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राजनीति से दूरी बनाने वाले हेमंत सोरेन आखिर कैसे बने झारखंड के सबसे पावरफुल नेता? करीबी के मौत ने बदली जिंदगी

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री के रूप में रूप में शपथ लेकर इतिहास दर्ज कर दिया है। हेमंत सोरेन झारखंड के 14वें मुख्यमंत्री बने हैं। झारखंड की राजनीति के इतिहास में हेमंत सोरेन सबसे पावरफुल नेता बन गए हैं। हेमंत सोरेन की इकलौती ऐसी सरकार है, जो झारखंड में सत्ता में दोबार वापसी की है। लेकिन एक वक्त था जब हेमंत सोरेन ने राजनीति से दूरी बना ली थी।

हेमंत सोरेन पढ़ाई करने के लिए विदेश जाना चाहते थे। हेमंत सोरेन का सपना इंजीनियरिंग की डिग्री और हायर एजुकेशन लेने का था। हेमंत सोरेन ने पटना हाई स्कूल से इंटरमीडिएट करने के बाद रांची के मेसरा स्थित बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एडमिशन भी लिया था। यहां से पढ़ाई करके उन्होंने विदेश जाने का पूरा मन बना लिया था, लेकिन उसी दौरान उनकी जिंदगी में कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी और वो राजनीति में आने को मजबूर हो गए।

Hemant Soren life story

पहले ही चुनाव में हार के बाद हेमंत सोरेन ने राजनीति छोड़ने का बना लिया था मन

10 अगस्त 1975 को हेमंत सोरेन का जन्म हुआ था। उनके जन्म के महीनेभर बाद ही पिता शिबू सोरेन ने सरेंडर कर दिया था। उनके ऊपर आदिवासियों के लिए किए गए आंदोलन को लेकर कई केस दर्ज हो चुके थे।

झारखंड गठन के बाद पहला चुनाव का रिजल्ट मार्च 2005 में आया था। हेमंत सोरेन भी इस चुनाव दुमका सीट लड़ रहे थे लेकिन निर्दलीय स्टीफन मरांडी से उनको हार मिली। इसके बाद हेमंत सोरेन ने राजनीति छोड़ने का मन बना लिया था। कहा जाता है कि वापस वह फोटोग्राफी और स्केचिंग के काम में लग गए थे। उन्होंने रांची के मेसरा स्थित बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए सरकारी कोटे से एडमिशन ले लिया था।

भाई दुर्गा सोरेन की मौत के बाद सक्रिय राजनीति में आए हेमंत सोरेन

वो पढ़ाई में पूरी तरह लगे हुए थे। विदेश जाकर आगे की पढ़ाई करना चाहते थे। इसी दौरान 22 मई 2009 को हेमंत सोरेन के बड़े भाई और शिबू सोरेन के बड़े बेटे दुर्गा सोरेन की किडनी फेल होने से अचानक मौत हो गई। उस दौरान दुर्गा सोरेन जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष थे। उन्होंने ही पूरा राज्य का कमान संभाले हुए था। भाई के निधन के बाद अचानक पार्टी की सारी जिम्मेदारी हेमंत सोरेन के कंधों पर आ गई।

हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन बढ़ती उम्र और खराब सेहत की वजह से सिर्फ केंद्र की राजनीति में ही सक्रिय रह पाए थे। ऐसे में हेमंत सोरेन को इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी और वह सक्रिय राजनीति में आ गए। जिसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। ये उसी का नतीजा है कि आज हेमंत सोरेन झारखंड के सबसे ताकतवर नेता बन गए हैं।

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2009 में चुनाव पिता शिबू सोरेन के साथ मिलकर लड़ा हेमंत सोरेन ने

2009 में हुए झारखंड विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन ने पिता के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इस बार वो दुमका सीट से स्टीफन मरांडी को हराकर विधानसभा पहुंचे थे। इस चुनाव के बाद जेएमएम ने सरकार बनाई और ता शिबू सोरेन 30 दिसम्बर 2009 को झारखंड के सीएम के तौर पर शपथ ली।

हालांकि ये सरकार ज्यादा दिन नहीं चली और 2010 में गिर गई थी। असल में अप्रैल 2010 में भाजपा मनमोहन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी। जहां जेएमएम ने यूपीए को समर्थन दिया था। इसे झारखंड में विश्वा्सघात की तरह देखा था। हेमंत सोरेन ने उस वक्त भाजपा से अपने पिता की गलती के लिए माफी भी मांगी थी लेकिन भाजपा नहीं मानी और सरकार गिर गई।

इसके बाद राष्ट्रपति शासन लगा। लेकिन फिर भाजपा ने जेएमएम के साथ मिलकर सरकार बनाई। उस दौरान 11 सितंबर 2010 को अर्जुन मुंडा सीएम बने और हेमंत सोरेन डिप्टी सीएम बने थे। हालांकि ये सरकार भी ज्यादा दिन नहीं चली और गठबंधन में डोमिसाइल नीति में मतभेद की वजह से 8 जनवरी 2013 को सरकार गिर गई। इसके बाद JMM ने आजसू के साथ मिलकर सरकार बनाई थी।

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2013 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे हेमंत सोरेन

हेमंत सोरेन पहली बार 13 जुलाई 2013 को मुख्यमंत्री बने थे। ये सरकार डेढ़ साल चली। उसके बाद 23 दिसंबर 2014 को विधानसभा चुनाव में जेएमएम की हार हो गई थी, जिसके बाद हेमंत सोरेन को इस्तीफा देना पड़ा था।

हेमंत सोरेन पांच साल तक सत्ता से दूर रहे लेकिन अपनी राजनीति पीच तैयार करते रहे जिसका फायदा उन्हें 2019 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला। विधानसभा चुनाव जीतकर हेमंत सोरेन 29 दिसम्बर 2019 को दूसरी बार झारखंड के सीएम बने।

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जब मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन को जाना पड़ा जेल

हेमंत सोरेन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 31 जनवरी 2024 को ईडी द्वारा गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी से पहले हेमंत सोरेन ने सीएम पद से इस्तीफा दिया था। जमानत पर बाहर आने के बाद 4 जुलाई 2024 को हेमंत सोरेन ने तीसरी बार सीएम पद की शपथ ली थी। उसके बाद हेमंत सोरेन ने 28 नवंबर 2024 को चौथी बार सीएम पद की शपथ ली। थी। हेमंत सोरेन के पहले उनके पिता शिबू सोरेन और भाजपा के अर्जुन मुंडा तीन-तीन बार सीएम पद की शपथ ले चुके हैं।

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