Jharkhand Chunav: हेमंत सोरेन का आदिवासी कार्ड चलेगा या BJP का 'अवैध घुसपैठ' वाला मुद्दा?
Jharkhand Election 2024 News: झारखंड विधानसभा चुनाव में भी वैसे तो वे सारे मुद्दे हैं, जो आमतौर पर भारतीय राज्यों में होते हैं। लेकिन, 13 नवंबर और 20 नवंबर को होने वाले दो चरणों के चुनाव से करीब एक महीने पहले मुख्य तौर पर तीन मुद्दे ही हावी दिख रहे हैं। पहला, सत्ताधारी जेएमएम गठबंधन का आदिवासी कार्ड, दूसरा उसके उलट बीजेपी का 'अवैध घुसपैठियों' वाला मुद्दा और तीसरा, चुनावी रेवड़ियां।
जहां तक चुनावी रेवड़ियों की बात है तो हेमंत सरकार की 'मैया सम्मान योजना' की धार कुंद करने के लिए बीजेपी ने उससे भी बड़ा 'गोगो दीदी योजना' वाला दांव चल दिया है। सोरेन सरकार ने गरीब महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपए देना शुरू किया है तो बीजेपी ने 2,100 रुपए हर महीने देने का संकल्प लेकर उनकी चिंता बढ़ा रखी है। क्योंकि, इसके जवाब में अब जेएमएम को 2,500 रुपए वाली योजना लाने का वादा करने के लिए मजबूर होना पड़ गया है।

जेएमएम गठबंधन के पास है आदिवासी कार्ड
ऐसी स्थिति में हेमंत सोरेन और उनके जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन को अपने आदिवासी कार्ड पर ही ज्यादा भरोसा रहने वाला है, क्योंकि इस मुद्दे पर बीजेपी का रिकॉर्ड कमजोर रहा है। जैसे इस साल लोकसभा चुनावों से पहले भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर जेल जाना पड़ा।
इसपर उनके गठबंधन ने उनके आदिवासी होने वाला दांव चला और वह काम कर गया। राज्य में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए सुरक्षित 5 में से एक भी सीट बीजेपी नहीं जीत सकी। सत्ताधारी गठबंधन के पास विधानसभा चुनावों में भी यह मुद्दा कायम है।
भाजपा के पास है चंपाई कार्ड
2019 में भी झारखंड में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए सुरक्षित 28 विधानसभा सीटों में से 26 सीटें कांग्रेस-जेएमएम के ही खाते में गई थीं। बीजेपी ने इस बार जेएमएम के इस मजबूत आदिवासी किले को ध्वस्त करने के लिए दो बड़े दांव चले हैं।
एक तो पूर्व सीएम और जेएमएम के दिग्गज नेता रहे चंपाई सोरेन को पार्टी में शामिल करा लिया है। दूसरा, आदिवासी बेल्ट में 'अवैध घुसपैठ' का मुद्दा जोर-शोर से उठा रही है।
दक्षिण झारखंड का आदिवासी-बहुल कोल्हाण इलाके में विधानसभा की 14 सीटें हैं और पिछले चुनाव में बीजेपी यहां से साफ हो गई थी। चंपाई सोरेन को कोल्हान टाइगर कहा जाता है। अगर हेमंत सोरेन बीजेपी पर जेल में डालने का आरोप लगा रहे हैं तो चंपाई के बहाने भाजपा उनके इन दलीलों को खारिज करना चाहती है।
क्योंकि, चंपाई यह कहकर जेएमएम से निकले हैं कि वहां उन्हें अपमानित होना पड़ा, हेमंत के जेल से लौटने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। चंपाई यहां के सरायकेला सीट से चुनाव लड़ते हैं। इसी इलाके से पार्टी पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा को भी उतार सकती है।
भाजपा का 'अवैध घुसपैठ' वाला मुद्दा
बीजेपी के चुनावी रडार में इस बार संथाल परगना का इलाका बहुत ही महत्वपूर्ण है, जहां विधानसभा की 18 सीटें हैं। यह हेमंत के पिता शिवू सोरेन का गढ़ माना जाता है। 2019 में यहां 14 सीटें जेएमएम जीती थी और बीजेपी सिर्फ 4 पर विजयी बन पायी थी।
भाजपा इसी इलाके में 'अवैध घुसपैठियों' पर कथित तौर पर आदिवासियों की जमीन हड़प कर यहां की जनसांख्यिकी बदलने का आरोप लगा रही है।
हिंदू-मुसलमान वाली राजनीति की आशंका ने बढ़ाई जेएमएम की चिंता
बीजेपी 'अवैध घुसपैठिए' का जो मुद्दा उठा रही है, उसने कहीं न कहीं जेएमएम को भी परेशान करना शुरू कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता विनोद पांडे के मुताबिक, 'भाजपा नेता कह रहे हैं कि संथाल परगना में घुसपैठ हो रहा है। बीजेपी अपनी (केंद्र की) कमजोरी और नाकामी छिपा रही है औ उसे जेएमएम की नाकामी दिखाने की कोशिश कर रही है। राज्य सरकार चाहती है कि यदि घुपैठिए हैं तो वहां सुरक्षा बढ़ाई जाए। हालांकि, यह साफ है कि बीजेपी चुनावों से पहले हिंदू-मुसलमान पर राजनीति करना चाहती है।'
अगर जेएमएम की आशंका सही है तो भाजपा जिस मुद्दे को हवा देने की कोशिश कर रही है, उसका असर सिर्फ संथाल परगना तक सीमित नहीं रहने वाला है और शायद यह वजह है कि सत्ताधारी गठबंधन मुख्य विपक्षी पार्टी को इस मुद्दे पर घेरने में लगा है।












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