Jharkhand Election 2024: हेमंत सोरेन के लिए 'संजीवनी' साबित होंगी कल्पना, इस तरह JMM की बनीं स्टार कैंपेनर
Jharkhand Assembly Election 2024: झारखंड में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। यहां की कुल 81 सीटों पर दो चरणों में वोटिंग होगी। पहला चरण 13 नवंबर और दूसरा 20 नवंबर को होगा। चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को आएंगे। ऐसे में राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी चुनावी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। इस बीच झारखंड की राजनीति में जो नया चेहरा उभरकर सामने आया है, वो है मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन।
कल्पना सोरेन ने कुछ ही महीने पहले एक्टिव पॉलिटिक्स में एंट्री की है, लेकिन उन्होंने खुद को काफी परिपक्व और अनुभवी नेता के तौर पर जनता के सामने पेश किया है। इतना ही नहीं पति हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद पार्टी को संभाला और जनता के बीच एक नई सहानुभूति पैदा करने में भी सक्षम हुईं।

मौजूदा चुनावी माहौल से पहले ही झारखंड में झामुमो पार्टी के अंदर वो स्टार कैंपेनर बनकर उभरी हैं, इसी के साथ इंडिया गठबंधन की बैठकों से लेकर पति के जेल से बाहर आने के बाद कांग्रेस दिग्गज नेताओं से मुलाकात में भी साथ रही।
तेजतर्रार शैली ने बनाया लोकप्रिय
अपने भाषणों में उनकी तेजतर्रार शैली और पार्टी के कार्यक्रमों में उनके भाषणों ने उन्हें अब लोगों और कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय बना दिया है। कल्पना सोरेन स्थानीय भाषा के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी पर भी समान पकड़ रखती हैं। इतना ही नहीं अपने भाषणों के जरिए वो पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ काफी अच्छा कनेक्ट हो पा रही है।
पति हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया, जिसके बाद लगातार विरोधी दलों को आड़े हाथ लेने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। उनकी रैली-सभाओं में बड़ी भीड़ उमड़ती है, जिसकी कारण है उनकी आकर्षक संवाद शैली, जिससे वो लोकप्रियता बनती चली गईं।

पति की गिरफ्तारी के बाद राजनीति में एंट्री
मार्च 1985 में जन्मी कल्पना के पास इंजीनियरिंग और एमबीए की डिग्री है। जनवरी 2024 में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में उनके पति हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद उनकी राजनीति में एंट्री हुई। झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद कल्पना ने एक प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में एक रैली में अपनी राजनीतिक शुरुआत की।
कल्पना को लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करने का काम सौंपा गया और उनके नेतृत्व में गठबंधन ने झारखंड की सभी पांच आदिवासी-आरक्षित सीटों पर जीत हासिल की। बाद में उन्होंने गिरिडीह का गांडेय उपचुनाव लड़ा और 26,000 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, यह सीट सरफराज अहमद के राज्यसभा में चुने जाने के बाद खाली हुई थी।
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कल्पना ने ध्यान प्रचार और पार्टी पर
कल्पना ने धीरे-धीरे अपने पति हेमंत सोरेन द्वारा पहले संभाले गए राजनीतिक कार्यभार को और अधिक बढ़ा लिया है। जबकि हेमंत झारखंड सरकार चलाते रहे, कल्पना ने अपना ध्यान प्रचार और पार्टी के प्रचार पर केंद्रित किया। उन्होंने झारखंड में व्यापक यात्रा की है, मैया सम्मान योजना के लिए 70 जनसभाएं की हैं और खास तौर पर महिलाओं से महत्वपूर्ण समर्थन हासिल किया।

महिला मतदाताओं से जुड़ने की कल्पना की क्षमता को उनके बढ़ते प्रभाव का एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। आगामी विधानसभा चुनावों में महिलाओं की निर्णायक भूमिका होने की उम्मीद है, झारखंड में कुल 2.6 करोड़ में से 1.29 करोड़ महिला मतदाता हैं।
हेमंत सोरेन की सरकार ने मैया सम्मान योजना जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से महिला मतदाताओं की सेवा की है, जिसके तहत 45 लाख से अधिक महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
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झामुमो को उम्मीद है कि कल्पना की अपील, खास तौर पर महिला मतदाताओं के लिए, गेम-चेंजर साबित हो सकती है। अगर महिला लाभार्थियों का एक बड़ा हिस्सा पार्टी को वोट देता है, तो झामुमो का मानना है कि विधानसभा चुनावों में उसकी सफलता की प्रबल संभावना है।
कल्पना आज से 70 और सभाओं को संबोधित करेंगी, उम्मीद है कि उनकी मौजूदगी से प्रमुख आदिवासी सीटों पर पार्टी की संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा।












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