Jharkhand Chunav: संथाल परगना में ही घिर गई JMM, क्यों गुरुजी के गढ़ में पलट सकती है बाजी?

Jharkhand Chunav 2024: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन अपने समर्थकों और रांची से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में गुरुजी के नाम से ही चर्चित हैं। झारखंड का संथाल परगना इलाका गुरुजी का गढ़ माना जाता है। 2019 के विधानसभा चुनावों में जेएमएम की अगुवाई वाला गठबंधन यहां बीजेपी पर बहुत भारी पड़ा था। लेकिन, इसबार बीजेपी ने जेएमएम के इस चुनावी 'चक्रव्यूह' को तोड़ने के लिए काफी मेहनत की है।

झारखंड विधानसभा चुनाव की तारीखों से काफी पहले से ही भाजपा ने वहां अपने दो दिग्गजों केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा को चुनाव प्रभारी और सह-चुनाव प्रभारी बनाकर उतार दिया था। ये नेता पिछले कुछ महीनों से खासकर संथाल परगना इलाके में बांग्लादेशी अवैध घुसपैठ और उसकी वजह से यहां जनसांख्यिकी में बदलाव का मुद्दा उठा रहे थे।

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झारखंड चुनाव में बीजेपी ने अवैध-घुसपैठ को बनाया है बड़ा मुद्दा
चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह तक ने भी अवैध घुसपैठ और उनकी वजह से आदिवासियों की जमीन हड़पे जाने का मुद्दा गर्माए रखने की कोशिश की है।

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जहां तक इस इलाके में जनसांख्यिकी बदलाव की बात है तो वनइंडिया की एक रिपोर्ट में यह बताया जा चुका है कि यह सिर्फ दावा नहीं, बल्कि हकीकत है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण बरहट विधानसभा सीट में आने वाला साहिबगंज जिले का भोगनाडीह नाम का गांव है।

संथाल विद्रोह का केंद्र था बेरहट सीट का भोगनाडीह गांव
भोगनाडीह गांव सिर्फ झारखंड के लिए ही अहम नहीं है। बल्कि, यह देश के आधुनिक इतिहास के लिए भी बहुत गौरवशाली गांव है। यही गांव संथाल विद्रोह (वर्ष1855) का केंद्र था, जहां सिद्धो-कान्हू समेत उनके 6 भाइयों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़कर अपनी शहादत दी थी। यह घटना सिपाही विद्रोह (वर्ष 1857) और बिरसा मुंडा (वर्ष 1875 में बिरसा मुंडा का जन्म) के आंदोलन से भी पहले का है।

संथाल विद्रोह के क्रांतिकारियों के वंशज हैं मंडल मुर्मू
भाजपा ने संथाल परगना में अवैध घुसपैठ का जो मुद्दा उठाया है, उसे तब और धार मिल गई है, जब उसने भोगनाडीह गांव के निवासी मंडल मुर्मू को जेएमएम से पार्टी में शामिल करा लिया है।

जेएमएम और हेमंत सोरेन के बहुत बड़ा झटका
मंडल मुर्मू बेरहट विधानसभा सीट पर शिबू सोरेन के बेटे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नामांकन में प्रस्तावक थे। मंगल मुर्मू का बीजेपी में आना इस वजह से बहुत ज्यादा अहम है, क्योंकि वह सिद्धो-कान्हू जैसे महान क्रांतिकारियों के ही वंशज हैं। इस नजरिए से जहां हेमंत सोरेन के लिए यह अगर निजी चुनावी झटका है तो उनकी पार्टी की चुनावी राजनीति के लिए बहुत बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।

अब बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर बीजेपी को मिली नई धार
अब मंडल मुर्मू इस बार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए घूम-घूमकर प्रचार करेंगे। चर्चा है कि चुनावों के बाद भाजपा अपने बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अभियान की कमान भी उन्हें सौंप सकती है।

यह मामला भाजपा सांसद निशिकांत दुबे से लेकर पार्टी विधायक अनंत ओझा तक संसद से लेकर विधानसभा तक में लंबे समय से उठाते रहे हैं। मौजूदा चुनाव में बीजेपी के लिए यह मुद्दा सबसे बड़ा हथियार साबित हो रहा है।

संथाल परगना इलाके में दूसरे दौर में या 20 नवंबर को चुनाव है। इस इलाके में 18 सीटें हैं। 2019 में इनमें से 9 जेएमएम जीती थी और 4 पर उसकी सहयोगी कांग्रेस को जीत मिली थी। यहां आदिवासियों (ST) के लिए सुरक्षित सभी 7 सीटें भी जेएमएम के खाते में गई थी।

बीजेपी को मात्र 4 सीटें मिली थीं। लेकिन, बदले सियासी समीकरण ने भाजपा को मतदान से पहले बहुत ही बड़ी ताकत दे दी है।

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