से ही सक्रिय हैं।

2019 में पोटका सीट पर जेएमएम उम्मीदवार संजीब सरदार ने बीजेपी प्रत्याशी मेनका सरदार को करीब 50 हजार वोटों से हराया था।

3) पूर्णिमा दास साहू
जमशेदपुर पूर्वी से भाजपा प्रत्याशी पूर्णिमा दास साहू भी राज्य के एक पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार की सदस्य हैं। वह ओडिशा के राज्यपाल और झारखंड के पूर्व सीएम रघुबर दास की बहू हैं। 2019 में हार से पहले इस सीट से रघुबर दास ही चुनाव जीतते थे। पिछली बार उन्हें भाजपा के बागी सरयू राय ने करीब 15,000 वोटों से हरा दिया था।

30 वर्षीय पूर्णिमा का मुकाबला इस बार जमशेदपुर के पूर्व सांसद और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजॉय कुमार के साथ है। पूर्णिमा साहू के ऊपर एक तरह से अपने ससुर की सियासी विरासत सहेजने की जिम्मेदारी है।

4) शत्रुघ्न महतो उर्फ शरद महतो
बाघमारा से भाजपा प्रत्याशी शत्रुघ्न महतो धनबाद से भाजपा सांसद ढुल्लू महतो के बड़े भाई हैं। ढुल्लू तीन-तीन बार बाघमारा विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और अब उनकी जगह पार्टी ने उनके भाई को उनकी विरासत सौंपी है।

वैसे शत्रुघ्न क्षेत्र में पिछले 15 साल से सक्रिय हैं और रोजाना कमाने-खाने वालों की हक की लड़ाई भी लड़ते आए हैं। उनके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले भी दर्ज हैं, जिनमें रेप का मामला भी शामिल है। 2019 में ढुल्लू बाघमारा में कांग्रेस उम्मीदवार से सिर्फ 800 वोटों से जीते थे।

5) तारा देवी
सिंदरी सीट से बीजेपी ने पार्टी के मौजूदा विधायक इंद्रजीत महतो की पत्नी तारा देवी को उतारा है। इंद्रजीत महतो का स्वास्थ्य 2021 से ठीक नहीं चल रहा है। 50 वर्षीय तारा देवी पहले जिला परिषद की सदस्य भी रह चुकी हैं और पति की अस्वस्थता की वजह से उनका काम देखते-देखते क्षेत्र में अपनी एक खास पहचान भी स्थापित कर चुकी हैं। इंद्रजीत महतो का इलाज हैदराबाद में चल रहा है।

2019 में इंद्रजीत महतो सिंदरी से एमसीसी के प्रत्याशी से लगभग 8,000 वोटों से जीते थे।

6) आलोक सोरेन
जेएमएम ने शिकारीपाड़ा विधानसभा सीट से 44 वर्षीय आलोक सोरेन को टिकट दिया है। वह दुमका लोकसभा से पार्टी सांसद नलिन सोरेन के बेटे हैं। इसलिए पार्टी ने उन्हें उनके पिता की ही सीट आवंटित की है।

एमबीए आलोक सोरेन एक कंपनी के भी मालिक हैं और जेएमएम सेंट्रल कमेटी के भी सदस्य हैं। आलोक ने दुमका लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीता सोरेन को हराने में अपने पिता की मदद की थी, जिससे वह सिर्फ 25,000 वोटों से ही जीत सके थे।

2019 के विधानसभा चुनाव में नलिन सोरेन ने शिकारीपाड़ा में भाजपा उम्मीदवार को करीब 30,000 वोटों से हराया था।

7) जगत माझी
इसी तरह से जेएमएम ने चाईबासा लोकसभा सीट से सांसद जोबा मांझी के बेटे जगत मांझी को मनोहरपुर सीट से टिकट दिया है। पूर्व मंत्री जोबा मांझी के बेटे जगत सिम्बायोसिस कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स से ग्रेजुएट हैं और जेएमएम की युवा इकाई से जुड़े रहे हैं। 2019 में जोबा ने मनोहरपुर में बीजेपी को 16,000 वोटों से हराया था।

8) निशत आलम
कांग्रेस ने पाकुड़ सीट से निशत आलम को टिकट दिया है। इनके पति और झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्री और चार बार के विधायक आलमगीर आलम अभी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में जेल में बंद हैं। पाकुड़ में निशत आलम का मुकाबला बीजेपी की सहयोगी ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन के अजहर आलम के साथ है।

अधिकारियों ने आलमगीर के निजी सचिव के ठिकाने से 37.5 करोड़ रुपए बरामद करने का दावा किया है। 2019 में कांग्रेस के टिकट पर आलमगीर ने बीजेपी को 60,000 से भी ज्यादा वोटों से हराया था।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+